केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) में मैथिली भाषा को शामिल किया जाना न केवल भाषाई विविधता का सम्मान है, बल्कि यह करोड़ों मैथिली भाषियों के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय भी है।
CTET में मैथिली भाषा का समावेश – एक ऐतिहासिक क्रांति
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा आयोजित होने वाली CTET परीक्षा में मैथिली को शामिल करने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल होने के नाते, यह भाषा अब राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षकों की योग्यता का पैमाना बनेगी।
मैथिली भाषा का भौगोलिक विस्तार (कहां बोली जाती है?)
मैथिली मुख्य रूप से भारत और नेपाल के कुछ हिस्सों में बोली जाने वाली एक समृद्ध भाषा है।
- बिहार (भारत) – इसका मुख्य केंद्र उत्तर बिहार है। दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, समस्तीपुर, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, सुपौल, और अररिया जैसे जिलों में यह प्राथमिक भाषा है।
- झारखंड – झारखंड के कुछ हिस्सों (संथाल परगना) में भी मैथिली भाषियों की बड़ी संख्या है।
- नेपाल – यह नेपाल की दूसरी सबसे बड़ी बोली जाने वाली भाषा है, जो मुख्य रूप से तराई क्षेत्र (धनुषा, सिरहा, सप्तरी) में प्रचलित है।
जनवरी में ही यूनिवर्सिटी बन जाएगा NCERT, शिक्षा जगत में होगा बड़ा बदलाव
इस निर्णय से किस वर्ग को फायदा मिलेगा?
मैथिली के शामिल होने से मुख्य रूप से तीन वर्गों को सीधा लाभ होगा|
- शिक्षक अभ्यर्थी – बिहार और उत्तर भारत के लाखों छात्र जो अपनी मातृभाषा में निपुण हैं, अब CTET में मैथिली को ‘भाषा-1’ या ‘भाषा-2’ के रूप में चुन सकेंगे। इससे उनके स्कोरिंग की संभावना बढ़ेगी।
- भाषाई विशेषज्ञ – मैथिली साहित्य और भाषा से स्नातक/परास्नातक करने वाले युवाओं के लिए केंद्रीय विद्यालयों (KVS), नवोदय विद्यालयों (NVS) और दिल्ली के स्कूलों (DSSSB) में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
- ग्रामीण प्रतिभाएं – जो छात्र अंग्रेजी या हिंदी में कठिनाई महसूस करते थे, लेकिन मैथिली पर उनकी पकड़ मजबूत है, वे अब आत्मविश्वास के साथ शिक्षक बनने का सपना पूरा कर सकेंगे।
बच्चों को क्या फायदा मिलेगा?
नई शिक्षा नीति (NEP 2020) ‘मातृभाषा में शिक्षा’ पर जोर देती है।
- सहज समझ – जब एक बच्चा अपनी मातृभाषा (मैथिली) में स्कूल में शिक्षा प्राप्त करेगा, तो उसका संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) तेज होगा।
- सांस्कृतिक जुड़ाव – बच्चों को अपनी लोककथाओं, गीतों और इतिहास के बारे में स्कूल के पाठ्यक्रम के माध्यम से जानने को मिलेगा।
- ड्रॉप-आउट दर में कमी – जब स्कूल की भाषा और घर की भाषा एक होती है, तो बच्चों का स्कूल के प्रति आकर्षण बढ़ता है।
इस भाषा से हमें क्या सीखने को मिलेगा?
मैथिली केवल एक बोली नहीं, बल्कि एक दर्शन है। इसके जुड़ने से शिक्षा जगत को निम्नलिखित लाभ होंगे|
- सांस्कृतिक विविधता – विद्यापति जैसे कवियों की रचनाएं और ‘मधुबनी पेंटिंग’ जैसी कलाओं के पीछे की भाषाई बारीकियों को समझने का मौका मिलेगा।
- विनम्रता और संस्कार – मैथिली को अपनी मिठास और अहं रहित संबोधन के लिए जाना जाता है। यह छात्रों में नैतिक मूल्यों के विकास में सहायक होगी।
- लिपि का ज्ञान – मैथिली की अपनी प्राचीन लिपि ‘तिरहुता’ (मिथिलाक्षर) है। इसके जुड़ने से इस प्राचीन लिपि के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
कुल कितनी भाषाएं हैं अब
CTET परीक्षा आमतौर पर 20 भाषाओं में आयोजित की जाती रही है। मैथिली के आधिकारिक रूप से पूर्णतः शामिल होने के बाद, यह उन भाषाओं की सूची को और समृद्ध करेगी जो संविधान की 8वीं अनुसूची द्वारा मान्यता प्राप्त हैं। वर्तमान में मुख्य भाषाओं में हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, सिंधी, तमिल, तेलुगु, असमिया और गारो/खासी जैसी क्षेत्रीय भाषाएं शामिल हैं।
CTET में मैथिली का शामिल होना केवल एक परीक्षा का विषय नहीं है, बल्कि यह मिथिला की अस्मिता और पहचान की जीत है। यह ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना को साकार करता है।
CBSE ने 2026 में होने वाली बोर्ड परीक्षाओं मे फेरबदल पेपर की तारीख बदली







