नई दिल्ली। देश की शिक्षा व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी पूरी हो चुकी है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) को जल्द ही डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने वाला है। सूत्रों के मुताबिक, अगले कुछ दिनों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की बैठक होगी, जिसमें अंतिम मंजूरी मिलने के बाद शिक्षा मंत्रालय की ओर से जनवरी महीने में ही इसका आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा। वर्ष 1961 में एक स्वायत्त संस्था के रूप में स्थापित NCERT अब एक पूर्ण विश्वविद्यालय के रूप में नई पहचान हासिल करेगा।
1961 से 2026 तक का सफर
NCERT की स्थापना आज़ादी के बाद देश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पाठ्यक्रम निर्माण, शिक्षक प्रशिक्षण और शैक्षिक शोध को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई थी। बीते छह दशकों में NCERT ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई। देशभर के स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली NCERT की किताबें न केवल भारत में, बल्कि कई विदेशी स्कूलों में भी पढ़ाई जाती हैं। अब जब NCERT को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने जा रहा है, तो यह संस्था केवल स्कूल शिक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में भी अपनी सीधी भूमिका निभा सकेगी।
इसी माह में जारी होगा नोटिफिकेशन
शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यूजीसी की आगामी बैठक में NCERT को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा देने के प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। इसके तुरंत बाद केंद्र सरकार जनवरी में ही अधिसूचना जारी कर देगी। इसके साथ ही NCERT औपचारिक रूप से डिग्री प्रदान करने वाली यूनिवर्सिटी बन जाएगी।
जानिये शिक्षा और रोजगार से जुड़ी अहम अपडेट्स, CUET UG 2026 से लेकर स्कूल छुट्टियों तक की जानकारी
कौन-कौन से कोर्स होगें शुरू?
यूनिवर्सिटी बनने के बाद NCERT ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और डॉक्टरेट स्तर के कोर्स शुरू करेगा। इनमें मुख्य रूप से शिक्षा और उससे जुड़े विषयों पर फोकस रहेगा। संभावित कोर्स इस प्रकार हो सकते हैं।
ग्रेजुएशन लेवल
- चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीए-बीएड
- चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएससी-बीएड
- शिक्षा से जुड़े अन्य स्नातक कार्यक्रम
पोस्ट ग्रेजुएशन लेवल
- एमए (एजुकेशन),एमएड
- एजुकेशनल,साइकोलॉजी,करिकुलम डिजाइन जैसे विशेष कोर्स
रिसर्च और पीएचडी
शिक्षा, शिक्षण पद्धति, मूल्यांकन, डिजिटल एजुकेशन और शैक्षिक नीति जैसे विषयों में पीएचडी
इन कोर्सों के जरिए NCERT शिक्षक शिक्षा और शैक्षिक अनुसंधान का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।
NCERT डायरेक्टर का क्या है कहना?
NCERT के डायरेक्टर प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि जिस तरह IIT, IIM और CBSE जैसे संस्थान वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं, उसी तरह NCERT यूनिवर्सिटी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराएगी। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी बनने के बाद NCERT विदेशी शिक्षण संस्थानों के साथ टाई-अप कर सकेगा, स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम शुरू होंगे और प्लेसमेंट की भी शुरुआत होगी। इससे छात्रों को न केवल बेहतर शिक्षा मिलेगी, बल्कि करियर के नए रास्ते भी खुलेंगे।
अभी क्या है स्थिति
फिलहाल NCERT के अंतर्गत देशभर में रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन (RIE) संचालित होते हैं। ये संस्थान अलग-अलग राज्यों की यूनिवर्सिटी से संबद्ध होते हैं। NCERT पहले से ही चार साल का इंटीग्रेटेड बीए-बीएड और बीएससी-बीएड कोर्स चला रहा है, लेकिन इन कोर्सों की डिग्री संबंधित राज्य विश्वविद्यालयों से मिलती है।
उदाहरण के तौर पर, NCERT भोपाल का क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान NAAC से ए++ ग्रेड प्राप्त कर चुका है, फिर भी डिग्री राज्य विश्वविद्यालय द्वारा दी जाती है। यूनिवर्सिटी का अपना शैक्षणिक कैलेंडर होने के कारण कई बार परीक्षा और परिणाम समय पर नहीं आ पाते, जिससे छात्रों को नुकसान उठाना पड़ता है।
- यूनिवर्सिटी बनने से क्या होगा बदलाव-NCERT के यूनिवर्सिटी बनने से कई व्यावहारिक और शैक्षणिक फायदे होंगे जैसे-
- समय पर परीक्षा और परिणाम-अब NCERT खुद परीक्षा आयोजित करेगा और परिणाम घोषित करेगा, जिससे छात्रों को देरी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
- डिग्री की प्रतिष्ठा-NCERT के नाम से मिलने वाली डिग्री की अपनी अलग पहचान और विश्वसनीयता होगी।
- रिसर्च को मिलेगा बढ़ावा-शिक्षा से जुड़े शोध कार्यों को नई दिशा मिलेगी और रिसर्च कल्चर मजबूत होगा।
- प्लेसमेंट और करियर अवसर-यूनिवर्सिटी बनने के बाद कैंपस प्लेसमेंट की शुरुआत हो सकेगी, जिससे छात्रों को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे।
- ग्लोबल लेवल पर NCERT की मौजूदगी-नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 में भारतीय शिक्षा संस्थानों की वैश्विक स्तर पर मौजूदगी बढ़ाने पर जोर दिया गया है। NCERT को यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने के बाद विदेशी विश्वविद्यालयों से सहयोग करना आसान होगा। स्टूडेंट और फैकल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम शुरू किए जा सकेंगे। विदेशी छात्रों को भारत में शिक्षक प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा।भविष्य में विदेशों में भी NCERT के कैंपस खोले जा सकते हैं। यह कदम भारतीय शिक्षा प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती देगा।
- राज्यों और शिक्षकों को क्या फायदा-NCERT यूनिवर्सिटी बनने से राज्य सरकारों और शिक्षा विभागों को भी लाभ मिलेगा। शिक्षक प्रशिक्षण, करिकुलम डेवलपमेंट और मूल्यांकन प्रणाली में सुधार के लिए राज्यों को सीधे NCERT से सहयोग मिलेगा। इससे स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
शिक्षा के मंदिर में शर्मनाक आरोप: IGNTU के शिक्षक संघ महासचिव पर छात्रा से अश्लील हरकत का मामला
शिक्षा जगत में उत्साह
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि NCERT को यूनिवर्सिटी का दर्जा देना एक दूरदर्शी फैसला है। इससे शिक्षक शिक्षा, रिसर्च और पॉलिसी निर्माण के क्षेत्र में भारत की स्थिति और मजबूत होगी। NCERT का डीम्ड यूनिवर्सिटी बनना केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं है, बल्कि यह भारतीय शिक्षा व्यवस्था में एक नए युग की शुरुआत है। इससे छात्रों को बेहतर शिक्षा, समय पर डिग्री, वैश्विक अवसर और मजबूत करियर विकल्प मिलेंगे। इसी माह यानें कि जनवरी में नोटिफिकेशन जारी होने के साथ ही NCERT यूनिवर्सिटी देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में एक नई भूमिका निभाने के लिए तैयार होगी।
JEE और GATE में क्या है अंतर, तकनीकी शिक्षा की दो अलग दिशा, Exam के पहले चुनें ऑप्शन







