पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने आधिकारिक तौर पर ममता बनर्जी की कैबिनेट को भंग कर दिया हैं। इसका मतलब यह है कि इस्तीफा न देने के बाद भी ममता बनर्जी अब मुख्यमंत्री नहीं रही। ममता बनर्जी लगातार मीडिया के सामने इस्तीफा न देने की बात कह रही थी। विधानसभा को भंग किए जाने पर ममता बनर्जी अभी भी सोशल मीडिया अकाउंट्स में खुद को पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री बता रही है। उनके फेसबुक, इंस्टाग्राम और X हैंडल पर टीएमसी संस्थापक व चेयरपर्सन के साथ चीफ मिनिस्टर ऑफ पश्चिम बंगाल बायो में लिखा है। ममता बनर्जी अभी भी हार को बर्दाश्त नहीं कर पाई है शायद यही वजह है कि वह अपने बायो से मुख्यमंत्री पद को हटाना नहीं चाहती हैं। ममता बनर्जी अब जितनी भी चालबाजी कर ले लेकिन 9 मई को नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह होना है जिसमें बीजेपी के कई बड़े नेता शामिल होंगे।
टीएमसी 15 साल सत्ता में रही
ममता बनर्जी 15 साल तक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री रही है। साल 2011 से वह मुख्यमंत्री का दायित्व निभाते आ रही हैं। राज्यपाल ने अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए 17 वीं विधानसभा को भंग किया था। विधानसभा को भंग करते ही ममता बनर्जी भी मुख्यमंत्री नहीं रही। वह अपने निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर से भी चुनाव हार गई। बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें 15000 वोटो से करारी शिकस्त दी। ममता बनर्जी अपनी शिकस्त को मानने से साफ इंकार कर रही है और वह बीजेपी पर वोट चोरी का आरोप लगा रही है। तीन पंचवर्षीय बंगाल की सत्ता में रहने के बाद भी ममता बनर्जी को सत्ता का मोह नहीं छूट पा रहा है शायद यही वजह है कि वह अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स में अभी तक मुख्यमंत्री का टैग बरकरार रखी है। हालांकि ममता बनर्जी के प्रोफाइल बदलने और न बदलने से कुछ नहीं होता है। राज्यपाल ने पहले ही अपने संवैधानिक शक्तियो का प्रयोग करते हुए कैबिनेट को भंग कर दिया है।
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शुभेंदु अधिकारी होंगे बंगाल के अगले मुख्यमंत्री
बीजेपी ने शुभेंदु अधिकारी को पश्चिम बंगाल का अगला मुख्यमंत्री बनाया है। शुभेंदु अधिकारी बंगाल में बीजेपी के काफी भरोसेमंद नेता माने जाते है। शुभेंदु अधिकारी को कट्टर हिंदू नेता माना जाता है। बीजेपी ज्वाइन करने से पहले शुभेंदु अधिकारी पहले टीएमसी में हीं थे। टीएमसी से ही उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थीं। टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी की छाया में ही शुभेंदु अधिकारी विधायक, सांसद और बाद में राज्य मंत्री बने। टीएमसी के परिवारवाद नीति से शुभेंदु अधिकारी खुश नहीं थे इसलिए उन्होंने साल 2019 में टीएमसी का साथ छोड़कर बीजेपी का हाथ थामा। 2021 में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी को जीत हासिल तो नहीं हो सकी लेकिन शुभेंदु अधिकारी की जनता में पकड़ बन गई। उन्होंने जल्दबाजी न दिखाते हुए बीजेपी का हाथ नहीं छोड़ा और अगले विधानसभा 2026 का वह इंतजार कर मेहनत करने लगे। साल 2026 में हुए विधानसभा चुनावों में उन्होंने टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को भवानीपुर सीट से 15000 वोटो से करारी मात दी। शुभेंदु अधिकारी ने पहले विधानसभा चुनावों में भी ममता बनर्जी को मात दिया है।
टीएमसी की रणनीति को परखते है शुभेंदु
शुभेंदु अधिकारी टीएमसी में लगभग 25 से ज्यादा सालों तक रहे। उन्होंने टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के मार्गदर्शन में कई चुनाव लड़े और जीते भी। टीएमसी में ज्यादा वक्त तक रहने के बाद उन्हें टीएमसी की रणनीति की अच्छे से परख हो गई। जब शुभेंदु अधिकारी 2019 में बीजेपी में आए तब ममता बनर्जी ने उन्हें मनाने की भरपूर कोशिश की लेकिन शुभेंदु अधिकारी को अपने स्वाभिमान से ज्यादा प्रेम था। उन्होंने टीएमसी की तरफ वापस मुड़कर कभी नहीं देखा। उन्हें बीजेपी ने समझा और विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए भवानीपुर सीट और नंदीग्राम सीट से टिकट दिया। बीजेपी के इस विश्वास पर वह पूरी तरीके से खरे उतरे। अब जब शुभेंदु अधिकारी बीजेपी के भरोसेमंद नेता हो गए है तो मुख्यमंत्री के पद योग्य भी वह बिल्कुल है। शुभेंदु अधिकारी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बेहद करीबी माना जाता है। विधायक दल के नेता के चुनाव हेतु पर्यवेक्षक अमित शाह ही थे। अमित शाह ने मुख्यमंत्री पद के लिए सर्वसम्मति से शुभेंदु अधिकारी के नाम पर मुहर लगाई जिसका समर्थन बीजेपी के सभी विधायकों ने किया।







