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​कोलकाता के साल्टलेक स्थित आनंदलोक अस्पताल में भीषण अग्निकांड –  मरीजों में मची अफरा-तफरी बचाव अभियान जारी

कोलकाता के साल्टलेक स्थित आनंदलोक अस्पताल में भीषण अग्निकांड
नवजोत कौर सिद्धू
On: अप्रैल 21, 2026 2:45 अपराह्न
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​पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता का साल्टलेक (बिधाननगर) इलाका मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 की सुबह एक भयावह घटना का गवाह बना। क्षेत्र के प्रतिष्ठित आनंदलोक अस्पताल की दूसरी मंजिल से अचानक धुआं और आग की लपटें निकलने लगीं। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे अस्पताल परिसर और आसपास के इलाकों में हड़कंप मच गया।

​सुबह का समय होने के कारण अस्पताल में मरीजों की भारी संख्या मौजूद थी। आग लगने की खबर मिलते ही वार्डों में चीख-पुकार मच गई। हालांकि, प्रशासन और स्थानीय लोगों की मुस्तैदी ने एक बड़ी त्रासदी को टालने में मदद की।

​घटना का विवरण –  आखिर क्या हुआ?

​मंगलवार सुबह करीब 8:30 से 9:00 बजे के बीच, अस्पताल के कर्मियों ने दूसरी मंजिल पर स्थित एक वार्ड से धुआं निकलते देखा। कुछ ही मिनटों में धुआं इतना घना हो गया कि पूरी मंजिल काली चादर से ढक गई।

​प्रमुख बिंदु

  • स्थान – आनंदलोक अस्पताल, साल्टलेक, कोलकाता।
  • समय –  मंगलवार सुबह, 21 अप्रैल 2026।
  • प्रभावित क्षेत्र –  अस्पताल की दूसरी मंजिल (प्रमुख वार्ड और डायग्नोस्टिक सेंटर के समीप)।
  • प्रारंभिक कारण –  बिजली के बोर्ड में शॉर्ट सर्किट

​जब तक दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुँचतीं, आग अस्पताल के कुछ केबिनों और मेडिकल उपकरणों तक फैल चुकी थी। प्लास्टिक और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जलने से निकलने वाले जहरीले धुएं ने बचाव कार्य में शुरुआती बाधा उत्पन्न की।

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​बचाव अभियान और मरीजों की सुरक्षा

​जैसे ही आग की सूचना मिली, अस्पताल प्रशासन ने तुरंत ‘कोड रेड’ जारी किया। सबसे बड़ी प्राथमिकता उन मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालना थी जो चलने-फिरने में असमर्थ थे या आईसीयू (ICU) में भर्ती थे।

  • मरीजों का स्थानांतरण – मरीजों को स्ट्रेचर, व्हीलचेयर और यहां तक कि चादरों के सहारे सुरक्षित रूप से नीचे उतारा गया। कई गंभीर मरीजों को पास के अन्य निजी अस्पतालों में तुरंत शिफ्ट किया गया।
  • दमकल विभाग की कार्रवाई – सूचना मिलने के 15 मिनट के भीतर दमकल की 5 से अधिक गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। बाद में आग की तीव्रता को देखते हुए और गाड़ियां बुलाई गईं।
  • पुलिस और प्रशासन –  विधाननगर पुलिस की टीम ने इलाके की घेराबंदी की ताकि एम्बुलेंस को आने-जाने के लिए खाली रास्ता (Green Corridor) मिल सके।

“हमारी प्राथमिकता मरीजों की जान बचाना थी। अस्पताल के कर्मचारियों और स्थानीय युवाओं ने साहस दिखाते हुए धुएं के बीच से लोगों को निकाला। गनीमत रही कि आग को समय रहते नियंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई।”  एक प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार

आग का कारण –  शॉर्ट सर्किट की आशंका

दमकल विभाग के अधिकारियों द्वारा की गई प्रारंभिक जांच के अनुसार, आग लगने का मुख्य कारण दूसरी मंजिल के बिजली पैनल में हुआ शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। गर्मियों के मौसम में एयर कंडीशनर (AC) और अन्य चिकित्सा उपकरणों पर बढ़ते लोड के कारण अक्सर पुरानी वायरिंग में इस तरह की समस्याएं आती हैं।

​अस्पताल के फायर फाइटिंग सिस्टम ने काम किया या नहीं, इसकी जांच के लिए एक फोरेंसिक टीम को बुलाया गया है। राज्य सरकार ने भी इस मामले में एक उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।

अस्पताल सुरक्षा और बुनियादी ढांचा – एक विश्लेषण

कोलकाता जैसे महानगरों में अस्पतालों में आग लगना एक पुरानी और गंभीर समस्या रही है। आनंदलोक अस्पताल की यह घटना फिर से कई सवाल खड़े करती है:

 फायर ऑडिट की आवश्यकता

क्या अस्पताल का नियमित फायर ऑडिट किया गया था? विशेषज्ञों का कहना है कि हर 6 महीने में बिजली के तारों की जांच और फायर स्प्रिंकलर सिस्टम का परीक्षण अनिवार्य होना चाहिए।

आपातकालीन निकासी मार्ग

अस्पतालों में संकरी गलियां और बंद खिड़कियां अक्सर धुएं के फंसने का कारण बनती हैं, जिससे दम घुटने का खतरा रहता है। आनंदलोक की घटना में भी खिड़कियों के शीशे तोड़कर धुएं को बाहर निकालने का प्रयास किया गया।

​कर्मचारियों का प्रशिक्षण

​इस घटना में एक सकारात्मक पहलू यह रहा कि नर्सों और वार्ड बॉयज ने साहस का परिचय दिया। मॉक ड्रिल और आपातकालीन प्रशिक्षण ने मरीजों को सुरक्षित निकालने में अहम भूमिका निभाई।

​वर्तमान स्थिति – राहत और पुनर्वास

​वर्तमान में, दमकल विभाग ने आग पर लगभग काबू पा लिया है। हालांकि, ‘कूलिंग-ऑफ’ प्रक्रिया अभी भी जारी है ताकि मलबे के नीचे छिपी कोई चिंगारी दोबारा आग न भड़का दे।

  • हताहतों की संख्या – प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन धुएं के कारण कुछ मरीजों की हालत बिगड़ गई है।
  • प्रशासनिक कदम – पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल प्रबंधन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। प्रभावित मंजिल को फिलहाल सील कर दिया गया है।

भविष्य के लिए सबक

​साल्टलेक आनंदलोक अस्पताल की यह घटना हमें याद दिलाती है कि चिकित्सा संस्थान, जहां जीवन बचाया जाता है, वहां सुरक्षा मानकों में रत्ती भर भी चूक कितनी महंगी पड़ सकती है। शॉर्ट सर्किट जैसी सामान्य दिखने वाली तकनीकी खराबी एक भीषण त्रासदी में बदल सकती है।

सरकार और निजी संस्थानों को निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए

  • ​पुराने भवनों की वायरिंग का आधुनिकीकरण।
  • ​एआई-आधारित फायर डिटेक्शन सिस्टम का उपयोग।
  • ​अस्पतालों के आसपास एम्बुलेंस के लिए निर्बाध मार्ग की स्थायी व्यवस्था।

​21 अप्रैल 2026 की यह सुबह कोलकाता के इतिहास में एक चेतावनी के रूप में याद रखी जाएगी कि आपदा कभी भी दस्तक दे सकती है, और हमारी सतर्कता ही हमारा एकमात्र बचाव है।

​​नोट – यह रिपोर्ट उपलब्ध प्राथमिक जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। विस्तृत जांच के बाद आंकड़ों और तथ्यों में बदलाव संभव है।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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