ईरान में हिजाब के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच, महिलाओं की गिरफ्तारी पिटाई और मौतों की ओर इशारा यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण और समसामयिक विषय है जो वैश्विक राजनीति, मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच के जटिल संतुलन को दर्शाता है।
न्यूयॉर्क सिटी मेयर चुनाव और जोहरान ममदानी का ‘वर्ल्ड हिजाब डे’ विवाद – एक विस्तृत विश्लेषण
हाल ही में न्यूयॉर्क सिटी के मेयर पद के उम्मीदवार और वर्तमान असेंबली सदस्य जोहरान ममदानी द्वारा वर्ल्ड हिजाब डे (World Hijab Day) पर की गई एक सोशल मीडिया पोस्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब ईरान में महिला, जीवन, स्वतंत्रता’ (Woman, Life, Freedom) आंदोलन अपनी जड़ें जमा चुका है और हिजाब वहां दमन का प्रतीक बन गया है।
घटना का मुख्य संदर्भ
जोहरान ममदानी ने वर्ल्ड हिजाब डे के अवसर पर हिजाब पहनने वाली महिलाओं के समर्थन में एक पोस्ट साझा की। उनका उद्देश्य न्यूयॉर्क में मुस्लिम महिलाओं के प्रति बढ़ते इस्लामोफोबिया के खिलाफ एकजुटता दिखाना था। हालांकि उनकी इस पोस्ट को ईरान में चल रहे हिजाब विरोधी प्रदर्शनों के परिप्रेक्ष्य में देखा गया जिसके कारण मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विरोधियों ने उनकी कड़ी आलोचना की।
आलोचना के मुख्य बिंदु
आलोचकों का तर्क है कि जब ईरान में महिलाएं हिजाब के अनिवार्य कानून के खिलाफ अपनी जान की बाजी लगा रही हैं तब एक पश्चिमी राजनेता द्वारा हिजाब का महिमामंडन करना उन महिलाओं के संघर्ष का अपमान है।
- ईरान की स्थिति की अनदेखी – आलोचकों ने कहा कि ममदानी ने उस दर्दनाक वास्तविकता को नजरअंदाज किया जहां महसा अमीनी की मौत के बाद हजारों महिलाएं जेलों में हैं।
- दमन का प्रतीक बनाम पसंद का प्रतीक – पश्चिम में हिजाब को पसंद (Choice) के रूप में देखा जाता है लेकिन ईरान और अफगानिस्तान जैसे देशों में यह अनिवार्यता (Compulsion) है। आलोचकों का कहना है कि ममदानी इस अंतर को स्पष्ट करने में विफल रहे।
- राजनीतिक अवसरवाद – कुछ लोगों ने इसे न्यूयॉर्क के मुस्लिम वोट बैंक को लुभाने की एक कोशिश करार दिया।
ईरान में हिजाब विरोधी आंदोलन – एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
इस विवाद को समझने के लिए ईरान की वर्तमान स्थिति को समझना अनिवार्य है। सितंबर 2022 में महसा (जीना) अमीनी की नैतिकता पुलिस (Morality Police) की हिरासत में मौत ने एक ऐसी चिंगारी भड़काई जो आज भी शांत नहीं हुई है।
महसा अमीनी की मौत और उसके परिणाम
22 वर्षीय कुर्द महिला महसा अमीनी को तेहरान में केवल इसलिए गिरफ्तार किया गया था क्योंकि उसका हिजाब उचित तरीके से नहीं लगा था। उनकी मृत्यु के बाद पूरे ईरान में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।
- महिलाओं का साहस – ईरानी महिलाओं ने सार्वजनिक रूप से अपने हिजाब जलाए और अपने बाल काटे।
- सरकारी दमन – मानवाधिकार संगठनों के अनुसार इन प्रदर्शनों के दौरान 500 से अधिक लोग मारे गए और हजारों को गिरफ्तार किया गया।
- गिरफ्तारी और पिटाई – वर्तमान में भी ईरान की सड़कों पर नूर योजना (Noor Plan) के तहत उन महिलाओं को बेरहमी से पीटा और गिरफ्तार किया जा रहा है जो बिना हिजाब के बाहर निकलती हैं।
- वर्ल्ड हिजाब डे – उद्देश्य और विवाद वर्ल्ड हिजाब डे की शुरुआत 2013 में न्यूयॉर्क की ही एक नागरिक नज़मा खान ने की थी। इसका उद्देश्य हिजाब के प्रति जागरूकता फैलाना और इसे पहनने वाली महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को रोकना था।
- परिप्रेक्ष्य – तर्क
- समर्थकों का पक्ष – यह धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक पहचान का मामला है। पश्चिमी देशों में हिजाब पहनने वाली महिलाओं को अक्सर नफरत का सामना करना पड़ता है।
- विरोधियों का पक्ष – यह उन लाखों महिलाओं की पीड़ा को कमतर आंकता है जिन्हें कानूनी तौर पर इसे पहनने के लिए मजबूर किया जाता है। इसे ‘धार्मिक कट्टरता का वैधीकरण’ कहा जाता है।
अमेरिका में भारतीय मूल के डेमोक्रेट उम्मीदवार बने न्यूयॉर्क शहर के मेयर
जोहरान ममदानी और न्यूयॉर्क की राजनीति
जोहरान ममदानी न्यूयॉर्क की राजनीति में एक उभरता हुआ चेहरा हैं जो खुद को एक प्रगतिशील लोकतांत्रिक समाजवादी (Democratic Socialist) के रूप में पेश करते हैं।
उनके रुख पर सवाल-
- ममदानी की आलोचना करने वालों में केवल दक्षिणपंथी ही नहीं बल्कि कई उदारवादी और ईरानी मूल के कार्यकर्ता भी शामिल हैं। उनका कहना है कि
- चयनात्मक मानवाधिकार – एक राजनेता को मानवाधिकारों पर बात करते समय वैश्विक दृष्टिकोण रखना चाहिए।
- तथ्यों की अनदेखी – ईरान में हिजाब न पहनने पर कोड़े मारने और मौत की सजा तक का प्रावधान है। ऐसे में हिजाब डे मनाना उन पीड़ितों के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है।
वैश्विक प्रतिक्रिया और मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट
एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसी संस्थाओं ने ईरान में महिलाओं की स्थिति पर चिंता जताई है।
- संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट – यूएन ने स्पष्ट किया है कि ईरान में महिलाओं के खिलाफ लैंगिक रंगभेद (Gender Apartheid) जैसी स्थिति पैदा हो गई है।
- डिजिटल निगरानी – ईरान सरकार अब फेसियल रिकग्निशन तकनीक का उपयोग कर रही है ताकि उन महिलाओं की पहचान की जा सके जो बिना हिजाब के कार चला रही हैं या सार्वजनिक स्थानों पर घूम रही हैं।
स्वतंत्रता का दोहरा संघर्ष
जोहरान ममदानी के मामले ने एक पुरानी बहस को फिर से जीवित कर दिया है – क्या एक संस्कृति में जो स्वतंत्रता है वह दूसरी संस्कृति में दमन हो सकती है?
न्यूयॉर्क में एक महिला के पास हिजाब पहनने या न पहनने का विकल्प है और उस विकल्प का सम्मान होना चाहिए। लेकिन ईरान में यह विकल्प मौजूद नहीं है। ममदानी की आलोचना का मुख्य आधार यही है कि उन्होंने स्वतंत्रता के पक्ष को तो देखा लेकिन अनिवार्यता के शिकार लोगों की आवाज़ को दबा दिया।
यह विवाद हमें सिखाता है कि वैश्विक राजनीति में सहानुभूति दिखाते समय संदर्भ (Context) सबसे महत्वपूर्ण होता है। मानवाधिकारों की लड़ाई चयनात्मक नहीं हो सकती वह सभी के लिए समान होनी चाहिए चाहे वह न्यूयॉर्क की सड़क हो या तेहरान का चौक।







