डेलीबार्ता,नई दिल्ली/लाहौर ब्यूरो। एक तरफ पाकिस्तान की आम जनता महंगाई, बेरोजगारी और बदहाल अर्थव्यवस्था से जूझ रही है, तो दूसरी ओर वहां की सत्ताधारी सरकारें जनता की परेशानियों से बेपरवाह नजर आ रही हैं। पाकिस्तान के पंजाब सूबे से सामने आए एक सरकारी आदेश ने पूरे देश में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तूफान खड़ा कर दिया है। इस आदेश के मुताबिक पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज के सजने-संवरने, मेकअप और प्रेजेंटेशन पर चार करोड़ पाकिस्तानी रुपये का विशेष बजट जारी किया गया है।
इस फैसले ने न सिर्फ विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका दिया है, बल्कि आम नागरिकों के बीच भी भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब देश की आर्थिक हालत बेहद खराब है, तो क्या शासक वर्ग को इस तरह की फिजूलखर्ची का अधिकार है?
गुप्त आदेश, बड़ा विवाद
कैबिनेट सचिवालय से जारी हुई विशेष ग्रांट जानकारी के अनुसार यह आदेश 12 जनवरी को पंजाब सरकार के कैबिनेट सचिवालय द्वारा जारी किया गया। आदेश में मुख्यमंत्री मरियम नवाज के साथ-साथ सूचना मंत्री आजम जाहिद बुखारी के नाम का भी उल्लेख है। दस्तावेज में साफ तौर पर कहा गया है कि यह राशि उनके मेकअप, सार्वजनिक कार्यक्रमों, मीटिंग्स और भीड़ के बीच “प्रेजेंटेबल” दिखने से जुड़े खर्चों के लिए जारी की जा रही है।
हालांकि यह आदेश बेहद गोपनीय तरीके से जारी किया गया था, लेकिन सरकार के भीतर ही कुछ अधिकारियों ने इस पर आपत्ति जताई, जिसके बाद यह मामला सार्वजनिक हो गया।
जनता की थाली खाली, हुक्मरानों की तिजोरी भरी, महंगाई ने तोड़ी आम पाकिस्तानी की कमर
पाकिस्तान इस वक्त अपने इतिहास के सबसे कठिन आर्थिक दौर से गुजर रहा है। रोजमर्रा की जरूरत की चीजें आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं।
- दूध: 200 से 370 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर
- पेट्रोल: 250 रुपये प्रति लीटर से अधिक
- केला: 400–500 रुपये दर्जन
- सेब: करीब 500 रुपये प्रति किलो
ऐसे हालात में जब लोग दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, मुख्यमंत्री और मंत्रियों के सौंदर्य खर्च पर करोड़ों रुपये खर्च करना लोगों को सीधा अन्याय लग रहा है।
पहले टायर विवाद, अब मेकअप का तूल पकड़ता बजट…मरियम नवाज पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब मरियम नवाज सरकारी खर्चों को लेकर विवादों में घिरी हों। इससे पहले उनकी सरकारी गाड़ी के टायर बदलवाने पर एक करोड़ पाकिस्तानी रुपये खर्च किए जाने का मामला सामने आया था, जिस पर काफी आलोचना हुई थी। अब मेकअप और प्रेजेंटेशन के नाम पर चार करोड़ रुपये का बजट सामने आने के बाद विपक्ष और सोशल मीडिया पर सरकार को जमकर घेरा जा रहा है।
जवाब देना मुश्किल, सरकार बैकफुट पर..अंदरूनी विरोध भी तेज
सरकारी सूत्रों के अनुसार इस आदेश को लेकर पंजाब सरकार के भीतर भी असंतोष है। कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे “अनावश्यक और असंवेदनशील खर्च” बताया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा हालात में मुख्यमंत्री मरियम नवाज के लिए इस फैसले का बचाव करना बेहद मुश्किल हो गया है। जनता में यह संदेश गया है कि सरकार को आम लोगों की परेशानियों से कोई सरोकार नहीं है।
कर्ज में डूबा पाकिस्तान, विदेशों में भी भुगतान लंबित…दूतावासों के बिल तक नहीं चुका पा रही सरकार
पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि पिछले दो वर्षों में देश अपने कई विदेशी दूतावासों और काउंसलेट के बकाया बिल तक नहीं चुका पाया।
सूत्रों के मुताबिक दुनिया के कई देशों में स्थित पाकिस्तानी दूतावासों ने इस्लामाबाद को पत्र लिखकर बिजली, पानी, हीटर, लिफ्ट और वाहनों के भुगतान के लिए धन जारी करने की मांग की, लेकिन सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
न्यूयॉर्क काउंसलेट का चौंकाने वाला खुलासा, साढ़े तीन करोड़ रुपये का बकाया
पाकिस्तान के न्यूयॉर्क स्थित काउंसलेट की ओर से इस्लामाबाद के डिप्टी अकाउंट ऑफिसर को भेजे गए एक पत्र में खुलासा किया गया कि- 1 जुलाई 2023 से 30 जून 2024 तक साढ़े तीन करोड़ पाकिस्तानी रुपये का भुगतान लंबित है। यह राशि लिफ्ट और हीटर की मरम्मत, दफ्तर संचालन और आधिकारिक वाहनों के खर्च के लिए थी। कई मामलों में पाकिस्तानी मंत्रियों को विदेश दौरों के दौरान दूतावास की गाड़ियां तक उपलब्ध नहीं हो सकीं।
“अवाम नहीं, सिर्फ सत्ता की चिंता”विशेषज्ञों की तीखी टिप्पणी
भारत समेत कई देशों में भारतीय दूतावासों में सेवाएं दे चुके रिटायर्ड कर्नल मनदीप सिंह ढिल्लो का कहना है कि पाकिस्तान की सरकारों का रवैया हमेशा से एक-सा रहा है।
उनके अनुसार,“पाकिस्तान की सत्ता संरचना में अवाम सबसे आखिरी पायदान पर है। शासक वर्ग हमेशा अपने आराम और दिखावे पर खर्च करता आया है। 2024 से 2026 के बीच लिखी गई सरकारी चिट्ठियां पाकिस्तान की कंगाली को साफ उजागर करती हैं।”
वे कहते हैं कि जब देश अपने दूतावासों का खर्च नहीं उठा पा रहा, तब मुख्यमंत्री के मेकअप पर करोड़ों खर्च करना यह दिखाता है कि सरकार की प्राथमिकताएं कितनी विकृत हैं।
विपक्ष का हमला, जनता में आक्रोश..सोशल मीडिया पर उठी इस्तीफे की मांग
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद पाकिस्तान में विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री मरियम नवाज से जवाब और माफी की मांग की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर #MakeupBudget और #PakistanInflation जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या यह पैसा अस्पतालों, स्कूलों या गरीबों की मदद में नहीं लगाया जा सकता था?
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प्रतीक बनता दिखावा, सत्ता और संवेदनहीनता की कहानी
चार करोड़ रुपये का यह मेकअप बजट अब सिर्फ एक सरकारी आदेश नहीं, बल्कि पाकिस्तान में सत्ता और आम जनता के बीच बढ़ती खाई का प्रतीक बन गया है। जहां एक ओर लोग महंगाई से आत्महत्या तक को मजबूर हैं, वहीं शासक वर्ग का यह फैसला जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा माना जा रहा है। पाकिस्तान की मौजूदा आर्थिक हालत में इस तरह के फैसले न केवल गैर-जिम्मेदाराना हैं, बल्कि सरकार की संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े करते हैं। अगर यही प्राथमिकताएं बनी रहीं, तो आने वाले समय में जनता का आक्रोश और गहराना तय माना जा रहा है।







