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ईरान में सरकार की अर्थव्यवस्था के खिलाफ विरोध प्रदर्शन -सड़क पर उतरा लाखों लोगो का सैलाब

ईरान में सरकार की अर्थव्यवस्था के खिलाफ विरोध प्रदर्शन
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 30, 2025 9:30 अपराह्न
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​ईरान में जन-विद्रोह-ईरान में इस समय दिसंबर 2025 आर्थिक बदहाली और मुद्रास्फीति के खिलाफ जनआक्रोश अपने चरम पर है। राजधानी तेहरान सहित देश के कई बड़े शहरों में लाखों लोग सड़कों पर हैं। यह विरोध प्रदर्शन केवल महंगाई तक सीमित नहीं है|

बल्कि अब यह सीधे तौर पर सरकार की नीतियों और शासन व्यवस्था के खिलाफ एक बड़े विद्रोह का रूप ले चुका है।

क्यों हो रहा है यह विरोध प्रदर्शन 

​ईरान में इस समय हो रहे विरोध प्रदर्शनों के पीछे कई गहरे और जटिल कारण हैं-

  • मुद्रा का ऐतिहासिक पतन –ईरान की मुद्रा रियाल अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। दिसंबर 2025 में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 1.42 मिलियन 14 लाख रियाल से ऊपर चली गई है। इससे लोगों की जमा-पूंजी की वैल्यू कौड़ियों के भाव हो गई है।
  • ​आसमान छूती महंगाई (Hyperinflation) –आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मुद्रास्फीति की दर 42.2% से ऊपर है लेकिन खाद्य पदार्थों और चिकित्सा क्षेत्र में यह 72% को पार कर गई है।
  • ​अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और स्नैपबैक (Snapback) –सितंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र के स्नैपबैक प्रतिबंधों के लागू होने से ईरान के तेल निर्यात और बैंकिंग सिस्टम पर भारी चोट पड़ी है।

​इजरायल के साथ युद्ध का प्रभाव

जून 2025 में इजरायल और ईरान के बीच हुए 12 दिवसीय युद्ध ने बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुँचाया जिससे अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है| ईरान इस समय भीषण जल संकट और बिजली की कटौती (Rationing) का सामना कर रहा है जिससे आम जनता का जीवन दूभर हो गया है।

​क्या महंगा हुआ और क्या सस्ता

​ईरान में सस्ताकुछ भी नहीं बचा है। पिछले एक साल में कीमतों में आए बदलावों की सूची इस प्रकार है-

वस्तु सेवा स्थिति अनुमानित वृद्धि वार्षिक 

  • खाद्य सामग्री ब्रेड अंडा दूध अत्यधिक महंगी 70% – 100% 
  • ईंधन पेट्रोल डीजलभारी वृद्धि 66% सब्सिडी खत्म होने के बाद
  • दवाइयां और स्वास्थ्य सेवाएं दुर्लभ और महंगी 50 % -60%
  • किराया और प्रॉपर्टी पहुंच से बाहर 45% +
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल विलासिता की वस्तु 100% से अधिक

नोट –  ब्रेड और अनाज जैसी बुनियादी चीजों की कीमतें दोगुनी हो गई हैं।

कई इलाकों में तो आलू और प्याज जैसी सब्जियों की कीमत भी एक सामान्य मजदूर की दैनिक मजदूरी के बराबर पहुंच गई है।  प्रदर्शन किसके खिलाफ हो रहे हैं| ​यह विरोध प्रदर्शन सीधे तौर पर ईरानी सरकार और उसके नेतृत्व के खिलाफ हैं|

​सुप्रीम लीडर और क्लैरिकल शासन

प्रदर्शनकारी तानाशाही खत्म करो के नारे लगा रहे हैं और धार्मिक नेतृत्व को देश की बर्बादी का जिम्मेदार मान रहे हैं।

  • राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन-नवनिर्वाचित राष्ट्रपति के उन वादों के खिलाफ गुस्सा है जिसमें उन्होंने अर्थव्यवस्था सुधारने की बात की थी लेकिन बजट में वेतन न बढ़ाने के फैसले ने आग में घी का काम किया है।
  • ​IRGC इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स-जनता का आरोप है कि देश का पैसा विकास के बजाय क्षेत्रीय युद्धों और सेना पर खर्च किया जा रहा है।

​कहां-कहां हो रहे हैं विरोध प्रदर्शन

​विरोध की आग अब तेहरान के बाजार Bazaar से निकलकर पूरे देश में फैल चुकी है

  • तेहरान (Tehran)-मुख्य केंद्र ग्रैंड बाजार है। यहाँ के व्यापारियों ने दुकानें बंद कर हड़ताल कर दी है। इसके अलावा लालेज़ार स्ट्रीट और इमाम खुमैनी स्क्वायर पर भारी भीड़ देखी जा रही है।
  • ​हमदान (Hamadan) –यहाँ प्रदर्शन काफी उग्र रहे हैं जहाँ सुरक्षा बलों और जनता के बीच सीधी झड़पें हुई हैं।
  • ​मशहद और इस्फहान –इन बड़े शहरों में भी लोग महंगाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं।
  • ​दक्षिणी बंदरगाह जैसे बंदर अब्बास-यहाँ ट्रक ड्राइवरों और मजदूरों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का असर सबसे ज्यादा है।
  • अन्य शहर-ज़ंजन केरमान और क़ेश्म द्वीप जैसे इलाकों में भी रात के समय रैलियां निकाली जा रही हैं।

कितने लोग शामिल हैं

​हालांकि सटीक संख्या बताना कठिन है क्योंकि सरकार ने इंटरनेट पर पाबंदियां लगा रखी हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ​राजधानी तेहरान में लाखों की भीड़ सड़कों पर देखी गई है।

​यह 2022 के महसा अमीनी विरोध प्रदर्शनों के बाद का सबसे बड़ा जन-आंदोलन माना जा रहा है। ​इसमें केवल युवा ही नहीं बल्कि बाजार के व्यापारी (Merchants) सेवानिवृत्त कर्मचारी (Retirees) ट्रक ड्राइवर और नर्सें भी बड़ी संख्या में शामिल हैं।

​भविष्य की राह

​ईरान की स्थिति इस समय अग्निपरीक्षा जैसी है। सरकार ने प्रदर्शनों को दबाने के लिए आंसू गैस और बल प्रयोग का सहारा लिया है-

साथ ही सेंट्रल बैंक के गवर्नर को भी बदल दिया है लेकिन जनता का गुस्सा शांत होता नहीं दिख रहा। जब तक मुद्रा की गिरावट नहीं रुकती हैऔर बुनियादी चीजों के दाम कम नहीं होते यह आर्थिक विद्रोह शांत होना मुश्किल लग रहा है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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