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कोलकाता में देर रात ईवीएम पर बवाल टीएमसी के आरोपों को चुनाव आयोग ने नकारा

कोलकाता में देर रात ईवीएम पर बवाल टीएमसी के आरोपों को चुनाव आयोग ने नकारा
नवजोत कौर सिद्धू
On: मई 1, 2026 3:43 अपराह्न
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कोलकाता।पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच कोलकाता में देर रात उस समय हाई वोल्टेज राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला, जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से छेड़छाड़ का आरोप लगाया। इस आरोप के बाद पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने स्ट्रॉन्गरूम के बाहर धरना शुरू कर दिया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।यह पूरा विवाद केंद्रीय कोलकाता स्थित खुदीराम अनुशीलन केंद्र के स्ट्रॉन्गरूम को लेकर सामने आया, जहां कई विधानसभा सीटों की ईवीएम रखी गई हैं। 

देर रात शुरू हुई हलचल

घटना की शुरुआत रात के सन्नाटे में तब हुई जब स्ट्रॉन्गरूम के बाहर तैनात कुछ राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने परिसर के भीतर असामान्य गतिविधियां देखीं। कोलकाता के इस इलाके में जहां ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को कड़ी सुरक्षा में रखा गया है, वहां अचानक कुछ वाहनों के आने और अधिकारियों की आवाजाही ने पहरा दे रहे कार्यकर्ताओं को सतर्क कर दिया। देखते ही देखते यह खबर आग की तरह फैली और तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सहित भारी संख्या में समर्थक मौके पर पहुंच गए।

पार्टी कार्यकर्ताओं का आरोप था कि स्ट्रॉन्गरूम के पिछले गेट से कुछ अज्ञात लोग अंदर दाखिल हुए हैं और उनके पास कुछ संदिग्ध फाइलें और बक्से थे। कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया कि जब चुनाव संपन्न हो चुके हैं और मशीनें सील हैं, तो रात के अंधेरे में वहां कौन सा आधिकारिक काम किया जा रहा था? माहौल तब और गरमा गया जब सुरक्षा में तैनात कर्मियों ने शुरू में प्रदर्शनकारियों को भीतर जाने या जानकारी देने से मना कर दिया। इसके बाद परिसर के मुख्य द्वार पर ही कार्यकर्ताओं ने धरना देना शुरू कर दिया और नारेबाजी तेज हो गई।

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ममता बनर्जी हुईं सक्रिय

इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को निर्देश दिया कि राज्य भर के सभी स्ट्रॉन्गरूम्स के बाहर निगरानी और कड़ी कर दी जाए। मुख्यमंत्री की ओर से संदेश दिया गया कि पार्टी कार्यकर्ता मतगणना के दिन तक अपनी आंखें और कान खुले रखें और किसी भी छोटी से छोटी संदिग्ध घटना की रिपोर्ट तुरंत शीर्ष नेतृत्व को दें।ममता बनर्जी ने चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही को लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि वे खुद स्थिति पर नजर रख रही हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि जनता के वोटों की रक्षा करना पार्टी की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसके बाद विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के उम्मीदवार भी अपने-अपने इलाकों के स्ट्रॉन्गरूम का जायजा लेने के लिए निकल पड़े।

चुनाव आयोग का जवाब

बढ़ते दबाव और हंगामे को देखते हुए चुनाव आयोग के अधिकारियों को आधी रात को ही स्पष्टीकरण जारी करने के लिए आगे आना पड़ा। 

आयोग ने साफ तौर पर कहा कि ईवीएम मशीनों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ की बात पूरी तरह गलत और भ्रामक है। अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि जिस गतिविधि को लेकर विवाद हुआ, वह असल में पोस्टल बैलेट यानी डाक मतपत्रों से जुड़ी एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया थी।

आयोग के मुताबिक, चुनाव के बाद कुछ कागजी कार्यवाही और पोस्टल बैलेट की छंटनी का काम किया जा रहा था, जो मतगणना की तैयारी का एक हिस्सा है। अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि इस प्रक्रिया के बारे में नियमानुसार सूचना पहले ही दे दी गई थी, लेकिन शायद किसी स्तर पर संचार की कमी की वजह से कार्यकर्ताओं में गलतफहमी पैदा हुई। आयोग ने आश्वासन दिया कि स्ट्रॉन्गरूम के मुख्य कपाट जहां मशीनें रखी हैं, वे पूरी तरह सुरक्षित और सील हैं और उनकी सुरक्षा में कोई चूक नहीं हुई है।

सीसीटीवी फुटेज और भरोसे की बहाली

विवाद को शांत करने के लिए अंततः प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल को सीसीटीवी कंट्रोल रूम का दौरा कराया। उन्हें लाइव फीड दिखाई गई और यह समझाने की कोशिश की गई कि सुरक्षा व्यवस्था के सभी मानकों का पालन किया जा रहा है।अधिकारियों ने दिखाया कि कैसे त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरे में मशीनों को रखा गया है और वहां परिंदा भी बिना अनुमति के प्रवेश नहीं कर सकता।

इस दौरान पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से सड़क खाली करने और शांति बनाए रखने की अपील की। घंटों चले ड्रामे के बाद जब नेताओं ने खुद व्यवस्था का मुआयना कर लिया, तब जाकर प्रदर्शनकारी कुछ हद तक शांत हुए। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि वे अपनी निजी निगरानी जारी रखेंगे और मतगणना तक किसी भी अधिकारी पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करेंगे।

कोलकाता में ईवीएम को लेकर हुआ यह विवाद भले ही चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के बाद कुछ शांत हो गया हो, लेकिन इसने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

लोकतंत्र में यह जरूरी है कि सभी दलों को चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा हो। ऐसे में हर छोटे-बड़े विवाद को गंभीरता से लेना और समय पर स्पष्ट करना बेहद अहम हो जाता है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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