रूस और यूक्रेन का युद्ध कम होने का नाम नहीं ले रहा है। रूस ने यूक्रेन पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन अटैक किया है। रूस ने 600 से ज्यादा ड्रोन मिसाइल और 40 से ज्यादा मिसाइल यूक्रेन के उपर दाग दी है। हालांकि यूक्रेन ने दावा किया कि उसने सभी ड्रोन हमलों को विफल कर दिया । रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन कई बार यह कह चुके है कि यूक्रेन से युद्ध इतनी जल्दी खत्म नहीं होगा। रूस की शर्ते अगर यूक्रेन नहीं माना तो युद्ध जारी रहेगा। रूस ने यह हमला 24 और 25 अप्रैल की रात को यूक्रेन पर ड्रोन मिसाइल दागकर की।
अलग अलग मिशाइल का हुआ प्रयोग
इस हमले में रूस ने यूक्रेन पर अलग-अलग मिसाइलें दागीं। इन मिसाइलों में 12 बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें, 5 कैलिबर मिसाइलें और अलग-अलग तरीके के ड्रोन थे। रूस के द्वारा दागी गई मिसाइलों का मुख्य target यूक्रेन का सैन्य ठिकाना था। वह सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागकर यूक्रेन के इन्फ्रास्ट्रक्चर को कमजोर करना चाहता है। लेकिन यूक्रेन भी पीछे नहीं हट रहा है वह रूस पर हमला तो कर ही रहा है साथ साथ रूस के द्वारा दागी गई मिसाइलों को एंटीसेप्ट कर उसको विफल कर रहा है।
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रूस–यूक्रेन और अमेरिका–ईरान के बीच जंग जारी
फिलहाल विश्व में शांति की चाह रखने वालों के लिए इस समय सब कुछ ठीक नहीं है। इधर अमेरिका इजरायल का ईरान के साथ युद्ध चल रहा है तो रूस का यूक्रेन के साथ। सभी जगह परमाणु हमले के आसार नज़र आ रहे है। अमेरिका जहां ईरान को परमाणु शक्ति नहीं बनने दे रहा है तो वही रूस भी यूक्रेन कर हथियारों की नाकाबंदी कर रहा है।
हार्मुज की खाड़ी में जहाजों के आने जाने पर प्रतिबंध लगाना यह भी युद्ध का एक बड़ा कारण बन रहा है। हार्मुज की खाड़ी के बंद होने से पूरी दुनिया में कच्चे तेल में गिरावट आई है। भारत में भी LPG और कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे है। जब भारत जैसे विकासशील देश में उसका प्रभाव लगातार पड़ रहा है तो अन्य देशों पर भी इस युद्ध का प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
रूस यूक्रेन के अधिकांश भाग में करना चाहता है कब्जा
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की दावा करते है कि रूस यूक्रेन की धरती पर कब्जा करना चाहता है। लेकिन यूक्रेन ऐसा नहीं होने देगा। वह अपनी धरती के लिए आखिरी सांस तक लड़ेगा। वही सुप्रीम कोर्ट में भारत के विदेश विभाग ने जानकारी दी कि लगभग 10 भारतीयों की मौत रूस यूक्रेन युद्ध में हो चुकी है। यह सभी भारतीय रूस की सेना में कार्यरत थे। यह सभी भारतीय पढ़ाई करने के उद्देश्य से रूस गए थे लेकिन मृतकों के परिजनों का दावा है कि रूसी फौज ने उनके बेटे को जबरदस्ती फौज में भर्ती करवाया। आगे क्या भारत सरकार जांच कमेटी बनाती है या नहीं, यह देखने की बात होगी।







