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रूस ने युद्ध मे सैनिकों की कमी को पूरा करने पेश किया नया आकर्षक भर्ती पैकेज 

रूस ने युद्ध मे सैनिकों की कमी को पूरा करने पेश किया नया आकर्षक भर्ती पैकेज 
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 30, 2026 1:12 अपराह्न
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रूस-यूक्रेन युद्ध आज के समय की सबसे बड़ी और विनाशकारी सैन्य संघर्षों में से एक बन चुका है। 24 फरवरी, 2022 को शुरू हुआ यह युद्ध अब अपने चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है। इस लंबे खिंचते संघर्ष ने न केवल लाखों जिंदगियों को लील लिया है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति को भी पूरी तरह से बदल दिया है।

हाल ही में रूस ने अपनी सेना में सैनिकों की कमी को पूरा करने के लिए जो “नया आकर्षक भर्ती पैकेज” पेश किया है, उसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। आइए, इस युद्ध के कारणों, इसके प्रभाव और रूस के इस नए ऑफर के हर पहलू को गहराई से समझते हैं।

रूस-यूक्रेन युद्ध के मुख्य कारण

यह युद्ध किसी एक घटना का परिणाम नहीं है, बल्कि दशकों से चल रहे विवादों और सुरक्षा चिंताओं का नतीजा है:

  • नाटो (NATO) का विस्तार-  रूस हमेशा से यूक्रेन के ‘नाटो’ में शामिल होने के खिलाफ रहा है। पुतिन का मानना है कि यदि यूक्रेन नाटो का सदस्य बनता है, तो पश्चिमी देशों की सेनाएं और मिसाइलें रूस की सीमा पर तैनात हो जाएंगी, जो रूस की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है।
  • ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध – राष्ट्रपति पुतिन का तर्क रहा है कि रूसी और यूक्रेनी “एक ही लोग” हैं। वे यूक्रेन को एक स्वतंत्र संप्रभु देश के बजाय रूस के ऐतिहासिक प्रभाव क्षेत्र का हिस्सा मानते हैं।
  • डोनबास (Donbas) विवाद – 2014 में क्रीमिया पर कब्जे के बाद से ही पूर्वी यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र (डोनेट्स्क और लुहान्स्क) में अलगाववादी जंग चल रही थी। रूस का दावा था कि वहां रूसी भाषी लोगों का उत्पीड़न हो रहा है, जिसे रोकना उसका कर्तव्य है।
  • विसैन्यीकरण और विनाजीकरण-  रूस ने अपने “विशेष सैन्य अभियान” का लक्ष्य यूक्रेन का ‘विसैन्यीकरण’ (Demilitarization) करना बताया था ताकि वह भविष्य में रूस के लिए खतरा न रहे।

युद्ध का समय और हताहतों की संख्या

  • युद्ध की अवधि –  इस युद्ध को शुरू हुए अब 3 साल से अधिक (लगभग 4 साल) का समय बीत चुका है।
  • मौत का आंकड़ा – स्वतंत्र रिपोर्टों और खुफिया एजेंसियों (जैसे CSIS और BBC) के अनुसार, जनवरी 2026 तक
  • कुल हताहत-  अनुमान है कि रूस और यूक्रेन दोनों तरफ मिलाकर लगभग 20 लाख (2 Million) सैनिक मारे गए या घायल हुए हैं।
  • रूस की स्थिति – रूस के लगभग 12 लाख सैनिक हताहत (मृत, घायल या लापता) हुए हैं, जिनमें से 3.25 लाख से अधिक मौतों का अनुमान है।
  • यूक्रेन की स्थिति-  यूक्रेन के लगभग 6 लाख सैनिक हताहत हुए हैं। इसके अलावा हजारों आम नागरिकों ने भी अपनी जान गंवाई है।

आर्थिक नुकसान और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

युद्ध ने दोनों देशों की कमर तोड़ दी है, हालांकि रूस अपनी ऊर्जा संपदा के कारण अभी भी टिका हुआ है।

विवरणरूस (Russia)यूक्रेन (Ukraine) 
GDP ग्रोथ (2025-26)0.6% से 1% (धीमी वृद्धि) 21% से अधिक (भारी गिरावट) 
मुद्रा की स्थितिरूबल की कीमत में भारी गिरावटरिव्निया (Hryvnia) लगभग 31% टूटी 
बुनियादी ढांचा नुकसानलगभग $1 बिलियन (ड्रोन हमलों से)$500 बिलियन से अधिक (शहर तबाह) 
कुल आर्थिक नुकसानखर्बों डॉलर (प्रतिबंधों और युद्ध खर्च के कारण)खर्बों डॉलर (विदेशी मदद पर निर्भर) 

रूस ने यूक्रेन के किन हिस्सों पर कब्जा किया है?

जनवरी 2026 तक, रूस ने यूक्रेन के लगभग 19% से 20% क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है। मुख्य क्षेत्र निम्नलिखित हैं

  • क्रीमिया (Crimea) – 2014 से ही रूस के कब्जे में है।
  • लुहान्स्क (Luhansk)-  लगभग 99% हिस्सा रूस के नियंत्रण में है।
  • डोनेट्स्क (Donetsk) – लगभग 72% से अधिक हिस्सा रूस के पास है।
  • ज़ापोरिज्जिया (Zaporizhzhia) –  इस क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा और परमाणु संयंत्र रूस के पास है।
  • खेरसॉन (Kherson) – नीपर नदी के पूर्वी तट का हिस्सा रूस के कब्जे में है।

रूस का नया भर्ती पैकेज –  क्या है खास

रूस ने ‘अनिवार्य लामबंदी’ (Mandatory Mobilization) से बचने के लिए “स्वैच्छिक अनुबंध” (Contract Service) का सहारा लिया है। इसके लिए बेहद लुभावने ऑफर दिए गए हैं|

1 – वित्तीय लाभ (Money & Bonuses)

  • साइनिंग बोनस-  सेना में शामिल होते ही सैनिकों को एकमुश्त बोनस दिया जा रहा है। कुछ क्षेत्रों (जैसे खांटी-मांसी) में यह $50,000 (लगभग 42 लाख रुपये) तक है।
  • मासिक वेतन – सैनिकों को हर महीने लगभग 2 लाख रूबल ($2,000 – $3,000) का वेतन दिया जा रहा है, जो रूस के औसत वेतन से 3-4 गुना अधिक है।
  • परिवार के लिए सुरक्षा –  युद्ध में मृत्यु होने पर परिवार को भारी मुआवजा और बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जा रही है।

2 –  कैदियों के लिए ‘आजादी का रास्ता’ (Offer for Prisoners)

जेल में बंद कैदियों के लिए यह ऑफर सबसे आकर्षक है क्योंकि

  • सजा की माफी –  यदि कोई कैदी 6 महीने या एक निश्चित अवधि तक युद्ध के मोर्चे पर रहता है, तो उसकी शेष सजा माफ कर दी जाती है।
  • नया जीवन –  युद्ध से लौटने के बाद वे एक साफ रिकॉर्ड के साथ समाज में वापस आ सकते हैं। यही कारण है कि जेलों से हजारों कैदी ‘वैगनर ग्रुप’ और अब सीधे सेना में शामिल हो रहे हैं।

3 – विदेशी नागरिकों के लिए नागरिकता (Offer for Foreigners)

भारत, नेपाल, क्यूबा और अफ्रीका के कई देशों के लोग इस ऑफर की ओर आकर्षित हो रहे हैं:

  • फास्ट ट्रैक नागरिकता – युद्ध लड़ने के बदले रूस उन्हें और उनके परिवार को रूसी नागरिकता (Passport) देने का वादा कर रहा है।
  • रोजगार का लालच –  कई लोगों को ‘सपोर्ट स्टाफ’ के नाम पर ले जाया जाता है और फिर सेना के साथ अनुबंध करवा लिया जाता है।

रूस को इस भर्ती से क्या फायदा हो रहा है?

  • राजनीतिक स्थिरता -:पुतिन आम मध्यम वर्ग के रूसी युवाओं को जबरन युद्ध में नहीं झोंकना चाहते, क्योंकि इससे देश के अंदर विद्रोह हो सकता है। कैदियों और प्रवासियों को भर्ती करने से शहरों में नाराजगी कम होती है।
  • सस्ते सैनिक –  जेल के कैदियों और गरीब प्रवासियों को ट्रेनिंग देना और मोर्चे पर भेजना तकनीकी रूप से कुशल सैनिकों को खोने से बेहतर माना जा रहा है (युद्ध की ‘ग्राइंडिंग’ नीति)।
  • मानव संसाधन की निरंतरता – रूस की जनसंख्या घट रही है। विदेशी युवाओं को नागरिकता देकर रूस अपनी सेना और आबादी दोनों को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है।

क्या इस ऑफर से लोग वास्तव में खुश हैं?

यह कहना मुश्किल है कि लोग ‘खुश’ हैं, लेकिन ‘मजबूर’ जरूर हैं।

  • गरीब वर्ग –  आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों के लिए यह पैसा उनकी जिंदगी बदल सकता है।
  • विदेशी –  विकसित देश की नागरिकता के लालच में वे अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं।
  • कैदी – उनके लिए जेल की कालकोठरी से बेहतर युद्ध का मैदान है, जहां कम से कम आजादी की एक उम्मीद तो है।

रूस का यह नया भर्ती पैकेज उसकी “लंबे समय तक युद्ध लड़ने की क्षमता” (War of Attrition) को दर्शाता है। वह पैसे और नागरिकता के दम पर अपनी सेना को कमजोर नहीं होने देना चाहता। हालांकि, मानव जीवन की जो कीमत चुकाई जा रही है, वह किसी भी मुआवजे या बोनस से कहीं अधिक है।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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