बेगम खालिदा जिया के बेटे को पीएम मोदी जी की तरफ से शोक पत्र-भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी BNP की चेयरपर्सन बेगम खालिदा जिया के निधन और उनके अंतिम संस्कार से जुड़ी खबरें दक्षिण एशियाई राजनीति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
भारत-बांग्लादेश संबंधों का एक नया अध्याय
बांग्लादेश की राजनीति के एक युग का अंत तब हुआ जब देश की पहली महिला प्रधानमंत्री और BNP प्रमुख बेगम खालिदा जिया ने अंतिम सांस ली। उनके निधन पर न केवल बांग्लादेश में शोक की लहर दौड़ी बल्कि पड़ोसी देश भारत ने भी गहरा दुख व्यक्त करते हुए एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ढाका भेजा।
पूर्व पीएम खालिदा जिया की अंतिम यात्रा, समर्थकों ने पेश किया आखिरी सलाम
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर की उपस्थिति
भारत सरकार की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर विशेष विमान से ढाका पहुँचे। उनका अंतिम संस्कार में शामिल होना भारत की नेबरहुड फर्स्ट padosi Pratham नीति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- कूटनीतिक संदेश -जयशंकर की उपस्थिति यह संदेश देती है कि भारत बांग्लादेश के किसी एक राजनीतिक दल के साथ नहीं बल्कि बांग्लादेश की जनता और वहां की लोकतांत्रिक संस्थाओं के साथ खड़ा है।
- श्रद्धांजलि -जयशंकर ने ढाका के सेना गोल्फ क्लब या निर्दिष्ट स्थल पर दिवंगत नेता को पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें दक्षिण एशिया की एक कद्दावर नेता बताया।
पीएम मोदी का शोक संदेश – व्यक्तिगत और राजकीय संवेदना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेगम खालिदा जिया के पुत्र तारिक रहमान को एक औपचारिक शोक पत्र भेजा। इस पत्र की मुख्य बातें निम्नलिखित रहीं
- नेतृत्व का सम्मान-पीएम मोदी ने खालिदा जिया के उस दौर को याद किया जब उन्होंने बांग्लादेश की आर्थिक प्रगति में योगदान दिया था।
- साझा विरासत-पत्र में भारत और बांग्लादेश के बीच के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का जिक्र करते हुए दुख की इस घड़ी में साथ खड़े होने का आश्वासन दिया गया।
- लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता-मोदी जी ने उनके राजनीतिक सफर को बांग्लादेशी लोकतंत्र के संघर्ष का एक अहम हिस्सा बताया।
अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले अन्य प्रमुख व्यक्तित्व
बेगम खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में दुनिया भर के कई दिग्गज नेताओं और राजनयिकों ने शिरकत की –
- डॉ. एस जयशंकर – विदेश मंत्री भारत
- महमूद अब्बास – प्रतिनिधि फिलिस्तीन
- सार्क SAARC महासचिव – क्षेत्रीय संगठन प्रमुख
- ब्रिटिश उच्चायुक्त – यूनाइटेड किंगडम
- अमेरिकी राजदूत – संयुक्त राज्य अमेरिका
- इस्लामी सहयोग संगठन- OIC प्रतिनिधि मंडल
इसके अलावा बांग्लादेश की वर्तमान सरकार के प्रतिनिधि सेना प्रमुख और लाखों की संख्या में BNP के समर्थक अल्लाहू अकबर और खालिदा जिया अमर रहे के नारों के साथ वहां मौजूद थे।
खालिदा जिया का राजनीतिक सफर और भारत के साथ संबंध
खालिदा जिया का कार्यकाल भारत के साथ उतार-चढ़ाव भरा रहा है।
- 1991-1996 पहली बार पीएम बनीं।
- 2001-2006 दूसरी बार सत्ता संभाली।
उनके कार्यकाल के दौरान सुरक्षा और कनेक्टिविटी के मुद्दों पर भारत के साथ कई चर्चाएं हुईं। हालांकि उनके समय में कुछ कूटनीतिक चुनौतियां भी रहीं लेकिन भारत ने हमेशा उनके कद का सम्मान किया।
इस यात्रा का भू-राजनीतिक (Geopolitical) महत्व
डॉ. जयशंकर की यह यात्रा केवल शोक व्यक्त करने तक सीमित नहीं थी बल्कि इसके गहरे मायने थे-
- संतुलन बनाना -बांग्लादेश की सत्ताधारी अवामी लीग और विपक्षी BNP दोनों के साथ संवाद के रास्ते खुले रखना।
- स्थिरता – एक बड़े नेता के जाने के बाद देश में शांति और स्थिरता बनाए रखने में सहयोग देना।
चीन का प्रभाव
क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता के बीच भारत ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर यह दिखाया कि वह हर स्थिति में बांग्लादेश का सबसे करीबी मित्र है।
बेगम खालिदा जिया का निधन यदि हम भविष्य की बात करें बांग्लादेशी राजनीति में एक शून्य पैदा करेगा। भारत के विदेश मंत्री का वहां जाना और पीएम मोदी का पत्र भेजना इस बात का प्रमाण है कि भारत अपने पड़ोसियों के दुख-सुख में पूरी संवेदनशीलता के साथ सहभागी बनता है। यह कदम दोनों देशों के बीच भविष्य के विश्वास निर्माण Trust Building में मील का पत्थर साबित होगा।







