यमन में हूती-विरोधीयो ने की आपातकाल की घोषणा-यमन का संकट और हालिया घटनाक्रम एक अत्यंत जटिल भू-राजनीतिक मुद्दा है। सऊदी अरब की गोलाबारी और उसके बाद हूती-विरोधियों द्वारा आपातकाल की घोषणा है| यह यमन के गृहयुद्ध के एक नए और तनावपूर्ण अध्याय को दर्शाती है।
यमन संकट- पोर्ट सिटी पर गोलाबारी और आपातकाल
यमन जो अरब प्रायद्वीप के दक्षिणी छोर पर स्थित है पिछले एक दशक से अधिक समय से दुनिया के सबसे भीषण मानवीय संकटों में से एक का सामना कर रहा है। हाल ही में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन द्वारा यमन की रणनीतिक पोर्ट सिटी मुख्यत होदेइदा या उसके आसपास के क्षेत्रों पर की गई गोलाबारी ने स्थिति को और गंभीर कर दिया है।
इसके जवाब में हूती-विरोधी ताकतों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और उनके सहयोगियों द्वारा आपातकाल की घोषणा की गई है।
- आपातकाल की घोषणा के मुख्य कारण-हूती-विरोधी खेमे Pro-Government forces द्वारा आपातकाल लागू करने के पीछे कई रणनीतिक और सुरक्षात्मक कारण हैं-
- सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना-गोलाबारी के बाद हूती विद्रोहियों द्वारा संभावित जवाबी हमलों या घुसपैठ को रोकने के लिए सैन्य तत्परता बढ़ाना अनिवार्य था।
- आपूर्ति श्रृंखला की रक्षा-पोर्ट सिटी यमन की जीवनरेखा है। यहाँ से देश का 70% से अधिक भोजन दवा और मानवीय सहायता आती है। इस पर नियंत्रण बनाए रखना और हूतियों के प्रभाव को कम करना इस घोषणा का मुख्य उद्देश्य है।
- आंतरिक विद्रोह का डर-युद्धग्रस्त क्षेत्रों में अराजकता का लाभ उठाकर हूती समर्थक तत्व विद्रोह न कर दें इसे नियंत्रित करने के लिए नागरिक अधिकारों को सीमित कर सैन्य शासन जैसी स्थिति लागू की गई है।
- रणनीतिक लामबंदी –आपातकाल के माध्यम से स्थानीय लड़ाकों और सुरक्षा बलों को एक कमान के नीचे लाकर किसी भी बड़े सैन्य अभियान के लिए तैयार करना।
घटनाक्रम का मुख्य कारण
सऊदी अरब और हूतियों के बीच तनाव का मुख्य कारण बाबल-मंदेब जलडमरूमध्य और लाल सागर में जहाजों की सुरक्षा है।
- लाल सागर में तनाव-हूतियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर किए जा रहे हमलों के जवाब में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने पोर्ट सिटी के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
- शक्ति का संतुलन-सऊदी अरब यह सुनिश्चित करना चाहता है कि हूती विद्रोही बंदरगाहों का उपयोग हथियारों की तस्करी विशेषकर ईरान से कथित रूप से मिलने वाली मिसाइलों के लिए न कर सकें।
संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब एक बार फिर अरब सागर में आमने-सामने
आपातकाल की अवधि और नियम
यमन में घोषित किए जाने वाले आपातकाल की कोई निश्चित समय सीमा पहले से तय नहीं होती लेकिन इसके मानक प्रावधान निम्नलिखित हैं-
- अनिश्चितकालीन प्रकृति- जब तक सुरक्षा स्थिति सामान्य नहीं हो जाती इसे लागू रखा जाता है। आमतौर पर यह 30 से 90 दिनों के लिए प्रभावी होता है जिसे समीक्षा के बाद बढ़ाया जाता है।
- कर्फ्यू – पोर्ट सिटी और संवेदनशील इलाकों में रात का कर्फ्यू लागू किया गया है।
- तलाशी अभियान – रक्षा बलों को बिना वारंट के संदिग्ध स्थानों की तलाशी लेने और गिरफ्तार करने के विशेष अधिकार दिए गए हैं।
- सभाओं पर रोक – किसी भी प्रकार के सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन या सभा को प्रतिबंधित कर दिया गया है।
यमन के गृहयुद्ध का ऐतिहासिक संदर्भ
इस स्थिति को समझने के लिए यमन के युद्ध के दो मुख्य पक्षों को जानना आवश्यक है-
- हूती विद्रोही Ansar Allah – ईरान कथित ,उत्तरी यमन पर नियंत्रण और सऊदी प्रभाव का विरोध।
- हूती-विरोधी सरकार – सऊदी अरब यूएई , यमन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की बेहली
2014 में जब हूतियों ने राजधानी सना पर कब्जा किया तब से यह संघर्ष शुरू हुआ। सऊदी अरब ने 2015 में ऑपरेशन डिसाइसिव स्टॉर्म के साथ इसमें हस्तक्षेप किया।
मानवीय और आर्थिक प्रभाव
पोर्ट सिटी पर गोलाबारी और उसके बाद आपातकाल ने यमन की जनता के लिए नरक जैसी स्थिति पैदा कर दी है
- अकाल का खतरा-यमन अपनी आवश्यकता का 90% अनाज आयात करता है। बंदरगाह पर सैन्य गतिविधि का मतलब है लाखों लोगों के लिए भोजन की कमी।
- स्वास्थ्य संकट -अस्पतालों में बिजली और ईंधन की कमी है। आपातकाल के कारण एम्बुलेंस और चिकित्सा आपूर्ति की आवाजाही बाधित हुई है।
- विस्थापन-हजारों परिवार पोर्ट सिटी छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भाग रहे हैं, जिससे शरणार्थी शिविरों पर दबाव बढ़ गया है।
- वैश्विक प्रतिक्रिया-संयुक्त राष्ट्र UN ने बार-बार संघर्ष विराम Ceasefire की अपील की है। उसका कहना है कि होदेइदा जैसे बंदरगाहों को युद्ध से मुक्त रखा जाना चाहिए।
- अमेरिका और पश्चिमी देश-ये देश जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं लेकिन साथ ही मानवीय संकट पर सऊदी अरब पर दबाव भी बना रहे हैं।
- मानवाधिकार संगठन-एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसी संस्थाओं ने आपातकाल के दौरान मानवाधिकारों के उल्लंघन की चेतावनी दी है।
इस संघर्ष का भविष्य
यमन में आपातकाल की घोषणा केवल एक सुरक्षात्मक कदम नहीं है बल्कि यह इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में संघर्ष और तेज हो सकता है। शांति तभी संभव है जब दोनों पक्ष बिना किसी शर्त के बातचीत की मेज पर आएं। लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को निशाना बनाना बंद हो। मानवीय सहायता के लिए सेफ कॉरिडोर बनाया जाए।
यमन की पोर्ट सिटी पर गोलाबारी और उसके बाद लगा आपातकाल एक क्षेत्रीय शक्ति प्रदर्शन का हिस्सा है। इसका सबसे बड़ा खामियाजा वहां की निर्दोष जनता भुगत रही है।
यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया तो यह पोर्ट सिटी खंडहर में बदल सकती है जिससे पूरे देश में अकाल पड़ सकता है।







