आज भारतीय शेयर बाजार के लिए एक काला दिन साबित हुआ। हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों के अरमानों पर पानी फिर गया। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये की ऐतिहासिक गिरावट ने घरेलू निवेशकों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया।
दो दिनों के भीतर ही सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 2,000 अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई है। आज के सत्र में सेंसेक्स ने अपना महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर 75,000 तोड़ दिया, जबकि निफ्टी भी 23,500 के अहम सपोर्ट लेवल के करीब संघर्ष करता नजर आया।
बाजार का लेखा-जोखा – प्रमुख आंकड़े
मंगलवार को बाजार के बंद होने के समय स्थिति कुछ इस प्रकार रही
- सेंसेक्स – 1,500 से अधिक अंक (लगभग 2 %) की गिरावट के साथ 74,500 के आसपास चल रहा है
- NSE निफ्टी – करीब 450 अंक (1.80% से ज्यादा) गिरकर 23,350-23,500 के स्तर पर पहुँच गया
- निवेशकों का नुकसान – महज एक दिन की गिरावट में निवेशकों की करीब 6.4 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति स्वाहा हो गई।
- बाजार की चौड़ाई (Market Breadth) – बाजार में गिरावट इतनी व्यापक थी कि गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों के मुकाबले काफी अधिक रही (अनुपात लगभग 4:1)।
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बाजार गिरने के 5 प्रमुख कारण
- यूएस-ईरान तनाव (Geopolitical Tension) – अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आशंकाओं ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के प्रस्ताव को ठुकराए जाने के बाद “सीजफायर” की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं, जिससे युद्ध का खतरा बढ़ गया है।
- कच्चे तेल में उबाल ($100 के पार) – मध्य पूर्व में तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $105 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। भारत अपनी जरूरत का 80% तेल आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से मुद्रास्फीति (Inflation) बढ़ने का खतरा है।
- रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर – डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया आज अपने ऐतिहासिक निचले स्तर 95.63 पर पहुंच गया। कमजोर रुपये का सीधा असर देश के व्यापार घाटे और विदेशी निवेश (FII) पर पड़ता है।
- विदेशी फंडों की निकासी (FII Outflow) – विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। सोमवार को ही FII ने 8,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे थे, और आज भी यह सिलसिला जारी रहा।
- आईटी और बैंकिंग पर दबाव – वैश्विक अनिश्चितता के कारण भारत के दिग्गज आईटी शेयरों में भारी बिकवाली हुई, जिससे निफ्टी आईटी इंडेक्स 3% से ज्यादा टूट गया।
किस सेक्टर में दिखी सबसे ज्यादा बिकवाली?
आज बाजार की गिरावट में सबसे बड़ा योगदान IT (Information Technology) और बैंकिंग सेक्टर का रहा।
- IT सेक्टर (Top Loser) – निफ्टी आईटी इंडेक्स में 3.6% की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। टेक महिंद्रा, इंफोसिस, टीसीएस और एचसीएल टेक जैसे दिग्गज शेयर 3% से 4% तक टूट गए। अमेरिका में आर्थिक मंदी की आहट ने इस सेक्टर को सबसे ज्यादा चोट पहुंचाई।
- बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं – एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे हैवीवेट शेयरों में गिरावट ने निफ्टी को नीचे खींचने में मुख्य भूमिका निभाई।
- मिडकैप और स्मॉलकैप – व्यापक बाजार में भी हाहाकार रहा। निफ्टी मिडकैप 100 में 2% और स्मॉलकैप 100 में 2.5% की गिरावट रही, जिससे छोटे निवेशकों को भारी नुकसान हुआ।
आज के प्रमुख गिरावट वाले शेयर (Top Losers)
| शेयर का नाम | गिरावट (%) |
| टेक महिंद्रा | -4.09% |
| HCL टेक | -4.03% |
| TCS | -3.89% |
| अडानी पोर्ट्स | -3.84% |
| इंफोसिस | -3.18% |
क्या कुछ सकारात्मक रहा ?
इतनी भारी गिरावट के बीच भी कुछ सरकारी तेल कंपनियों (Upstream Oil Companies) में रौनक रही। सरकार द्वारा घरेलू कच्चे तेल के उत्पादन पर रॉयल्टी दरों में कटौती के फैसले से ONGC और Oil India के शेयरों में 6% से 7% तक की तेजी देखी गई।
वैश्विक संकेत और भविष्य की राह
एशियाई बाजारों से लेकर यूरोपीय बाजारों तक आज लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मध्य पूर्व (West Asia) में शांति बहाल नहीं होती और कच्चे तेल की कीमतें $100 के नीचे नहीं आतीं, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।
निवेशकों के लिए सलाह – बाजार में इस समय “Panic Selling” (डर में आकर बेचना) से बचना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों को अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों में धीरे-धीरे खरीदारी के अवसर तलाशने चाहिए, लेकिन अभी सावधानी बरतना ही सबसे बेहतर रणनीति है।
डिस्क्लेमर – यह जानकारी केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।







