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मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के चलते दुनियाभर के टूर एंड ट्रैवल सेक्टर को रोजाना करोड़ रुपए का नुकसान 

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के चलते दुनियाभर के टूर एंड ट्रैवल सेक्टर को रोजाना करोड़ रुपए का नुकसान 
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 14, 2026 11:45 अपराह्न
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ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव और अमेरिका की सक्रियता ने वैश्विक टूर एंड ट्रैवल सेक्टर में एक बड़ी हलचल पैदा कर दी है। मध्य-पूर्व (Middle East) में युद्ध की आहट ने न केवल अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को प्रभावित किया है बल्कि पर्यटकों की पसंद और ट्रैवल पैटर्न्स को भी पूरी तरह बदल दिया है।

​मध्य-पूर्व संकट –  वैश्विक पर्यटन पर मंडराते बादल

वर्ल्ड ट्रैवल एंड टूरिज्म काउंसिल (WTTC) के नवीनतम अनुमानों के अनुसार ईरान और इजराइल/अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण मिडिल ईस्ट के ट्रैवल और टूरिज्म सेक्टर को प्रतिदिन कम से कम 600 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है।

​भारतीय मुद्रा (INR) में यह राशि लगभग 5,000 करोड़ रुपये प्रतिदिन होती है।

मुख्य आंकड़े और प्रभाव

  • ​दैनिक नुकसान – $600 मिलियन (करीब ₹5,000 करोड़) अंतरराष्ट्रीय पर्यटक खर्च में कमी के कारण।
  • ​फ्लाइट्स पर असर –  28 फरवरी से 12 मार्च के बीच मिडिल ईस्ट की लगभग 49,000 उड़ानें रद्द की जा चुकी हैं।
  • ​प्रमुख हब –  दुबई, अबू धाबी, दोहा और बहरीन जैसे बड़े एयरपोर्ट्स जो रोजाना करीब 5.26 लाख यात्रियों को हैंडल करते हैं वहां परिचालन बाधित होने से वैश्विक कनेक्टिविटी पर गहरा असर पड़ा है।
  • ​अनुमानित वार्षिक लक्ष्य –  संघर्ष से पहले 2026 के लिए इस क्षेत्र में $207 बिलियन के खर्च का अनुमान लगाया गया था जो अब संकट में है।

बुकिंग में भारी गिरावट (मिडिल-ईस्ट)

​इजराइल, ईरान और पड़ोसी देशों में तनाव के कारण मिडिल-ईस्ट जाने वाली बुकिंग में 60% तक की भारी कमी दर्ज की गई है। पर्यटक सुरक्षा कारणों से जॉर्डन, लेबनान और यहां तक कि मिस्र जैसे लोकप्रिय गंतव्यों की यात्रा करने से भी कतरा रहे हैं।

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​घरेलू पर्यटन में उछाल (Domestic Surge)

​सुरक्षा चिंताओं के कारण यात्रियों ने अब विदेश जाने के बजाय अपने ही देश के भीतर यात्रा करना सुरक्षित समझा है। पिछले कुछ दिनों में घरेलू पर्यटन के लिए पूछताछ में 200% की जबरदस्त वृद्धि हुई है। लोग अब लंबी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के बजाय पास के हिल स्टेशनों या तटीय क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

​पर्यटकों की नई पसंद –  ‘ईस्ट’ बना हॉटस्पॉट

​मिडिल-ईस्ट में संकट के बीच दक्षिण-पूर्व एशिया और सुदूर पूर्व के देशों के लिए आकर्षण बढ़ गया है। जिन देशों में बुकिंग में बढ़त देखी जा रही है वे निम्नलिखित हैं

कश्मीर (Kashmir) – ‘धरती का स्वर्ग’

​अंतरराष्ट्रीय यात्राओं में कमी आने के बाद कश्मीर पर्यटकों की पहली पसंद बना हुआ है। मार्च और अप्रैल के दौरान यहाँ का मौसम बेहद सुहावना होता है।

  • प्रमुख आकर्षण –  श्रीनगर में शालिमार बाग, डाल झील में शिकारा की सवारी और गुलमर्ग में गोंडोला राइड।
  • विशेष –  अप्रैल में होने वाला ट्यूलिप फेस्टिवल इस समय पर्यटकों को सबसे ज्यादा आकर्षित कर रहा है।

लक्षद्वीप (Lakshadweep) – मालदीव का विकल्प

​मिडल ईस्ट के तनाव और हालिया भू-राजनीतिक बदलावों के कारण जो लोग दुबई या मालदीव जैसे बीच डेस्टिनेशन पसंद करते थे वे अब लक्षद्वीप जा रहे हैं।

  • प्रमुख आकर्षण –  अगत्ती, कवरत्ती और मिनिकॉय द्वीप।
  • विशेष – यहाँ का नीला पारदर्शी पानी और वॉटर स्पोर्ट्स (स्कूबा डाइविंग, स्नॉर्कलिंग) इसे एक प्रीमियम डोमेस्टिक डेस्टिनेशन बना रहे हैं।

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 लेह-लद्दाख (Leh-Ladakh)  – एडवेंचर की चाह रखने वालों के लिए

​गर्मियां शुरू होते ही लद्दाख के रास्ते खुल रहे हैं और एडवेंचर लवर्स के लिए यह सबसे सुरक्षित और रोमांचक विकल्प बनकर उभरा है।

  • प्रमुख आकर्षण – पैंगोंग झील, नुब्रा घाटी और खारदुंग ला पास
  • विशेष –  यह जगह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो भीड़-भाड़ से दूर ‘ऑफ-बीट’ अनुभव चाहते हैं।

उत्तर-पूर्वी भारत (North-East India) –  नया उभरता हब

​सिक्किम और मेघालय जैसे राज्यों में इस साल रिकॉर्ड पर्यटक पहुँच रहे हैं। असम का जोरहाट और माजुली द्वीप (दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप) वर्तमान में सर्च ट्रेंड्स में सबसे ऊपर हैं।

  • प्रमुख आकर्षण –  मेघालय में लिविंग रूट ब्रिज, सिक्किम में त्सोंगमो झील और असम के चाय के बागान।
  • विशेष –  यहाँ का सांस्कृतिक अनुभव और प्रदूषण मुक्त वातावरण यात्रियों को काफी पसंद आ रहा है।

आध्यात्मिक पर्यटन (Spiritual Tourism) – वाराणसी और सोमनाथ

​सिर्फ छुट्टियां ही नहीं लोग अब शांति और आध्यात्मिकता की तलाश में भी निकल रहे हैं।

  • वाराणसी –  गंगा आरती और नए बने कॉरिडोर ने यहाँ पर्यटकों की संख्या कई गुना बढ़ा दी है।
  • गुजरात (सोमनाथ और द्वारका) – बेहतर कनेक्टिविटी और रोड-ट्रिप की सुविधाओं के कारण यहाँ भी काफी उछाल है।

पर्यटन बढ़ने के मुख्य कारण

गंतव्य (Destination)वृद्धि का कारण
थाईलैंड और मलेशियाबजट के अनुकूल और वीज़ा नियमों में ढील।
मालदीवलग्जरी और सुरक्षित वातावरण चाहने वाले पर्यटकों की पहली पसंद।
जापानअपनी संस्कृति और सुरक्षित माहौल के कारण उच्च वर्ग के पर्यटकों का पसंदीदा।

पर्यटन बढ़ने के मुख्य कारण व प्रभाव

कारणप्रभाव
हवाई मार्ग में बदलावमिडल ईस्ट के ऊपर से उड़ानें प्रतिबंधित होने से अंतरराष्ट्रीय टिकट महंगे हो गए हैं।
सुरक्षा चिंतातनावपूर्ण क्षेत्रों के करीब जाने के बजाय लोग देश के भीतर सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
कनेक्टिविटीउड़ान’ (UDAN) योजना के तहत छोटे शहरों के लिए सीधी फ्लाइट्स ने यात्रा आसान कर दी है।

आर्थिक प्रभाव और चुनौतियां

  • ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी –  युद्ध की स्थिति से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं जिससे हवाई किराए (Airfares) महंगे हो गए हैं।
  • हवाई मार्गों में बदलाव –  ईरान का हवाई क्षेत्र (Airspace) बंद या असुरक्षित होने के कारण एयरलाइंस को लंबे रास्तों का उपयोग करना पड़ रहा है जिससे परिचालन लागत बढ़ गई है।
  • रोजाना करोड़ों का नुकसान –  WTTC के अनुसार रद्द की गई उड़ानों और होटल बुकिंग के कारण वैश्विक स्तर पर पर्यटन उद्योग को प्रतिदिन भारी राजस्व की हानि हो रही है।

भू-राजनीतिक अस्थिरता ने पर्यटन क्षेत्र को एक अनिश्चित मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। जहां एक ओर मिडिल-ईस्ट का संकट पर्यटन को आर्थिक चोट पहुंचा रहा है वहीं दूसरी ओर घरेलू बाजार और एशियाई देशों के लिए यह एक अवसर बनकर उभरा है। आने वाले महीनों में पर्यटन की रिकवरी पूरी तरह से युद्ध की स्थिति और शांति बहाली पर निर्भर करेगी।

मुख्य बिंदु –  सुरक्षा अब पर्यटकों की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है जिसके कारण ‘रिस्क-फ्री’ डेस्टिनेशन्स की मांग में रिकॉर्ड इजाफा हो रहा है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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