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US-Israel Vs Iran –  जंग ने बढ़ाई कच्चे तेल की कीमत स्टॉक मार्केट पर भी पड़ा असर 

जंग ने बढ़ाई कच्चे तेल की कीमत स्टॉक मार्केट पर भी पड़ा असर
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 2, 2026 3:32 अपराह्न
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यह एक अत्यंत गंभीर और वैश्विक आर्थिक हलचल का विषय है। मार्च 2026 की शुरुआत में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चूलें हिला दी हैं। 

वैश्विक महायुद्ध की आहट –  अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान संघर्ष और आर्थिक सुनामी

दुनिया एक बार फिर एक बड़े युद्ध के मुहाने पर खड़ी है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हालिया हमलों और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने न केवल भू-राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं, बल्कि वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी हड़कंप मचा दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में अचानक 10-13% का उछाल, शेयर बाजारों का धराशायी होना और सोने का ऐतिहासिक ऊंचाइयों पर पहुंचना ये सभी संकेत एक गहरे आर्थिक संकट की ओर इशारा कर रहे हैं।

कच्चे तेल (Crude Oil) में उबाल –  क्यों बढ़ीं कीमतें?

ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी इस जंग का सबसे पहला और सीधा असर कच्चे तेल पर पड़ा है। सोमवार, 2 मार्च 2026 को बाजार खुलते ही ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतों में 10% से अधिक की तेजी देखी गई।

  • हॉर्मुज जल डमरू मध्य (Strait of Hormuz) का संकट –  दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। ईरान ने इस मार्ग को बंद करने की चेतावनी दी है, जिससे आपूर्ति पूरी तरह ठप होने का डर है।
  • सप्लाई चेन में रुकावट –  खाड़ी देशों सऊदी अरब, कुवैत, यूएई से आने वाला तेल भी इसी रास्ते पर निर्भर है। यदि यह मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है तो तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं।
  • भारत पर असर – भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक तेल आयात करता है। तेल महंगा होने का मतलब है महंगा पेट्रोल-डीजल और बढ़ती माल ढुलाई लागत जिससे अंततः आम आदमी की थाली पर असर पड़ेगा।

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शेयर बाजार में हाहाकार – निवेशकों के डूबे खरबों रुपये

युद्ध की खबरों ने निवेशकों के बीच पैनिक सेलिंग डर में बिकवाली पैदा कर दी है। भारतीय शेयर बाजार (Sensex और Nifty) में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

  • सेंसेक्स और निफ्टी की गिरावट – सोमवार की सुबह भारतीय बाजार 2% से 3.5% तक गिरकर खुले। अकेले एक दिन में निवेशकों की संपत्ति में भारी सेंध लगी है।
  • प्रभावित सेक्टर्स –  पेंट, टायर, एविएशन और लॉजिस्टिक कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट रही क्योंकि ये सीधे तौर पर कच्चे तेल की कीमतों से जुड़े हैं।
  • विदेशी निवेशकों (FIIs) की निकासी –  अनिश्चितता के माहौल में विदेशी निवेशक उभरते बाजारों जैसे भारत से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश की ओर भाग रहे हैं।

सोना (Gold) बना संकट का साथी –  ₹1,67,000 का ऐतिहासिक स्तर

जब भी दुनिया में युद्ध या अस्थिरता आती है सोना निवेशकों के लिए सबसे सुरक्षित ठिकाना (Safe Haven) बन जाता है।

  • कीमतों में भारी उछाल –  सोने की कीमतों में ₹5,000 प्रति 10 ग्राम की एकमुश्त वृद्धि देखी गई है, जिससे यह ₹1,67,000 के स्तर पर पहुंच गया है।
  • डॉलर की मजबूती बनाम सोना –  युद्ध के कारण अमेरिकी डॉलर भी मजबूत हो रहा है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता के चलते सोने की मांग आपूर्ति से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।
  • भविष्य का अनुमान – विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव कम नहीं हुआ तो 2026 के अंत तक सोना ₹2,00,000 के स्तर को भी छू सकता है।

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अमेरिका और इजरायल की रणनीति – ईरान पर हमले का कारण

इस संघर्ष की जड़ें ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई में हैं।

  • ऑपरेशन मिडनाइट हैमर (Operation Midnight Hammer) – अमेरिका और इज़राइल ने संयुक्त रूप से ईरान के सैन्य ठिकानों और रणनीतिक संपत्तियों को निशाना बनाया है।
  • ईरान का पलटवार –  ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायल पर मिसाइल दागने की बात कही है। इससे पूरा पश्चिम एशिया एक बारूद के ढेर पर बैठ गया है।

भारत के लिए चुनौतियां और अवसर

भारत के लिए यह स्थिति दोधारी तलवार की तरह है

  • आर्थिक मंदी का खतरा –  बढ़ता आयात बिल और गिरता रुपया अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी कर सकता है।
  • रणनीतिक संतुलन –  भारत को अपने पुराने मित्र रूस, व्यापारिक साझेदार ईरान और रणनीतिक सहयोगी अमेरिका के बीच संतुलन बनाना होगा।
  • महंगाई (Inflation) – तेल की कीमतों में 10% की वृद्धि भारत में खुदरा मुद्रास्फीति को 0.5% से 1% तक बढ़ा सकती है।

अमेरिका-इजरायल Vs ईरान का यह युद्ध महज एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं है बल्कि यह एक वैश्विक आर्थिक भूकंप है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, शेयर बाजार की गिरावट और सोने की रिकॉर्ड चमक इस बात का प्रमाण हैं कि दुनिया एक बेहद अनिश्चित दौर में प्रवेश कर चुकी है। आने वाले कुछ सप्ताह वैश्विक बाजारों की दिशा तय करेंगे।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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