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अमेरिका-कनाडा रक्षा संकट F-35 सौदा और भविष्य की चुनौतियाँ

अमेरिका-कनाडा रक्षा संकट F-35 सौदा और भविष्य की चुनौतियाँ
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 28, 2026 4:01 अपराह्न
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हाल के महीनों में अमेरिका और कनाडा के ऐतिहासिक संबंधों में एक अप्रत्याशित खटास आई है। जहाँ पहले विवाद व्यापार और खालिस्तानी चरमपंथ जैसे मुद्दों तक सीमित थे, अब यह तनाव दुनिया के सबसे बड़े रक्षा कार्यक्रम F-35 लाइटनिंग II स्टील्थ फाइटर जेट तक पहुँच गया है।

संकट की पृष्ठभूमि – क्या है विवाद की जड़?

अमेरिका और कनाडा के बीच तनाव की शुरुआत केवल एक घटना से नहीं हुई, बल्कि यह कई कूटनीतिक विफलताओं का परिणाम है

  • सिख अलगाववाद का मुद्दा – भारत के साथ कनाडा के विवाद में अमेरिका ने ‘फाइव आइज’ (Five Eyes) गठबंधन के तहत खुफिया जानकारी साझा की, लेकिन कनाडा की सुस्त प्रतिक्रिया और आंतरिक राजनीति ने वाशिंगटन में भी बेचैनी पैदा की है।
  • रक्षा बजट में कटौती –  अमेरिका लंबे समय से कनाडा पर दबाव बना रहा है कि वह अपनी जीडीपी का 2% रक्षा पर खर्च करे (NATO मानक)। कनाडा वर्तमान में लगभग 1.3% ही खर्च कर रहा है।
  • आर्कटिक संप्रभुता – रूस और चीन की आर्कटिक में बढ़ती सक्रियता के बीच, अमेरिका चाहता है कि कनाडा अपनी उत्तरी सीमाओं की रक्षा के लिए अधिक निवेश करे।

F-35 लड़ाकू विमान का सौदा –  एक नाजुक मोड़

कनाडा ने अपनी वायु सेना (RCAF) के पुराने हो रहे CF-18 बेड़े को बदलने के लिए 88 F-35A जेट खरीदने का निर्णय लिया था। यह सौदा लगभग 19 बिलियन कनाडाई डॉलर का है।

यदि कनाडा पीछे हटता है तो क्या होगा?

अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) और लॉकहीड मार्टिन (Lockheed Martin) के लिए कनाडा एक प्रमुख साझेदार है। यदि कनाडा इस सौदे से पीछे हटता है, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे

  • उत्पादन लागत में वृद्धि –  F-35 एक वैश्विक सहकारी कार्यक्रम है। एक देश के हटने से प्रति विमान लागत (Unit Cost) बढ़ जाएगी, जो अमेरिका और अन्य सहयोगियों (जैसे ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया) को चुभेगी।
  • तकनीकी प्रतिबंध –  अमेरिका कनाडा को दी जाने वाली संवेदनशील सैन्य तकनीक पर रोक लगा सकता है।
  • NORAD का भविष्य –  ‘नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड’ (NORAD) अमेरिका और कनाडा का संयुक्त रक्षा कवच है। बिना आधुनिक जेट्स के, कनाडा इस गठबंधन में एक “कमजोर कड़ी” बन जाएगा।

 संभावित अमेरिकी कार्रवाई –  वाशिंगटन के पास क्या विकल्प हैं?

यदि रक्षा संबंधों में गिरावट जारी रहती है, तो अमेरिका निम्नलिखित कड़े कदम उठा सकता है

1 –  आर्थिक प्रतिबंध और व्यापारिक बाधाएं

अमेरिका और कनाडा का व्यापारिक रिश्ता दुनिया में सबसे बड़ा है। अमेरिका ‘USMCA’ समझौते के तहत कुछ रियायतों को वापस ले सकता है, जिससे कनाडा के ऑटोमोबाइल और ऊर्जा क्षेत्र को भारी नुकसान होगा।

2 – रक्षा उद्योग से बाहर करना

कनाडा की कई कंपनियां F-35 के पुर्जे बनाती हैं। अमेरिका इन अनुबंधों को रद्द करके कनाडाई एयरोस्पेस उद्योग को अरबों डॉलर का झटका दे सकता है।

3 –  खुफिया जानकारी साझा करने में कमी

यदि अमेरिका को लगता है कि कनाडा की सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लग सकती है, तो वह ‘फाइव आइज’ के तहत साझा की जाने वाली उच्च-स्तरीय खुफिया जानकारी को सीमित कर सकता है।

 भू-राजनीतिक प्रभाव: रूस और चीन की नजर

अमेरिका-कनाडा के बीच दरार का सीधा फायदा उनके विरोधियों को होगा|

  • आर्कटिक पर नियंत्रण –  कनाडा और अमेरिका के बीच तालमेल की कमी का फायदा उठाकर रूस उत्तरी ध्रुव में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा सकता है।
  • NATO में फूट – यह विवाद नाटो (NATO) की एकता पर सवाल खड़े करेगा, जिससे यूरोपीय देशों में भी असुरक्षा की भावना बढ़ेगी।

 विस्तृत तुलना – पुराने CF-18 बनाम नए F-35

विशेषता  CF-18 (पुराना)F-35 (नया) 
पीढ़ी चौथी पीढ़ी (4th Gen)पांचवीं पीढ़ी (5th Gen – Stealth)
तकनीक रडार पर आसानी से दिखता हैरडार से बचने में सक्षम 
नेटवर्किंगसीमित संचार युद्धक्षेत्र का डेटा साझा करने में अग्रणी
आयु40 साल पुरानीभविष्य के लिए तैयार 

‘भरोसे’ की परीक्षा

अमेरिका और कनाडा के बीच का यह तनाव केवल एक विमान सौदे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बदलती वैश्विक व्यवस्था में ‘भरोसे’ की परीक्षा है। कनाडा के लिए F-35 से पीछे हटना एक “आत्मघाती” कदम साबित हो सकता है, क्योंकि वह अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह से अमेरिकी छतरी पर निर्भर है।

वहीं, अमेरिका के लिए कनाडा को खोना उसके अपने “पिछवाड़े” (Backyard) में अस्थिरता पैदा करने जैसा होगा। आने वाले समय में कूटनीतिक वार्ताओं के जरिए ही इस संकट का समाधान निकाला जा सकता है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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