विजयपत सिंघानिया का जीवन किसी फिल्म की पटकथा से कम नहीं रहा है शानदार ऊंचाइयां, रिकॉर्ड तोड़ साहसिक कारनामे और फिर एक बेहद दर्दनाक पारिवारिक मोड़। उनके निधन की खबर उद्योग जगत के लिए एक युग का अंत है।
विजयपत सिंघानिया – अर्श से फर्श तक का सफर (1938-2026)
विजयपत सिंघानिया केवल एक व्यवसायी नहीं थे; वह एक उत्साही पायलट, एक लेखक और रेमंड (Raymond) को “The Complete Man” बनाने वाले शिल्पकार थे।
जन्म और प्रारंभिक जीवन
विजयपत सिंघानिया का जन्म 19 दिसंबर, 1938 को कानपुर के प्रतिष्ठित सिंघानिया परिवार में हुआ था। उनके पिता लाला कैलाशपत सिंघानिया ने जेके ग्रुप की नींव मजबूत की थी। विजयपत ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भारत में पूरी की और बाद में उच्च शिक्षा के लिए विदेश गए। बचपन से ही उन्हें जोखिम लेने और कुछ नया करने का जुनून था।
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रेमंड का नेतृत्व और ‘The Complete Man’ की रचना
जब विजयपत ने रेमंड की कमान संभाली तब यह एक छोटी कपड़ा मिल थी। उन्होंने अपनी दूरदर्शिता से इसे एक वैश्विक ब्रांड में बदल दिया।
- ब्रैंडिंग – उन्होंने ‘The Complete Man’ विज्ञापन अभियान शुरू किया, जिसने भारतीय पुरुषों के फैशन के प्रति नजरिए को बदल दिया।
- विस्तार – उनके नेतृत्व में रेमंड ने ऊनी कपड़ों से आगे निकलकर सूटिंग्स और शर्टिंग्स के क्षेत्र में एकाधिकार स्थापित किया।
- सम्मान – उनकी व्यावसायिक उपलब्धियों के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया था।
साहसिक कारनामे – आसमान के सौदागर
विजयपत सिंघानिया को केवल सूट और टाई तक सीमित नहीं रखा जा सकता था। वह एक अनुभवी पायलट थे।
- विश्व रिकॉर्ड – 1988 में उन्होंने ब्रिटेन से भारत तक अकेले माइक्रो-लाइट विमान उड़ाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था।
- हॉट एयर बैलून – 67 वर्ष की आयु में उन्होंने हॉट एयर बैलून में 69,852 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरकर एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। यह उनके अदम्य साहस का प्रमाण था।
पारिवारिक विवाद और संघर्ष की शुरुआत
विजयपत सिंघानिया के जीवन का सबसे दुखद हिस्सा उनके बेटे गौतम सिंघानिया के साथ शुरू हुआ कानूनी विवाद था।
- संपत्ति का हस्तांतरण – 2015 में उन्होंने प्रेमवश अपने बेटे गौतम को रेमंड के सारे शेयर (लगभग 1000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति) उपहार में दे दिए।
- बेदखली – इसके तुरंत बाद पिता और पुत्र के बीच रिश्ते खराब हो गए। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उन्हें दक्षिण मुंबई के जेके हाउस (JK House) से बेदखल कर दिया गया।
- कानूनी लड़ाई – अपने अंतिम वर्षों में उन्हें एक किराए के घर में रहना पड़ा और अपने ही बेटे के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था “अपने बच्चों को सब कुछ मत दो।”
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मृत्यु और अंतिम समय की जानकारी
87 वर्ष की आयु में विजयपत सिंघानिया ने अंतिम सांस ली। उनके अंतिम दिन शारीरिक और मानसिक रूप से काफी संघर्षपूर्ण रहे।
मृत्यु का कारण और स्थान
- स्थान – उनका निधन मुंबई स्थित उनके आवास पर हुआ।
- बीमारी – वह लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों (Age-related ailments) से जूझ रहे थे। उन्हें हृदय संबंधी समस्याएं और गंभीर श्वसन संबंधी (Respiratory) दिक्कतें थीं।
- मृत्यु कैसे हुई – चिकित्सा रिपोर्टों के अनुसार उनकी मृत्यु मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर (Multiple Organ Failure) के कारण हुई। पिछले कुछ हफ्तों से उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी।
अंतिम संस्कार की जानकारी
- समय – उनका अंतिम संस्कार आज शाम या कल सुबह (स्थानीय समयानुसार) किया जाएगा।
- स्थान – मुंबई के वरली श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार होने की संभावना है।
- शोक – उद्योग जगत के बड़े नाम और पारिवारिक सदस्य उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंच रहे हैं।
युवाओं के लिए मार्गदर्शन – विजयपत सिंघानिया के जीवन से सीख
विजयपत सिंघानिया का जीवन सफलताओं और विफलताओ का एक अनूठा मिश्रण है जिससे आज की पीढ़ी बहुत कुछ सीख सकती है
- जुनून की कोई उम्र नहीं होती – 67 साल की उम्र में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना यह सिखाता है कि रिटायरमेंट केवल दिमाग में होता है, हौसलों में नहीं।
- भावुक निर्णय बनाम व्यावहारिक निर्णय – उनका जीवन यह सबसे बड़ा सबक देता है कि संपत्ति और उत्तराधिकार के मामले में भावनाओं के बजाय कानूनी सुरक्षा और व्यावहारिक सोच को प्राथमिकता देनी चाहिए।
- ब्रांड निर्माण की कला – उन्होंने सिखाया कि उत्पाद नहीं, बल्कि एक ‘इमोशन’ बेचा जाता है (जैसे ‘The Complete Man’)।
- विपरीत परिस्थितियों में धैर्य ‘ इतने अमीर होने के बाद किराए के घर में रहने और कानूनी लड़ाई लड़ने के बावजूद, उन्होंने अपनी गरिमा कभी नहीं खोई।
विजयपत सिंघानिया का जाना भारतीय कॉर्पोरेट जगत के एक गौरवशाली अध्याय का अंत है। उन्हें उनके साहस, रेमंड के गौरव और उनके जीवन की उन कड़वी सच्चाइयों के लिए हमेशा याद किया जाएगा जो पारिवारिक रिश्तों के लिए एक चेतावनी की तरह हैं।







