भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार 28 मार्च 2026 को भारत का मौसम काफी विविधतापूर्ण रहने वाला है। उत्तर भारत में जहाँ पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) का प्रभाव रहेगा वहीं पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।
उत्तर-पश्चिम भारत – पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानों में बादल
उत्तर-पश्चिम भारत में एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम का मिजाज बदला रहेगा।
- जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश – इन राज्यों में 28 मार्च को ‘छिटपुट से काफी व्यापक’ (Scattered to Fairly Widespread) हल्की से मध्यम बारिश और ऊंचे इलाकों में बर्फबारी होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर बिजली गिरने और 30-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है।
- उत्तराखंड – यहाँ भी हल्की बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फ की फुहारें देखने को मिल सकती हैं।
- पंजाब और राजस्थान- पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से पंजाब और राजस्थान के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों में धूल भरी आंधी चलने की भी संभावना है।
- दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा – दिल्ली में 28 मार्च को मुख्य रूप से आंशिक रूप से बादल (Partly Cloudy Sky) छाए रहेंगे। हालांकि बारिश की संभावना कम है लेकिन ठंडी हवाओं के कारण तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की जा सकती है। अधिकतम तापमान 31°C से 33°C के बीच रहने का अनुमान है।
पूर्व और पूर्वोत्तर भारत – भारी बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट
इस क्षेत्र में मौसम सबसे अधिक सक्रिय रहेगा। बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाओं के कारण यहाँ ‘ओरेंज अलर्ट’ जैसी स्थिति बनी हुई है।
- अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय – इन राज्यों में 28 मार्च को भारी बारिश (Isolated Heavy Rainfall) की चेतावनी दी गई है। इसके साथ ही गरज-चमक और बिजली गिरने की भी प्रबल संभावना है।
- पश्चिम बंगाल और सिक्किम – उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में ओलावृष्टि (Hailstorm) और भारी बारिश का अनुमान है। गंगीय पश्चिम बंगाल में भी गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।
- बिहार और झारखंड – यहाँ भी छिटपुट स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है।
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मध्य और दक्षिण भारत – गर्मी और उमस
- मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ – मध्य प्रदेश के ग्वालियर और चंबल संभागों में हल्की बारिश की संभावना है जबकि शेष राज्य में मौसम शुष्क और गर्म रहेगा।
- महाराष्ट्र और गुजरात – यहाँ गर्मी का प्रभाव बना रहेगा। मुंबई और अहमदाबाद जैसे शहरों में तापमान 35°C से 39°C के बीच रह सकता है। लू (Heatwave) जैसी स्थिति फिलहाल नहीं है लेकिन उमस अधिक रहेगी।
- दक्षिण भारत – केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के आंतरिक हिस्सों में गर्म और उमस भरा मौसम बना रहेगा। केरल और तटीय कर्नाटक में कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी हो सकती है।
मुख्य हाइलाइट्स (28 मार्च 2026)
| क्षेत्र | मौसम की स्थिति | मुख्य चेतावनी |
| उत्तर हिमालय | बारिश और बर्फबारी | बिजली और तेज हवाएं (30-50 kmph) |
| पूर्वोत्तर भारत | भारी वर्षा | असम और मेघालय में भारी बारिश का अलर्ट |
| पूर्वी भारत | बारिश और ओले | बिहार, झारखंड और बंगाल में ओलावृष्टि संभव |
| दक्षिण भारत | गर्म और उमस भरा | केरल में उमस और तटीय इलाकों में गर्मी |
किसानों के लिए सलाह
मौसम विभाग ने अचानक होने वाली बारिश और ओलावृष्टि को देखते हुए किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
क्या करें (Do’s)
- फसल की सुरक्षा – यदि गेहूं या सरसों की फसल पक कर तैयार है और कटाई हो चुकी है तो उसे सुरक्षित स्थानों पर या तिरपाल से ढक कर रखें।
- निकासी की व्यवस्था – सब्जियों और बागवानी फसलों के खेतों में जल निकासी (Drainage) के उचित प्रबंध करें ताकि जलभराव न हो।
- मंडी अपडेट – फसल को मंडी ले जाने से पहले मौसम के पूर्वानुमान की जांच जरूर करें और अनाज को ढकने के लिए पर्याप्त साधन साथ रखें।
- कीटनाशक का प्रयोग – यदि छिड़काव आवश्यक हो, तो केवल साफ मौसम में ही करें। बारिश के तुरंत बाद या पहले छिड़काव न करें।
क्या न करें (Don’ts)
- सिंचाई रोकें – आने वाले 24-48 घंटों में बारिश की संभावना को देखते हुए खेतों में सिंचाई (Irrigation) और उर्वरक (Fertilizer) डालने का काम अभी टाल दें।
- खुले में भंडारण – कटी हुई फसल या चारे को खुले आसमान के नीचे बिल्कुल न छोड़ें, क्योंकि ओलावृष्टि से भारी नुकसान हो सकता है।
- बिजली से बचाव – गरज-चमक के दौरान किसान भाई खेतों में काम न करें और बिजली के खंभों या पेड़ों के नीचे शरण न लें।
- कटाई में जल्दबाजी – यदि फसल पूरी तरह नहीं पकी है तो बारिश के डर से बहुत जल्दी कटाई न करें इससे दाने की गुणवत्ता खराब हो सकती है।
नोट – यह जानकारी मौसम विभाग के तात्कालिक बुलेटिन पर आधारित है। स्थानीय मौसम में बदलाव संभव है इसलिए अपने क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र या स्थानीय मौसम केंद्र के संपर्क में रहें।







