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आखिर क्या है भारत-अमेरिका के बीच LEMOA संधि ? ईरानी युद्धपोत पर हमले के बाद क्यों है इसकी चर्चा

आखिर क्या है भारत-अमेरिका के बीच LEMOA संधि ? ईरानी युद्धपोत पर हमले के बाद क्यों है इसकी चर्चा
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 6, 2026 2:02 अपराह्न
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डेलीबार्ता हाल ही में हिंद महासागर में एक घटना के बाद भारत और अमेरिका के बीच हुई LEMOA (Logistics Exchange Memorandum of Agreement) संधि फिर से चर्चा में आ गई है। श्रीलंका के दक्षिणी समुद्री तट के पास अमेरिका द्वारा एक ईरानी युद्धपोत पर किए गए हमले के बाद इस समझौते को लेकर कई तरह की बातें सामने आने लगीं। हालांकि भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि यह समझौता भारत को किसी भी युद्ध या सैन्य संघर्ष में शामिल होने के लिए बाध्य नहीं करता।

यह घटना और इसके बाद उठे सवाल यह समझने के लिए महत्वपूर्ण बनाते हैं कि आखिर LEMOA संधि क्या है, इसका उद्देश्य क्या है और भारत के लिए इसका क्या महत्व है।

जानिये आखिर क्या पूरा मामला

हाल ही में हिंद महासागर में श्रीलंका के दक्षिणी समुद्री तट से दूर एक क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की परमाणु पनडुब्बी ने टॉरपीडो हमला कर ईरान के युद्धपोत आईआरआईएस देना (IRIS Dena) को डुबो दिया। बताया जा रहा है कि इस जहाज पर लगभग 130 ईरानी नाविक सवार थे। हमले में 87 नाविकों की मौत हो गई, जबकि 32 को श्रीलंकाई नौसेना ने बचा लिया।

घटना के बाद अमेरिकी सेना के एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने दावा किया कि अमेरिका ने इस ऑपरेशन के लिए भारतीय नौसैनिक अड्डे का उपयोग किया। इसके बाद भारत और अमेरिका के बीच हुई LEMOA संधि चर्चा में आ गई।

हालांकि भारत सरकार की ओर से इस दावे को पूरी तरह गलत बताया गया और कहा गया कि यह हमला भारत के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) के बाहर हुआ था।

जानिये क्या है LEMOA संधि?

LEMOA (Logistics Exchange Memorandum of Agreement) भारत और अमेरिका के बीच किया गया एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौता है। इस समझौते पर 29 अगस्त 2016 को हस्ताक्षर किए गए थे।

इस संधि के तहत दोनों देश एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं का उपयोग लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए कर सकते हैं। इसका मतलब यह है कि दोनों देशों की सेनाएं जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे के सैन्य अड्डों पर ईंधन भर सकती हैं, मरम्मत करा सकती हैं और आवश्यक आपूर्ति प्राप्त कर सकती हैं। सरल शब्दों में कहा जाए तो यह समझौता सैन्य सहयोग और लॉजिस्टिक सहायता को आसान बनाने के लिए किया गया है।

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अमेरिका के अन्य देशों के साथ भी है ऐसे समझौते

भारत के साथ किया गया LEMOA समझौता कोई अनोखा समझौता नहीं है। अमेरिका ने कई देशों के साथ इसी तरह के समझौते किए हुए हैं, जिन्हें आम तौर पर Logistics Support Agreement (LSA) कहा जाता है। इन समझौतों का उद्देश्य सैन्य अभियानों, संयुक्त अभ्यासों और मानवीय सहायता के दौरान सहयोग को आसान बनाना होता है।

LEMOA संधि के क्या है मुख्य उद्देश्य

LEMOA का मुख्य उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करना है। इसके तहत दोनों देश निम्नलिखित सुविधाएं एक-दूसरे को प्रदान कर सकते हैं-

  • ईंधन भरने की सुविधा – सैन्य जहाजों और विमानों के लिए
  • मरम्मत और रखरखाव – सैन्य उपकरणों की मरम्मत
  • लॉजिस्टिक सपोर्ट – भोजन, उपकरण और अन्य जरूरी सामग्री, सैन्य अभ्यास के दौरान सहायता

इससे दोनों देशों की सेनाओं को लंबी दूरी के अभियानों में काफी सुविधा मिलती है।

LEMOA किन गतिविधियों को करता है कवर

यह समझौता मुख्य रूप से चार प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग प्रदान करता है-

1. पोर्ट कॉल-  दोनों देशों के नौसैनिक जहाज जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे के बंदरगाहों पर रुक सकते हैं।

2. संयुक्त सैन्य अभ्यास- भारत और अमेरिका नियमित रूप से संयुक्त सैन्य अभ्यास करते हैं। इस समझौते से इन अभ्यासों के दौरान लॉजिस्टिक व्यवस्था आसान हो जाती है।

3. सैन्य प्रशिक्षण- दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के साथ प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग ले सकती हैं।

4. मानवीय सहायता और आपदा राहत- प्राकृतिक आपदा या मानवीय संकट की स्थिति में दोनों देश एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं का उपयोग कर राहत कार्य कर सकते हैं।

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क्या LEMOA के तहत भारत में  बन सकते हैं अमेरिकी सैन्य अड्डे?

इस संधि को लेकर अक्सर यह भ्रम फैलाया जाता है कि इसके तहत भारत में अमेरिकी सैन्य अड्डे बन सकते हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि LEMOA में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।

यह समझौता केवल लॉजिस्टिक सुविधाओं के आदान-प्रदान तक सीमित है। इसका मतलब है कि अमेरिका भारत में स्थायी सैन्य तैनाती नहीं कर सकता। इसी तरह भारत भी जरूरत पड़ने पर अमेरिकी सैन्य सुविधाओं का उपयोग कर सकता है।

भारत की सहमति के बिना नहीं होगा कोई उपयोग

इस समझौते की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके तहत कोई भी सुविधा दोनों देशों की आपसी सहमति से ही दी जाती है। भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि LEMOA के तहत मिलने वाली किसी भी लॉजिस्टिक सहायता का निर्णय मामले के आधार पर अलग-अलग लिया जाता है। इसका मतलब यह है कि भारत की अनुमति के बिना कोई भी देश भारतीय सैन्य सुविधाओं का उपयोग नहीं कर सकता।

 क्या भारत को युद्ध में शामिल कर सकता है LEMOA 

भारत सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह संधि भारत को किसी भी अंतरराष्ट्रीय संघर्ष में शामिल होने के लिए मजबूर नहीं करती। इस समझौते का उद्देश्य केवल लॉजिस्टिक सहयोग है, न कि सैन्य गठबंधन बनाना। इसलिए भारत अपनी स्वतंत्र विदेश और रक्षा नीति के अनुसार ही निर्णय लेता है।

ईरानी युद्धपोत पर हमले के बाद क्यों चर्चा में आई LEMOA

ईरानी युद्धपोत पर हमले के बाद अमेरिकी सेना के एक सेवानिवृत्त अधिकारी कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान पर हमले के लिए भारतीय नौसैनिक अड्डों का इस्तेमाल किया।

इस बयान के बाद भारत की सरकारी एजेंसी PIB (प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो) ने तुरंत इस दावे को फर्जी करार दिया। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह हमला भारत के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) के बाहर हुआ था और भारत की सैन्य सुविधाओं का इसमें कोई उपयोग नहीं हुआ।

भारतीय नौसेना ने किया बचाव अभियान

हमले के बाद जब ईरानी युद्धपोत से आपात संदेश मिला, तब भारतीय नौसेना ने भी खोज और बचाव अभियान में हिस्सा लिया। इस दौरान श्रीलंकाई नौसेना के साथ मिलकर कई नाविकों को बचाया गया। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि भारत का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में मानवीय सहायता और समुद्री सुरक्षा बनाए रखना है।

रक्षा सहयोग को मजबूत करनें वाला महत्वपूर्ण समझौता 

भारत और अमेरिका के बीच LEMOA संधि रक्षा सहयोग को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण समझौता है। यह समझौता केवल लॉजिस्टिक सुविधाओं के आदान-प्रदान तक सीमित है और इसका उद्देश्य सैन्य अभियानों को आसान बनाना है।

ईरानी युद्धपोत पर हमले के बाद भले ही इस समझौते को लेकर कई तरह की चर्चाएं हुई हों, लेकिन भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यह संधि भारत को किसी भी युद्ध या सैन्य संघर्ष में शामिल होने के लिए बाध्य नहीं करती। इसलिए LEMOA को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह एक लॉजिस्टिक सहयोग समझौता है, न कि सैन्य गठबंधन।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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