WHO ने इबोला वायरस के कारण पूरे देशों को सतर्क रहने को कहा है। इसे WHO ग्लोबल इमरजेंसी के रूप में देख रहा है। इबोला वायरस एक अत्यंत संक्रामक और जानलेवा बीमारी है। इसके चलते अभी कांगो में 20 दिन में 200 मौतें हो चुकी हैं। WHO ने इबोला वायरस से सबसे ज्यादा खतरा कांगो, युगांडा और रवांडा में बताया है। भारत सरकार इबोला वायरस से बचने के लिए अलर्ट पर है।
भारत सरकार ने हवाई अड्डों और बंदरगाहों में स्क्रीनिंग चालू कर दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन देशों (कांगो, युगांडा, रवांडा) की यात्रा करने से बचने के लिए कहा है। इबोला वायरस के प्रभाव में अगर कोई आता है तो इसका पता 2 से 20 दिनों में चल जाता है। इसके लक्षण सर्दी, खाँसी की तरह हैं। WHO (world Health Organization) ने इबोला वायरस से बचने के लिए अपनी वेबसाइट पर एडवाइजरी भी जारी की, जिसे WHO की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर देखा जा सकता है।
चीन, जापान जैसे कई देश इबोला वायरस से बचने के लिए अपने अपने स्तर पर काम कर रहे है। इन देशों के एयरपोर्ट में बाहर से आने वाले व्यक्तियों की लगातार स्क्रीनिंग हो रही है।
इबोला वायरस के लक्षण
इबोला वायरस का लक्षण मामूली सर्दी, बुखार जैसी बीमारी से चालू होता है जो बाद में बड़ी बीमारी का रूप लेता है। आइए जानते है इबोला वायरस के प्रमुख लक्षण के बारे में –
- बुखार और थकान – इबोला वायरस का सबसे पहला लक्षण है तेज बुखार और थकान। अगर आपको अचानक से तेज बुखार हो रहा है और साथ में थकान भी हो रही है तब आप नजदीकी अस्पताल में जाकर रेगुलर चेक करवाएं।
- सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द – इबोला वायरस का दूसरा प्रमुख लक्षण है सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द। सिर में तेज दर्द और मांसपेशियों में दर्द उठता है तो घर में इलाज करने के बजाय हॉस्पिटल जाकर डॉक्टरों का परामर्श ले।
- उल्टी, दस्त और पेट दर्द – इबोला वायरस का तीसरा प्रमुख लक्षण है उल्टी, दस्त और पेट में तेज दर्द। अगर किसी भी व्यक्ति को उल्टी के साथ दस्त जैसी बीमारी होती है तब डॉक्टरों को दिखाए। अगर पेट में तेज दर्द भी उठता है, तब भी घर में इलाज करने की बजाय हॉस्पिटल जाकर दिखाएं।
- नाक से खून बहना – गर्मियों में नाक से खून बहना आम बात है लेकिन नाक से खून बहना जैसी बीमारी रोज हो रही है तब डॉक्टरों के पास जाकर परामर्श जरूर ले।
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इबोला वायरस कैसे फैलता है…?
यह वायरस हवा में नहीं फैलता है, बल्कि एक दूसरे के संपर्क में आने से फैलता है।
- यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खून, लार, पसीने और वीर्य से भी फैल सकता है।
- अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क में भी आने से यह वायरस फैल सकता है।
- संक्रमित व्यक्ति के कपड़ों को छू कर भी यह वायरस फैल सकता है।
- ऐसा नहीं है कि यह वायरस केवल संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है बल्कि यह वायरस संक्रमित जानवरों के संपर्क में भी आने से फैलता है।
इबोला वायरस से बचाव
WHO इबोला वायरस का उपचार अभी तक ढूंढ पाने में असमर्थ रही है। अभी तक WHO कोई वैक्सीन भी नहीं बना पाई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कुछ देखभाल के घरेलू नुस्खे को जरूर बताया है। अगर कोई व्यक्ति इबोला वायरस से संक्रमित है तो उसे नजदीकी अस्पताल के ICU में ले जाकर देखभाल किया जा सकता है। संक्रमित व्यक्ति को लगातार पानी पिलाकर भी उसके शरीर से संक्रमण को कम किया जा सकता है।
आप अफ्रीकी देशों की यात्रा न करके भी इस वायरस से बच सकते है क्योंकि अफ्रीकी देश कांगो, युगांडा और रवांडा इस वायरस से काफी नुकसान है। कांगो में पिछले 20 दिन में 200 लोगों की जान गई है जो यह बताता है कि इन देशों में इबोला वायरस कितना अधिक फैल चुका है। चूंकि यह वायरस जंगली जानवरों और पालतू जानवरों से भी फैल सकता है, इसलिए जानवरों को छूने से बचे। खासकर मृत जानवरों को छूने से और अधिक बचे। जंगली जानवरों के अधपके मांस का सेवन करना भी आपको इबोला वायरस की चपेट में ला सकता है इसलिए जंगली जानवरों के अधपके मांस को मत खाएं। अपने हाथों को नियमित रूप से साबुन या हैंड सेनेटाइज़र से साफ करें।







