मीरपुर। बांग्लादेश क्रिकेट टीम ने मंगलवार को अपने खेल इतिहास का एक बेहद सुनहरा पन्ना लिख दिया। शेर-ए-बांग्ला नेशनल स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों के शोर के बीच मेजबान टीम ने धाकड़ ऑस्ट्रेलियाई टीम को छियासी रनों से धूल चटा दी। बारिश से प्रभावित इस मैच में डकवर्थ-लुईस नियम के तहत बांग्लादेश को विनर घोषित किया गया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे क्रिकेट में पिछले इक्कीस सालों से चले आ रहे जीत के सूखे को भी खत्म कर दिया है। इससे पहले बांग्लादेश को कंगारुओं पर आखिरी वनडे जीत साल 2005 में कार्डिफ के मैदान पर मिली थी।
तीन मैचों की इस वनडे सीरीज में अब बांग्लादेश 1-0 से आगे हो गया है। मुकाबले की बात करें तो टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने उतरी बांग्लादेश की टीम ने बोर्ड पर 8 विकेट खोकर 284 रनों का मजबूत स्कोर टांगा था। इसके जवाब में जब ऑस्ट्रेलियाई टीम रनों का पीछा करने उतरी, तो बांग्लादेशी गेंदबाजों ने शुरुआत से ही ऐसा फंदा कसा कि मेहमान टीम 20 ओवर भी ढंग से नहीं खेल पाई। बारिश की बाधा से ठीक पहले ऑस्ट्रेलिया की टीम 190 के फेर में अपने 9 विकेट गंवाकर बेहद नाजुक स्थिति में थी, जिसके बाद खेल संभव नहीं हो सका।
मोसद्देक हुसैन की कड़क वापसी
बांग्लादेश की इस यादगार जीत के सबसे बड़े हीरो रहे मोसद्देक हुसैन, जिनकी टाइमिंग और सूझबूझ देखकर मैदान में बैठा हर क्रिकेट प्रेमी झूम उठा। लंबे समय बाद वनडे टीम में वापसी कर रहे मोसद्देक ने मुश्किल वक्त में मोर्चा संभाला और छियासी रनों की बेहतरीन पारी खेली। साल 2022 के बाद अपना पहला वनडे खेल रहे इस खिलाड़ी ने दबाव को खुद पर हावी होने नहीं दिया। उनके अलावा कप्तान नजमुल हुसैन शांतो ने 66 और तंजीद हसन तमीम ने 54 रनों की उपयोगी पारियां खेलीं। इन तीनों की क्लासिक बल्लेबाजी की बदौलत ही बांग्लादेश एक चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंच सका। शुरुआती ओवरों में ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज विकेट निकालने के लिए तरसते दिखे, जिसका पूरा फायदा उठाकर बांग्लादेशी बल्लेबाजों ने मिडिल ओवरों में रन गति को तेज किया। मोसद्देक ने अपने अनुभव का पूरा निचोड़ इस मैच में झोंक दिया और अंत तक टिके रहे।
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ताश के पत्तों की तरह ढह गई कंगारू बल्लेबाजी
285 रनों के लक्ष्य के सामने ऑस्ट्रेलियाई टीम की शुरुआत किसी बुरे सपने जैसी रही। बांग्लादेश के तेज गेंदबाजों ने शुरुआती ओवरों में ही कंगारुओं को ऐसे झटके दिए कि टीम अंत तक संभल नहीं पाई। हालत यह थी कि ऑस्ट्रेलिया के 7 बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा तक नहीं छू सके और पवेलियन लौट गए। कप्तान जोश इंग्लिस और ऑलराउंडर कैमरून ग्रीन ने जरूर अर्धशतक लगाकर थोड़ी लड़ाई लड़ने की कोशिश की, लेकिन दूसरे छोर से उन्हें किसी का साथ नहीं मिला। ऐसा लगा मानो ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज बांग्लादेश की टर्निंग और स्विंग होती पिचों को समझ ही नहीं पाए।

नाहिद राणा की आग उगलती गेंदें
गेंदबाजी में बांग्लादेश की तरफ से नाहिद राणा सबसे बड़े मैच विनर साबित हुए। राणा ने अपनी रफ्तार और सटीक लाइन-लेंथ से ऑस्ट्रेलियाई बैटिंग लाइन-अप की कमर तोड़ कर रख दी और 4 विकेट चटकाए। उनकी अंदर आती गेंदों के सामने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज पूरी तरह बेबस नजर आए। टीम के बाकी गेंदबाजों ने भी कसी हुई गेंदबाजी की और मेहमान टीम को मैच में कभी भी सिर उठाने का मौका नहीं दिया।
पंद्रह साल बाद द्विपक्षीय सीरीज और कमजोर ऑस्ट्रेलिया
बता दें कि दोनों देशों के बीच पूरे पंद्रह साल बाद कोई द्विपक्षीय वनडे सीरीज खेली जा रही है। इस दौरे पर आई ऑस्ट्रेलियाई टीम अपने कुछ स्टार खिलाड़ियों के बिना खेल रही है। नियमित कप्तान मिचेल मार्श चोट के कारण बाहर हैं, तो वहीं आक्रामक ओपनर ट्रैविस हेड को आराम दिया गया है। मैच में ऑस्ट्रेलिया को उनकी कमी साफ खली, जिसका फायदा बांग्लादेश ने बखूबी उठाया। दूसरी ओर, बांग्लादेश ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उन्हें उनके घर में हराना लोहे के चने चबाने जैसा है। वे घरेलू पिचों पर लगातार श्रीलंका, पाकिस्तान, वेस्टइंडीज और न्यूजीलैंड जैसी टीमों को मात देते आ रहे हैं।
सातवें आसमान पर बांग्लादेश का हौसला
क्रिकेट पंडितों की मानें तो ऑस्ट्रेलिया जैसी वर्ल्ड चैंपियन टीम पर मिली यह जीत बांग्लादेशी क्रिकेट का कॉन्फिडेंस सातवें आसमान पर ले जाएगी। इस जीत ने साफ कर दिया है कि बांग्लादेश अब सिर्फ उलटफेर करने वाली टीम नहीं रही, बल्कि वह किसी भी बड़ी टीम को सामने से हराने का माद्दा रखती है। अब फैंस की नजरें दूसरे वनडे पर टिकी हैं, जहां ऑस्ट्रेलिया वापसी की फिराक में होगा और बांग्लादेश सीरीज पर कब्जा करने के इरादे से मैदान में उतरेगा।







