पश्चिम एशिया में जारी भारी उथल-पुथल के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित शांति समझौते (MoU) को लेकर बड़े दावे किए जा रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और ईरानी विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार दोनों देशों के बीच एक शांति समझौते के मसौदे पर सहमति बनने के कड़वे-मीठे दावे किए जा रहे हैं। हालांकि ज़मीनी स्तर पर तनाव अब भी चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जहां इस समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं वहीं दूसरी ओर ईरान ने अभी अंतिम मोहर लगाने से इनकार किया है। इस पूरे घटनाक्रम पर भारत बहुत ही बारीकी और कड़ाई से नज़र बनाए हुए है क्योंकि फारस की खाड़ी (Persian Gulf) और ओमान की खाड़ी में हुए हालिया हमलों में भारतीय नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
फारस की खाड़ी में हमला और भारत का कड़ा विरोध
हाल ही में फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के रणनीतिक समुद्री मार्ग पर व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरान की नाकेबंदी लागू करने के दौरान ‘एमटी सेटेबेलो’ (MT Settebello) नामक एक तेल टैंकर पर अमेरिकी मिसाइल से हमला किया गया जिसमें तीन भारतीय नाविक आदित्य शर्मा, शिवानंद चौरसिया और पटनाला सुरेश की मौत हो गई।
इसके अतिरिक्त इस क्षेत्र में कई अन्य जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमले हुए जिससे भारतीय नाविकों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई। इस गंभीर घटनाक्रम पर नई दिल्ली ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया। भारत सरकार ने नई दिल्ली में वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक (चार्ज डी’अफेयर्स) को तलब कर इस सैन्य कार्रवाई और भारतीय नाविकों की मौतों पर अपना ‘कड़ा विरोध’ दर्ज कराया। भारत ने स्पष्ट किया कि वाणिज्यिक जहाजों और निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने का सिलसिला तुरंत बंद होना चाहिए।
शांति समझौते के दावे और विरोधाभास
वैश्विक कूटनीति के गलियारों में यह दावा किया जा रहा है कि अमेरिका और ईरान एक 14 सूत्रीय शांति समझौते के बेहद करीब हैं। दावों के अनुसार
- प्रतिबंधों में ढील- इस समझौते के तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को व्यापार के लिए पूरी तरह खोलने के बदले अमेरिका ईरान की फ्रीज की गई 24 अरब डॉलर की संपत्ति को बहाल कर सकता है।
- दावों में मतभेद- जहां अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस समझौते के मसौदे को लेकर उम्मीदें जताई हैं वहीं ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने साफ किया है कि अमेरिकी कूटनीति में निरंतरता की कमी के कारण अभी अंतिम हस्ताक्षर की तारीख तय नहीं हुई है।
इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर यह भी आरोप लगाया कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य से निकल रहे भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमला करने की कोशिश की जिसे विफल कर दिया गया। हालांकि भारतीय और ईरानी रक्षा सूत्रों ने इस कथित ड्रोन हमले की पुष्टि नहीं की है।
भारत के लिए इस घटनाक्रम के मायने
फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य का क्षेत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार के लिए जीवन रेखा की तरह है। भारत अपनी तेल और गैस आपूर्ति का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है। इसके अलावा खाड़ी देशों में लगभग 1 करोड़ से अधिक भारतीय प्रवासी रहते हैं जिनकी सुरक्षा भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
तनाव के कारण जहाजों के मार्ग बदलने और भाड़े में बढ़ोतरी से भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है। यही वजह है कि भारत इस क्षेत्र में जल्द से जल्द स्थिरता चाहता है और अमेरिका-ईरान के बीच किसी भी शांति वार्ता का समर्थन करता है बशर्ते उसमें भारतीय हितों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते के दावे यदि धरातल पर सच साबित होते हैं तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और समुद्री व्यापार के लिए एक बड़ी राहत होगी। हालांकि वर्तमान में दावों और सैन्य कार्रवाइयों के बीच गहरा विरोधाभास दिख रहा है। भारत के लिए अपने नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा सर्वोपरि है। नई दिल्ली ने अमेरिका के सामने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराकर यह साफ कर दिया है कि वह अपनी कूटनीतिक स्वायत्तता और समुद्री सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में यह कूटनीतिक बातचीत किसी ठोस नतीजे पर पहुंचती है या यह क्षेत्र संघर्ष की एक नई आग में झुलसता है।







