व्यापारियों, विशेषकर होटल और ढाबा मालिकों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने 23 मार्च 2026 से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कमर्शियल LPG की आपूर्ति में 20% की अतिरिक्त वृद्धि करने का निर्णय लिया है। इससे अब कुल आपूर्ति प्री-क्राइसिस संकट पूर्व स्तर के 50% तक पहुँच जाएगी।
कमर्शियल LPG संकट – कब और क्यों शुरू हुआ?
भारत में इस गैस संकट की शुरुआत फरवरी-मार्च 2026 के बीच हुई। इसका मुख्य कारण वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव था
- पश्चिम एशिया का युद्ध फरवरी 2026 के अंत में इज़रायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का मार्ग बाधित हो गया।
- आयात पर निर्भरता – भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% LPG आयात करता है और इस आयात का 90% हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से आता है। मार्ग बंद होने से आपूर्ति अचानक गिर गई।
- आपूर्ति में कटौती – सरकार ने 8 मार्च 2026 को आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) लागू किया और घरेलू (Domestic) रसोई गैस की आपूर्ति बनाए रखने के लिए कमर्शियल गैस की सप्लाई को लगभग रोक दिया या न्यूनतम 20% कर दिया।
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कमर्शियल गैस बंद होने का व्यापार पर प्रभाव
जब मार्च के दूसरे सप्ताह में कमर्शियल गैस की आपूर्ति ठप हुई तो इसका हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा
- लागत में भारी वृद्धि – गैस की कमी के कारण खुले बाजार में सिलेंडर की कीमतें दोगुनी तक बढ़ गईं। होटल मालिकों की परिचालन लागत (Operational Cost) 25-30% बढ़ गई।
- मेन्यू में कटौती – कई ढाबों और छोटे होटलों ने तंदूरी रोटियां और गैस की ज्यादा खपत वाले व्यंजन बनाना बंद कर दिया।
- कालाबाजारी का डर – आपूर्ति सीमित होने से सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग शुरू हो गई थी जिससे छोटे व्यापारियों का मुनाफा खत्म होने लगा।
- विकल्पों की तलाश – व्यापारियों को मजबूरन कोयला, लकड़ी या महंगे बिजली के उपकरणों (Induction) का सहारा लेना पड़ा जिससे खाने का स्वाद और लागत दोनों प्रभावित हुए।
संक्षिप्त तालिका
| विवरण | स्थिति |
| संकट की शुरुआत | फरवरी-मार्च 2026 (पश्चिम एशिया युद्ध के कारण) |
| मुख्य कारण | हॉर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना (90% आयात बाधित) |
| नई घोषणा | 23 मार्च 2026 से 20% अतिरिक्त आपूर्ति |
| कुल उपलब्ध कोटा | पुरानी स्थिति का 50% |
| किसे मिलेगा लाभ | होटल, ढाबा, कैंटीन, डेयरी और प्रवासी मजदूर |
सरकार का नया फैसला – 23 मार्च से क्या बदलेगा?
पेट्रोलियम मंत्रालय ने अब स्थिति सुधरते देख चरणबद्ध तरीके से आपूर्ति बहाल करने का फैसला किया है
- 20% की नई वृद्धि – 23 मार्च 2026 से राज्यों को 20% अतिरिक्त कमर्शियल गैस मिलेगी। इससे पहले दी गई राहत को मिलाकर अब कुल आपूर्ति प्री-क्राइसिस लेवल (संकट पूर्व स्तर) का 50% हो जाएगी।
- प्राथमिकता वाले क्षेत्र – यह अतिरिक्त गैस मुख्य रूप से होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट, औद्योगिक कैंटीन, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और डेयरी सेक्टर को दी जाएगी।
- प्रवासी मजदूरों को राहत – 5 किलो वाले ‘फ्री ट्रेड LPG’ (FTL) सिलेंडर की आपूर्ति भी बढ़ाई जाएगी ताकि प्रवासी मजदूरों को खाना बनाने में दिक्कत न हो।
बुकिंग अंतराल और नियमों में बदलाव
आपूर्ति को नियंत्रित करने और जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने बुकिंग के नियमों में कड़े बदलाव किए हैं
| श्रेणी | पहले का अंतराल (फरवरी तक) | अब नया अंतराल (मार्च 2026) |
| शहरी क्षेत्र | 21 दिन | 25 दिन |
| ग्रामीण/दुर्गम क्षेत्र | 21 दिन | 45 दिन |
नोट – यह अंतराल घरेलू ग्राहकों के लिए है ताकि कमर्शियल क्षेत्र के लिए गैस बचाई जा सके। कमर्शियल ग्राहकों के लिए अब प्राथमिकता के आधार पर (Priority Sector) कोटा तय किया गया है।
कीमतों में तुलनात्मक अंतर
मार्च 2026 में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति संकट के कारण दरों में भारी उछाल देखा गया है। दिल्ली के आंकड़ों के आधार पर संक्षिप्त तुलना नीचे दी गई है
| सिलेंडर का प्रकार | फरवरी 2026 की दर | मार्च 2026 की दर | कुल वृद्धि |
| कमर्शियल (19 kg) | ₹1,740.50 | ₹1,855.00* | ~₹114.50 |
| घरेलू (14.2 kg) | ₹853.00 | ₹913.00 – ₹963.00 | ~₹60.00 – ₹110.00 |
स्थान और स्थानीय करों के आधार पर दरें भिन्न हो सकती हैं। कुछ राज्यों में कमर्शियल गैस ₹1,889 तक भी पहुँच गई है।
व्यापारियों को 20% वृद्धि से होने वाले लाभ
इस फैसले से व्यापार जगत में नई जान आने की उम्मीद है
- कीमतों में स्थिरता – आपूर्ति बढ़ने से बाजार में गैस की उपलब्धता बढ़ेगी जिससे सिलेंडर के दामों में आई अचानक उछाल कम होगी।
- संचालन में आसानी – ढाबा और होटल मालिक अब अपने पूरे मेन्यू को फिर से शुरू कर पाएंगे।
- मुनाफे में सुधार – ईंधन की लागत कम होने से व्यापारियों का मार्जिन (Profit Margin) बेहतर होगा जिससे उन्हें ग्राहकों पर बोझ डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- रोजगार की सुरक्षा – गैस की कमी से जो रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर थे वे अब दोबारा सामान्य रूप से चल सकेंगे जिससे वहां काम करने वाले लाखों वेटर्स और रसोइयों का रोजगार सुरक्षित रहेगा।
भविष्य की रणनीति – PNG पर जोर
सरकार ने इस राहत के साथ एक शर्त भी जोड़ी है। भविष्य में ऐसे संकट से बचने के लिए व्यवसायियों को PNG (Piped Natural Gas) कनेक्शन के लिए आवेदन करना होगा। जिन राज्यों में पाइप्ड गैस का विस्तार तेजी से होगा उन्हें कमर्शियल LPG के कोटे में और भी प्राथमिकता दी जाएगी।







