मोदी कैबिनेट ने दी 16 किमी लंबी नई लाइनों और 13 नए स्टेशन को मंजूरी!
दिल्ली की जीवनरेखा कही जाने वाली दिल्ली मेट्रो DMRC अब अपने विस्तार के अगले बड़े पड़ाव की ओर बढ़ चुकी है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में दिल्ली मेट्रो फेज 5A के प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। इस विस्तार योजना का मुख्य उद्देश्य दिल्ली के उन कोनों को मुख्य नेटवर्क से जोड़ना है जो अब तक मेट्रो की पहुंच से दूर थे। 16 किलोमीटर लंबी नई लाइनों और 13 नए स्टेशनों के साथ यह परियोजना न केवल ट्रैफिक का दबाव कम करेगी बल्कि दिल्ली मेट्रो के कुल नेटवर्क को 400 किलोमीटर के पार ले जाएगी।

परियोजना की मुख्य विशेषताएं और सांख्यिकी
फेज-5A के तहत मेट्रो के विस्तार को आधुनिक शहरी नियोजन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसके प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं
- कुल लंबाई – लगभग 16 किलोमीटर।
- नए स्टेशनों की संख्या- कुल 13 नए मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे।
नेटवर्क विस्तार
इस फेज के पूरा होने के बाद दिल्ली मेट्रो का जाल 400 किलोमीटर से अधिक लंबा हो जाएगा जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े मेट्रो नेटवर्कों में से एक बन जाएगा।
कनेक्टिविटी
यह फेज मुख्य रूप से इंटर-कनेक्टिविटी पर जोर देगा ताकि यात्रियों को एक लाइन से दूसरी लाइन पर जाने के लिए लंबा सफर न करना पड़े।
किन इलाकों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
फेज-5A का खाका इस तरह तैयार किया गया है कि यह घनी आबादी वाले क्षेत्रों और नए विकसित हो रहे व्यावसायिक केंद्रों को जोड़े।
भीड़भाड़ वाले इलाकों को राहत
नई लाइनें उन रूटों पर बिछाई जा रही हैं जहाँ वर्तमान में बसों और निजी वाहनों का अत्यधिक दबाव है।
लास्ट माइल कनेक्टिविटी
13 नए स्टेशनों के आने से बाहरी दिल्ली और सीमाओं से सटे इलाकों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
रोजगार के अवसर
नए स्टेशनों के आसपास कमर्शियल हब विकसित होंगे जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
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बुनियादी ढांचे और तकनीक में बदलाव
दिल्ली मेट्रो का फेज-5A केवल विस्तार नहीं है बल्कि यह तकनीक का भी अपग्रेडेशन है।
आधुनिक स्टेशन डिजाइन
नए स्टेशनों को ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर बनाया जाएगा। यहाँ सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग होगा और वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) की व्यवस्था होगी।
ड्राइवरलेस मेट्रो तकनीक
फेज-4 की तर्ज पर फेज-5A की लाइनों पर भी अनअटेंडेड ट्रेन ऑपरेशन UTO यानी ड्राइवरलेस तकनीक का इस्तेमाल किए जाने की संभावना है। इससे ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी बेहतर होगी और मानवीय त्रुटि की संभावना कम हो जाएगी।
मल्टी-मोडल इंटीग्रेशन
कैबिनेट की मंजूरी के अनुसार इन 13 स्टेशनों को बस स्टैंड रेलवे स्टेशन और ई-रिक्शा स्टैंड्स के साथ इस तरह जोड़ा जाएगा कि यात्री को स्टेशन से बाहर निकलते ही परिवहन का अगला साधन आसानी से मिल सके।
आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव
किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का प्रभाव केवल आवाजाही तक सीमित नहीं होता।
पर्यावरण पर प्रभाव Eco-friendly Impact
16 किमी की नई लाइन बिछने से सड़क पर चलने वाले हजारों निजी वाहन कम होंगे। अनुमान के मुताबिक इससे सालाना कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी।
दिल्ली जैसे प्रदूषित शहर के लिए यह मेट्रो विस्तार एक फेफड़े की तरह काम करेगा।
रियल एस्टेट में उछाल
जिन क्षेत्रों से फेज-5A की लाइन गुजरेगी वहां की संपत्ति की कीमतों में 15% से 25% तक की वृद्धि देखी जा सकती है। कनेक्टिविटी बेहतर होने से लोग इन इलाकों में रहना और निवेश करना पसंद करेंगे।
फेज-5A की चुनौतियाँ और समय सीमा
- इतनी बड़ी परियोजना के सामने कुछ चुनौतियाँ भी होंगी
- भूमि अधिग्रहण Land Acquisition
- घनी आबादी वाले क्षेत्रों में जमीन अधिग्रहण हमेशा एक जटिल प्रक्रिया रही है।
निर्माण कार्य और ट्रैफिक
निर्माण के दौरान सड़कों पर लगने वाले जाम से निपटना DMRC के लिए एक परीक्षा होगी।
लागत प्रबंधन
कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के बीच तय बजट में काम पूरा करना सरकार की प्राथमिकता होगी। सरकार ने लक्ष्य रखा है कि अगले कुछ वर्षों के भीतर इस फेज का काम युद्धस्तर पर पूरा कर लिया जाए ताकि दिल्लीवासी 400 किमी लंबे विश्वस्तरीय नेटवर्क का लाभ उठा सकें।






