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Delhi Police Busts Fake Medicine Factory– दिल्ली पुलिस ने नकली दवाओं की फैक्ट्री पकड़ी

दिल्ली पुलिस
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 18, 2025 2:25 अपराह्न
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दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने हाल ही में राजधानी के पास गाजियाबाद (लोनी) में एक बड़े नकली दवाओं के अंतरराज्यीय रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसमें दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और करोड़ों रुपये की नकली दवाइयाँ, कच्चा माल और मशीनरी जब्त की गई है। यह कार्रवाई सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि नकली दवाओं का उत्पादन और वितरण सीधे आम जनता की जान जोखिम में डाल सकता है। 

दिल्ली पुलिस

कैसे खुला नकली दवा रैकेट?

पुलिस को सबसे पहले सूचना मिली कि दिल्ली के सदर बाजार में नकली “Schedule‑H” श्रेणी की दवाइयाँ बेची जा रही हैं, जिनके बारे में पता चला कि वे नकली हैं और असली कंपनियों के नाम पर बेची जा रही हैं। इसके बाद सदर बाजार के एक गोदाम पर छापा मारा गया, जहाँ से नकली दवाइयों की बड़ी खेप जब्त की गई।

जाँच के आगे बढ़ने पर पुलिस को गाजियाबाद के लोनी इलाके में एक अवैध दवा निर्माण यूनिट की जानकारी मिली। वहाँ पर एक अच्छी तरह चल रही फैक्ट्री पाई गई जिसमें नकली मलहम (ointment), क्रीम और अन्य दवाइयों का उत्पादन हो रहा था। 

क्या बरामद हुआ?

पुलिस ने इस अवैध यूनिट से भारी मात्रा में सामान जब्त किया, जिसमें शामिल हैं:

  • लगभग 7,500 से ज़्यादा नकली दवाइयों की ट्यूबें (जैसे Betnovate‑C, Clop‑G, Skinshine)
  • लगभग 22,000 खाली ट्यूबें और पैकिंग सामग्री
  • करीब 350 किलो कच्चा रसायन और पैकिंग मैटेरियल
  • मशीनरी, मिक्सिंग और फिलिंग इक्विपमेंट जो दवाइयाँ बनाने में उपयोग हो रही थी

इन सभी का अनुमानित मूल्य लगभग ₹2.3 करोड़ बताया गया है।

आरोपी कौन हैं?

पुलिस ने इस मामले में दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है:

  1. गौरव भगत, गाजियाबाद निवासी
  2. श्रीराम उर्फ़ विशाल गुप्ता, लोनी निवासी
    दोनों पर यह आरोप है कि वे अवैध तरीके से दवाइयाँ बना रहे थे और उत्तर भारत के कई राज्यों में सप्लाई कर रहे थे। 

नकली दवाइयों का खतरा

जो दवाइयाँ पुलिस ने जब्त कीं वे स्किन संक्रमण, एलर्जी और अन्य रोगों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाइयाँ थीं। लेकिन नकली होने के कारण उनमें हानिकारक रसायन या अनुपयोगी तत्व शामिल हो सकते हैं, जिससे मरीजों की सेहत को गंभीर खतरा हो सकता है।
सही दवा की जगह अगर नकली दवा लगती है, तो इलाज में देरी या गलत इलाज के कारण स्वास्थ्य स्थिति और बिगड़ सकती है। 

कैसे चालू थी यह फैक्ट्री?

पुलिस को पूछताछ में पता चला कि यह फैक्ट्री लगभग एक वर्ष से चल रही थी और यह नेटवर्क दिल्ली‑एनसीआर के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश तक फैल चुका था। आरोपियों ने नकली दवाइयों पर वास्तविक ब्रांड की तरह फर्जी बैच नंबर, एक्सपायरी डेट और होलोग्राम स्टिकर चिपकाकर लोगों को धोखा दे रहे थे। 

जनता के लिए गंभीर चेतावनी

डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (क्राइम) आदित्य गौतम ने चेतावनी दी कि इस तरह की नकली दवाइयाँ सामान्य उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से जोखिम में डालती हैं। वे दवाइयाँ जिनका इस्तेमाल डॉक्टरों की सलाह से होना चाहिए, वे भी नकली उत्पादों के रूप में बाजार में बिक रही थीं, जिससे रोगियों को भारी नुकसान हो सकता था। 

निगरानी में कमियाँ और सुधार की ज़रूरत

इस मामले की एक बड़ी बात यह भी है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकली माल और उत्पादन यूनिट पुलिस की नज़र से कैसे बचा रहा। विशेषज्ञों और नागरिक सुरक्षा संगठनों ने कहा है कि औषधि निरीक्षण प्रणाली में सुधार, निगरानी उपकरणों की कमी, रैकेट की जाँच और नियमित निरीक्षण की शक्ति को बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसे मामले पहले चरण में ही पकड़े जा सकें। 

नकली दवाओं का राष्ट्रीय स्तर पर खतरा

सिर्फ दिल्ली‑एनसीआर में ही नहीं बल्कि पूरे भारत में नकली दवाइयों के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इससे न केवल उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है, बल्कि यह अवैध व्यापार बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान और समाज के प्रति विश्वास में गिरावट भी पैदा करता है।
कई मामलों में ऐसी दवाइयाँ स्वास्थ्य सेवाओं की आपूर्ति श्रृंखला में भी मिल जाती हैं, जिससे चिकित्सकीय उपचार और अस्पताल प्रोटोकॉल को भी नुकसान होता है। 

कानूनी कार्रवाई और आगाहियाँ

इस मामले में आरोपितों पर भारतीय न्याय संहिता (IPC) और दवाइयां और कॉस्मेटिक्स अधिनियम (Drugs & Cosmetics Act) के तहत संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस की टीम अब पूरे नेटवर्क को उजागर करने और अन्य संलिप्त लोगों को पकड़ने के लिए आगे की जांच कर रही है। 

समाज और सरकार की भूमिका

नकली दवाइयों से निपटने के लिए केवल पुलिस की कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है। सरकार को चाहिए कि वह जागरूकता अभियान, नियमित निरीक्षण, उच्च तकनीकी निगरानी और कानूनी सख्ती को और बढ़ाए। साथ ही आम नागरिकों को भी सतर्क रहने और अधिकारिक दुकानों से ही दवाइयाँ खरीदने की सलाह दी जाती है।

निष्कर्ष

दिल्ली पुलिस की यह बड़ी कार्रवाई यह साबित करती है कि नकली दवाइयों का अंतरराज्यीय रैकेट कितना व्यापक हो सकता है और इसके उत्थान में कितने लोग शामिल हो सकते हैं।
अधिकारी कहते हैं कि इस तरह की नेटवर्क को धीरे‑धीरे खत्म किया जाएगा और जनता को सुरक्षित दवाइयाँ उपलब्ध कराने के सभी उपाय किए जायेंगे, ताकि स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी धोखाधड़ी और जोखिम कम हो सके।

Shivanshu Mehta

मैं एक अनुभवी समाचार सामग्री लेखक हूँ, जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर गहन, सटीक और प्रभावी लेखन में विशेषज्ञता रखता हूँ। ताज़ा खबरों, विश्लेषणात्मक रिपोर्टों और विशेष फीचर स्टोरीज़ को स्पष्टता और विश्वसनीयता के साथ पाठकों तक पहुँचाना मेरी प्राथमिकता है।

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