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आरएसएस पर दिग्विजय सिंह की टिप्पणी से सियासी हलचल, कांग्रेस नेताओं का समर्थन सामने आया

आरएसएस पर दिग्विजय सिंह की टिप्पणी से सियासी हलचल, कांग्रेस नेताओं का समर्थन सामने आया
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 29, 2025 1:17 अपराह्न
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दिग्विजय सिंह के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े बयान ने देश की राजनीति में एक बार फिर तीखी बहस छेड़ दी है। उनके बयान के बाद जहां सत्तारूढ़ दल ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, वहीं कांग्रेस के भीतर से ही शशि थरूर और सलमान खुर्शीद जैसे वरिष्ठ नेताओं का समर्थन सामने आया है।

इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है, बल्कि विचारधारा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संगठनात्मक भूमिका जैसे मुद्दों को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

बयान के बाद सियासी प्रतिक्रियाओं की बाढ़

दिग्विजय सिंह के बयान के सामने आते ही भाजपा नेताओं ने इसे देशविरोधी मानसिकता करार दिया और कांग्रेस पर आरएसएस को बदनाम करने का आरोप लगाया। भाजपा का कहना है कि आरएसएस एक सांस्कृतिक संगठन है और उस पर बार-बार सवाल उठाना राष्ट्रवादी भावनाओं पर हमला है। कई भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से सार्वजनिक माफी की मांग भी की| 

दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस मुद्दे पर रक्षात्मक के बजाय आक्रामक रुख अपनाया। पार्टी नेताओं का कहना है कि किसी भी संगठन की भूमिका और प्रभाव पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है। कांग्रेस के प्रवक्ताओं ने तर्क दिया कि दिग्विजय सिंह ने जो कहा, वह एक राजनीतिक टिप्पणी है, जिसे बयानबाजी के बजाय विचारों की बहस के तौर पर देखा जाना चाहिए।

थरूर और खुर्शीद का समर्थन, कांग्रेस के भीतर एकजुटता का संकेत

शशि थरूर और सलमान खुर्शीद का समर्थन सामने आने के बाद यह साफ हो गया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है। थरूर ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी संगठन की आलोचना या समर्थन करने का अधिकार सभी को है और इसे देशभक्ति या देशद्रोह के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत की ताकत उसकी बहुलता और विचारों की विविधता में है।

सलमान खुर्शीद ने भी दिग्विजय सिंह के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि राजनीति में वैचारिक मतभेद स्वाभाविक हैं और इन्हें दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उनका कहना था कि किसी भी संगठन की सार्वजनिक भूमिका पर सवाल उठाना न तो अपराध है और न ही असंवैधानिक। कांग्रेस के इन वरिष्ठ नेताओं के बयान से यह संकेत मिला है कि पार्टी नेतृत्व इस विवाद को वैचारिक संघर्ष के रूप में पेश करना चाहता है, न कि सिर्फ एक बयानबाजी के रूप में।

आगे की राजनीति और संभावित असर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले समय में और गहराता दिख सकता है। एक ओर जहां भाजपा इसे राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर भुनाने की कोशिश करेगी, वहीं कांग्रेस इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों का मुद्दा बनाएगी। यह टकराव सिर्फ बयान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चुनावी मंचों और जनसभाओं में भी इसका असर दिख सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दिखा दिया है कि आरएसएस भारतीय राजनीति में एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर बयान आते ही सियासी तापमान बढ़ जाता है। दिग्विजय सिंह के बयान और उस पर थरूर व खुर्शीद के समर्थन ने कांग्रेस के भीतर वैचारिक स्पष्टता का संदेश दिया है, जबकि भाजपा इसे विपक्ष की कमजोरी और नकारात्मक राजनीति के रूप में पेश करने में जुटी है।

कुल मिलाकर, यह सियासी घमासान फिलहाल थमता नहीं दिख रहा। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के और तीखे बयान सामने आ सकते हैं, जिससे यह मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में बना रहेगा।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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