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2027 में देश के इतिहास की होगी पहली डिजिटल जनगणना, प्रक्रिया और तैयारी के लिये बजट मंजूर

डिजिटल जनगणना
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 13, 2025 12:35 पूर्वाह्न
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नई दिल्ली।
भारत सरकार ने शुक्रवार को 2027 में होने वाली आगामी राष्ट्रीय जनगणना के लिए लगभग ₹11,718 करोड़ (लगभग 11.7 हजार करोड़ रुपये) का बजट मंजूर कर दिया है। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में लिया गया, जिसमें सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे देश की इतिहास में पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना बताते हुए इसकी महत्ता को रेखांकित किया।

पहली डिजिटल जनगणना होगी 2027

हर 10 सालों में होती है जनगणना

भारत में हर 10 साल पर राष्ट्रीय जनगणना होती है, जिससे देश की जनसंख्या, सामाजिक-आर्थिक स्थितियाँ, आवासीय विवरण, शिक्षा, रोजगार, भाषा, लिंग, संसाधन वितरण और अन्य आंकड़े एकत्रित होते हैं। 2021 की जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित हो गई थी, और अब यह 2027-28 में आयोजित की जाएगी।

11,718 करोड़ का खर्च

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित ₹11,718 करोड़ का खर्च भारत की अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक और सांख्यिकीय परियोजना के लिए है। यह बजट डिजिटल तंत्र, मोबाइल एप्लिकेशन, डेटा सर्वर, क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा प्रोटोकॉल और 30 लाख से अधिक कर्मचारियों के प्रशिक्षण तथा काम पर लगाने के लिये आवंटित किया जाएगा।

इस बजट में डेटा सुरक्षित रखने के उपाय, आधुनिक तकनीकों का उपयोग, डिजिटल फॉर्मेट में सामाजिक और आर्थिक डेटा संग्रह जैसी सुविधाएँ शामिल रहेंगी। अनुमान है कि प्रति व्यक्ति गणना पर लगभग ₹97 रुपये का खर्च आएगा, हालांकि वास्तविक खर्च आबादी की वृद्धि एवं अन्य फैक्टरों के आधार पर बदल सकता है।

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भारत की पहली डिजिटल जनगणना

2027 की जनगणना भारत का इतिहास बनाती है, क्योंकि यह पहली बार पूर्ण रूप से डिजिटल माध्यम से सम्पन्न होगी। इसके तहत ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों के लोगों की जानकारी मोबाइल ऐप, वेब-आधारित पोर्टल और सीएमएमएस (Census Management and Monitoring System) के माध्यम से दर्ज की जाएगी। डेटा सीधे इलेक्ट्रॉनिक सर्वरों में भेजा जाएगा और मैन्युअल पेंसिल,कागज़ के रिकॉर्डिंग सिस्टम को धीरे-धीरे हटाया जाएगा। डिजिटल जनगणना डिज़ाइन करते समय डेटा सुरक्षा को मुख्य प्राथमिकता दी गई है, ताकि नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित रहे और केवल आधिकारिक उद्देश्यों के लिये उपयोग हो।

आने वाले समय में एक विशिष्ट मोबाइल ऐप भी जारी किया जाएगा, जिसमें नागरिक खुद अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे, यानी सेल्फ-एन्यूमरेशन (Self-Enumeration) भी संभव होगा। यह सुविधा उन लोगों के लिये उपयोगी साबित होगी जो अपनी सूचना घर बैठे दर्ज करना चाहते हैं, और सरकारी कर्मचारियों से प्रत्यक्ष इंटरैक्शन को प्राथमिकता नहीं देते।

दो चरणों में होगा क्रियान्वयन

सरकार ने घोषणा की है कि 2027 की जनगणना को दो चरणों में आयोजित किया जाएगा जिसमें पहला चरण हाउस लिस्टिंग और आवास जनगणना (House Listing & Housing Census) है। यह चरण अप्रैल से सितंबर 2026 तक चलेगा। इस चरण में प्राथमिक रूप से घरों, उनके प्रकार, सुविधा, संरचना और परिवारों की सूची तैयार की जाएगी। वहीं दूसरा चरण जनसंख्या गणना (Population Enumeration) होगी। जो सीधे तौर पर फरवरी 2027 में देशभर में शुरू होगा।

इस चरण में प्रत्येक व्यक्ति की गिनती, उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति और अन्य सवालों पर डेटा इकट्ठा किया जाएगा। यह चरण 2027 के पहले कुछ महीनों में पूर्ण होने का लक्ष्य है। वहीम कुछ कठिन भौगोलिक क्षेत्रों जैसे लद्दाख,जम्मू और कश्मीर, और ऊँचे हिमालयी क्षेत्रों में यह प्रक्रिया सितंबर 2026 में पूरी की जा सकती है, ताकि मौसम और भौगोलिक कठिनाइयों का सामना बेहतर तरीके से किया जा सके।

डेटा संग्रह की विस्तृत प्रक्रिया तकनीकि का होगा इस्तेमाल

डिजिटल जनगणना में डेटा संग्रह के लिये कई प्रमुख तकनीकी विशेषताएँ शामिल की गई हैं, जिसमें
मोबाइल ऐप आधारित डेटा संग्रह होगा, जिसे विशेष तौर पर तैयार एप्लिकेशन के माध्यम से घर-घर और व्यक्ति-व्यक्ति आंकड़े लिए जाएंगे। वहीं सीएमएमएस पोर्टल जिसमें केंद्रीय स्तर से डेटा मॉनिटरिंग और मैनेजमेंट सिस्टम लागू होगा, जिससे वास्तविक-समय में कार्य प्रगति और गुणवत्ता को ट्रैक किया जा सके।

CaaS (Census-as-a-Service) सॉफ्टवेयर के जरिये आधुनिक डेटा प्रबंधन सॉफ्टवेयर का उपयोग करके डेटा प्रोसेसिंग और रिपोर्टिंग अधिक त्वरित रूप से होगी। इसके साथ ही डिजिटल प्रश्नावली से पहले से प्री-लोड किए गए डिजिटल प्रश्नावली का इस्तेमाल कर, प्रश्नों का संग्रह इलेक्ट्रॉनिक रूप से होगा और डेटा सटीकता बढ़ेगी।

30 लाख कर्मचारी लगेंगे काम पर

2027 की डिजिटल जनगणना को सफलतापूर्वक सम्पन्न करने हेतु लगभग 30 लाख कर्मचारियों को काम पर लगाया जाएगा। इसमें फील्ड एजेंट्स, सुपरवाइज़र्स, डेटा प्रोसेसर, तकनीकी विशेषज्ञ तथा सहायक कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। सरकार इन कर्मचारियों को प्रशिक्षित करेगी ताकि डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल सुचारु रूप से हो सके। डिजिटल सेंसस से जुड़ी तकनीकों जैसे ऐप इस्तेमाल, डेटा सुरक्षा, मोबाइल नेटवर्क उपयोग, और आईटी सिस्टम समझने के लिये व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाये जायेंगे।

डेटा सुरक्षा और निजता को प्राथमिकता

डिजिटल डेटा संग्रह प्रक्रिया में डेटा सुरक्षा एक प्रमुख चिंता का विषय है। सरकार के बयान के अनुसार डिजिटल डिज़ाइन तैयार करते समय डेटा सुरक्षा को प्राथमिकता दी गयी है ताकि नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षा उपायों के साथ संरक्षित रहे और केवल औपचारिक सांख्यिकीय तथा नीति निर्माण के उद्देश्यों हेतु उपयोग हो। इसके लिये उन्नत एनक्रिप्शन, सुरक्षित क्लाउड स्टोरेज और केवल संवैधानिक प्रक्रियाओं के तहत ही डेटा का उपयोग सुनिश्चित करने के लिये नियम एवं प्रोटोकॉल विकसित किये जा रहे हैं।

जनगणना का क्या है सामाजिक व आर्थिक महत्व

भारत की राष्ट्रीय जनगणना सिर्फ़ एक संख्या का संग्रह नहीं है,यह नीति-निर्माण, योजनाओं का लक्ष्यीकरण तथा विकासात्मक पहल के लिये नींव का कार्य करती है। 2011 की अंतिम पूरी जनगणना के बाद देश की आबादी अनुमानत 121 करोड़ से अधिक हो चुकी है, और 2027 में अनुमानित आबादी लगभग 150 करोड़ तक पहुँच चुकी होगी। जो कई क्षेत्रों में योजनात्मक डिज़ाइन के लिये ताज़ा और सटीक आकड़ों की आवश्यकता को दर्शाती है।

जनगणना के परिणाम बनेगे आधार

जनगणना के परिणाम से सरकार को कई आधार तय कर सकेगी। और उसे गति जा सकेगी। बात की जाये तो शिक्षा नीतियों का समायोजन,स्वास्थ्य और पोषण कार्यक्रमों का लक्ष्यीकरण, ग्रामीण-शहरी बुनियादी ढाँचे की दिशा में निवेश,रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के बारे में विस्तृत जानकारी,अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्यों के सामाजिक विवरण तैयार होगा।

राजनीतिक और समाजिक चर्चा का भी बना मुद्दा

2027 की डिजिटल जनगणना पर राजनीति और सामाजिक बहस भी चल रही है। कुछ समूह इसका स्वागत करते हैं क्योंकि यह आधुनिक तकनीक का उपयोग करके अधिक सटीक आंकड़े देगा, और कुछ आलोचक इसके प्रबंधन और डेटा गोपनीयता पर सवाल उठाते हैं। डिजिटल सेंसस के साथ जाति आधारित डेटा संग्रह को भी लेकर सार्वजनिक चर्चा जारी है, हालांकि सरकार ने इसे भी शामिल करने का संकेत दिया है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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