नई दिल्ली।भारतीय पुरुष हॉकी टीम के अनुभवी फॉरवर्ड गुरजंट सिंह ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास लेकर अपने शानदार करियर का अंत कर दिया। लगभग एक दशक तक भारतीय हॉकी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे गुरजंट ने यह घोषणा नई दिल्ली में आयोजित हॉकी इंडिया के वार्षिक पुरस्कार समारोह के दौरान की। 31 वर्षीय गुरजंत सिंह का करियर उपलब्धियों से भरा रहा, जिसमें दो ओलंपिक कांस्य पदक, एशियाई खेलों का स्वर्ण और जूनियर विश्व कप जीत शामिल है। उनके संन्यास के साथ भारतीय हॉकी के एक महत्वपूर्ण दौर का समापन हो गया है।
अपने जुझारू खेल के लिए पहचाने जाने वाले गुरजंट भारतीय हॉकी टीम के उन खिलाड़ियों में रहे जिन्होंने लगातार दो ओलंपिक में पदक जीतने वाली टीम का प्रमुख हिस्सा बनने का गौरव प्राप्त किया जो टोक्यो ओलंपिक 2020 और पेरिस ओलंपिक 2024 में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम के महत्वपूर्ण सदस्य थे। इन दोनों अभियानों में उनकी गति, आक्रामक खेल और बड़े मौकों पर गोल करने की क्षमता ने टीम कोमजबूती दी। खासतौर पर टोक्यो ओलंपिक में भारत के 41 साल बाद पदक जीतने में उनकी भूमिका अहम रही।
जूनियर विश्वकप से हुई थी शुरुआत
गुरजंट सिंह का अंतरराष्ट्रीय करियर 2016 में उस समय चर्चा में आया,जब भारत की टीम की टीम ने पुरुष जूनियर विश्वकप हॉकी 2016 प्रतियोगिता जीती। लखनऊ में खेले गए इस टूर्नामेंट के फाइनल में उन्होंने गोल कर भारत की जीत में अहम योगदान दिया। यही प्रदर्शन उनके सीनियर टीम में चयन का आधार बना और 2017 में उन्होंने भारत के लिए पदार्पण किया। पंजाब ने भारतीय हॉकी को अनेक सितारे दिए हैं इसी पंजाब के अमृतसर जिले के खैलारा गांव में 26 जनवरी 1995 को जन्मे गुरजंट सिंह का सफर संघर्ष और मेहनत से भरा रहा।
एक छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का गुरजंट सिंह का सफर प्रेरणादायक रहा है। कम उम्र में ही जूनियर लेवल में कई राष्ट्रीय टूर्नामेंटों में शानदार प्रदर्शन कर उन्होंने अपनी छाप छोड़ी । उनका यह प्रदर्शन निरंतर जारी रहा और बाद में इनका चयन भारत की राष्ट्रीय हॉकी टीम के लिए हो गया, उनकी गति, फिटनेस और गोल करने की प्रवृत्ति ने उन्हें भारतीय टीम का भरोसेमंद फॉरवर्ड बना दिया।

उपलब्धियां जो बनेंगी यादें
लगभग दस साल के अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में गुरजंट सिंह ने 130 मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व किया , इन मैचों में में उन्होंने 33 गोल किए।उनकी प्रमुख उपलब्धियों में दो ओलंपिक कांस्य पदक (2020, 2024)एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक,2017 एशिया कप जीत
प्रमुख हैं।इन उपलब्धियों के लिए उन्हें 2021 में अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
संन्यास की घोषणा : भावुक कर देने वाला पल
गुरजंट सिंह ने संन्यास की घोषणा अचानक ही कर दिया , इसके पहले उन्होंने इस तरह के कोई संकेत नहीं दिए थे।संन्यास की घोषणा करते हुए गुरजंत सिंह ने कहा कि वह अपने करियर से संतुष्ट हैं और देश के लिए खेलना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा।उन्होंने अपने साथियों के साथ बिताए समय को अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने यह भी कहा कि दो ओलंपिक पदक जीतना उनके करियर का सबसे बड़ा क्षण रहा। संन्यास की घोषणा करते समय गुरजंट काफी भावुक दिखे चूंकि उन्होंने यह घोषणा हॉकी इंडिया द्वारा एक पुरुस्कार समारोह में किया तो उस समय भारतीय हॉकी टीम के कई खिलाड़ी मौजूद थे, ये खिलाड़ी भी गुरजंट के अचानक लिए गए इस फैसले से सकते में आ गए।
योगदान जो हमेशा याद रखा जाएगा : तिर्की
हॉकी इंडिया के अध्यक्ष और भारत के पूर्व कप्तान हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने गुरजंट सिंह की सराहना करते हुए कहा कि वह पिछले एक दशक से भारतीय हॉकी की सफलता के प्रमुख स्तंभ रहे हैं।
तिर्की ने कहा कि गुरजंट की गति, ऊर्जा और निर्णायक मौकों पर गोल करने की क्षमता उन्हें एक खास खिलाड़ी बनाती है और उन्होंने हमेशा देश का गौरव बढ़ाया। गुरजंत सिंह उस पीढ़ी का हिस्सा रहे, जिसने भारतीय हॉकी को लंबे समय बाद वैश्विक मंच पर फिर से स्थापित किया। टोक्यो ओलंपिक में पदक जीत से शुरू हुआ यह दौर पेरिस तक जारी रहा और इसमें गुरजंट की भूमिका बेहद अहम रही।
उनका करियर इस बात का उदाहरण है कि कैसे एक साधारण पृष्ठभूमि से आया खिलाड़ी मेहनत और समर्पण से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकता है।
गुरजंट सिंह का संन्यास केवल एक खिलाड़ी का जाना नहीं, बल्कि भारतीय हॉकी के एक अहम दौर का अंत भी है। वह उस पीढ़ी का हिस्सा रहे, जिसने टीम को मुश्किल दौर से निकालकर फिर से जीत की राह पर खड़ा किया।अब जबकि वह अंतरराष्ट्रीय हॉकी से दूर हो गए हैं, उनकी उपलब्धियां और संघर्ष आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का काम करेंगे। भारतीय हॉकी में उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।







