इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) का मौजूदा सीजन अब अपने सबसे निर्णायक और दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। फुटबॉल के दीवानों के लिए यह समय किसी बड़े उत्सव से कम नहीं है, क्योंकि अंक तालिका में शीर्ष की टीमों के बीच अंकों का फासला इतना कम है कि हर मैच के बाद चैंपियन का नाम बदलता हुआ नजर आता है।
इस बार का मुकाबला केवल दो-तीन टीमों के बीच नहीं, बल्कि कम से कम सात ऐसी टीमें हैं जो खिताब पर कब्जा करने का दम दिखा रही हैं,लीग में ईस्ट बंगाल 22 अंकों के साथ तालिका में शीर्ष पर बना हुआ है। टीम ने अब तक 11 मुकाबलों में छह जीत, चार ड्रॉ और केवल एक हार दर्ज की है। उसका गोल अंतर भी +18 का है, जो अन्य टीमों की तुलना में काफी बेहतर माना जा रहा है। हालांकि पंजाब के खिलाफ दो अंक गंवाने के बाद अब उसकी बढ़त बेहद नाजुक हो गई है।
मोहन बागान: चुपके से वार करने की तैयारी
लीग में मोहन बागान सुपर जायंट के पास 10 मैचों में 21 अंक हैं। सीधा सा हिसाब ये है कि उन्होंने टॉप टीम से एक मैच कम खेला है। इसका मतलब है कि अगर वे अपना अगला मुकाबला जीत लेते हैं, तो वे 24 अंकों के साथ सीधे पहले पायदान पर पहुंच जाएंगे।मोहन बागान का मिडफ़ील्ड इस बार किसी अभेद्य किले जैसा लग रहा है।
हालांकि, एफसी गोवा के खिलाफ पिछला मैच ड्रॉ होने से उन्हें थोड़ा झटका जरूर लगा, लेकिन उनके खेल के अंदाज ने ये साफ कर दिया है कि वे केवल जीतने नहीं, बल्कि सामने वाली टीम को पस्त करने के लिए मैदान में उतरते हैं।
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जमशेदपुर, बेंगलुरु और गोवा: ये ‘डार्क हॉर्स’ पलट सकते हैं बाजी
इस सीजन की सबसे बड़ी खासियत ये है कि लड़ाई केवल कोलकाता की दो टीमों के बीच नहीं है। जमशेदपुर एफसी ने इस बार जिस तरह की फुटबॉल खेली है, उसने बड़े-बड़े दिग्गजों को चौंका दिया है। 12 मैचों में 21 अंकों के साथ वे तीसरे नंबर पर डटे हुए हैं। भले ही उन्होंने मैच ज्यादा खेले हों, लेकिन उनके खिलाड़ियों का हार न मानने वाला जज्बा बाकी टीमों के लिए खतरे की घंटी है।
वहीं, बेंगलुरु एफसी और एफसी गोवा के पास 20-20 अंक हैं। बेंगलुरु ने इस बार अपनी रक्षापंक्ति यानी डिफेंस को इतना मजबूत कर लिया है कि उन्हें भेदना किसी भी स्ट्राइकर के लिए सिरदर्द बन गया है। दूसरी तरफ गोवा की टीम अपनी ‘रफ्तार’ के लिए जानी जा रही है। इन दोनों टीमों का प्रदर्शन इतना संतुलित है कि वे किसी भी दिन टॉप की टीमों का गणित बिगाड़ सकती हैं।
पंजाब और मुंबई का संघर्ष
पंजाब एफसी और मुंबई सिटी एफसी के 19-19 अंक हैं और वे भी खिताब की दौड़ से बाहर नहीं हुई हैं। पंजाब एफसी ने हाल ही में जिस तरह से बड़ी टीमों को टक्कर दी है, उसने सबको प्रभावित किया है। उन्होंने ईस्ट बंगाल जैसी मजबूत टीम को गोल करने से रोक दिया, जिससे उनके खिलाड़ियों का मनोबल काफी ऊंचा है।
वहीं, मुंबई सिटी एफसी, जो इस लीग की सबसे सफल टीमों में से एक रही है, इस बार निरंतरता के लिए जूझ रही है। टीम ने कुछ मैचों में बेहतरीन खेल दिखाया है, तो कुछ में वे काफी कमजोर नजर आए। फिर भी, टॉप-4 में जगह बनाने के लिए मुंबई की टीम पूरी जान लगा रही है।

कोलकाता डर्बी: सीजन का सबसे बड़ा मुकाबला
जैसे-जैसे लीग आगे बढ़ रही है, सबकी नजरें ईस्ट बंगाल और मोहन बागान के बीच होने वाली ‘कोलकाता डर्बी’ पर टिक गई हैं। यह मैच केवल तीन अंकों के लिए नहीं होता, बल्कि यह दोनों क्लबों की इज्जत का सवाल होता है। इस बार की डर्बी इसलिए भी खास है क्योंकि दोनों टीमें अंक तालिका में शीर्ष पर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डर्बी जीतने वाली टीम का रास्ता खिताब के लिए बहुत आसान हो जाएगा। इस मैच के लिए टिकटों की मारामारी अभी से शुरू हो गई है और स्टेडियम के खचाखच भरे रहने की उम्मीद है।
निचले पायदान पर रेलिगेशन का डर
लीग के ऊपरी हिस्से में जहाँ जश्न का माहौल है, वहीं निचले पायदान पर मौजूद टीमों के लिए स्थिति चिंताजनक है। ओडिशा एफसी, नॉर्थईस्ट यूनाइटेड और स्पोर्टिंग क्लब दिल्ली जैसी टीमें लगातार खराब प्रदर्शन के कारण संघर्ष कर रही हैं। सबसे ज्यादा खतरा मोहम्मडन एससी पर मंडरा रहा है। टीम पर रेलिगेशन (लीग से बाहर होने) का खतरा है। उन्हें अपनी साख बचाने के लिए चमत्कारिक प्रदर्शन करना होगा, अन्यथा वे अगले सीजन की दौड़ से बाहर हो सकते हैं।
प्रशंसकों की बढ़ती दीवानगी
आईएसएल के इस सीजन ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय फुटबॉल का स्तर हर साल बढ़ रहा है। अब कोई भी टीम किसी को भी हरा सकती है। मैदानों में बढ़ती भीड़ और टीवी पर बढ़ती व्यूअरशिप यह बताती है कि लोग अब केवल यूरोपीय फुटबॉल नहीं, बल्कि अपने देश की फुटबॉल लीग को भी उतना ही प्यार दे रहे हैं। अब देखना यह होगा कि आने वाले मैचों में कौन सी टीम दबाव को झेल पाती है और कौन सी टीम इस सीजन की चैंपियन बनकर उभरती है।







