नई दिल्ली। फुटबॉल की बिसात पर कभी-कभी आंकड़े झूठ बोल जाते हैं, और इंडियन सुपर लीग ( ISL)2025-26 का यह मुकाबला इसका जीता-जागता सबूत रहा। जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में खेल की चमक भले ही केरल ब्लास्टर्स के पास ज्यादा दिखी हो, लेकिन बाजी मारी स्पोर्टिंग क्लब दिल्ली ने। 2-0 का यह स्कोरलाइन केवल जीत नहीं, बल्कि दिल्ली के धैर्य और केरल की ‘फिनिशिंग’ की लाचारी की कहानी कहता है। शुरुआती मिनटों में दोनों टीमें एक-दूसरे को तौलती नजर आईं।
केरला ब्लास्टर्स ने जहां छोटे पासों के जरिए दिल्ली की रक्षापंक्ति में सेंध लगाने की कोशिश की वहीं दूसरी ओर, दिल्ली के कोच ने एक बेहद गहरी रक्षापंक्ति तैयार की थी, जिसे भेदना केरल के विंगर्स के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा था।केरल के मिडफील्डर खेल को नियंत्रित कर रहे थे, लेकिन दिल्ली का डिफेंस किसी अभेद्य किले की तरह डटा हुआ था। दिल्ली की रणनीति केरल को गलती करने पर मजबूर करना और फिर काउंटर-अटैक के जरिए उन पर प्रहार करना था।
मोहम्मद ऐमेन ने बदली खेल की लय
ऐसा लग रहा था कि मैच का पहला हाफ गोलरहित समाप्त होगा, तभी 36वें मिनट में दिल्ली ने एक मूव बनाया। मोहम्मद ऐमेन अचानक तेज दौड़ लगाकर गेंद तक पहुंचे।केरल के गोलकीपर को समझ ही नहीं आया कि वो बाहर निकलें या अपनी लाइन पर डटे रहें, इसी का फायदा उठाते हुए उन्होंने केरल के गोलकीपर को छकाते हुए सफाई से गेंद को नेट के कोने में डाल दिया। इसी गोल ने दिल्ली को 1-0 की बढ़त दिला दी। हाफ टाइम के बाद केरल ब्लास्टर्स के कोच ने अपने खिलाड़ियों को आक्रामक रुख अपनाने का निर्देश दिया । मैदान पर उतरते ही केरल ने हमलों की झड़ी लगा दी।
एड्रियन लूना और उनके साथी फॉरवर्ड्स ने दिल्ली के गोल पर एक के बाद एक कई धावे बोले। आंकड़ों की बात करें तो शॉट ऑन टारगेट के मामले में केरल आगे था, लेकिन फुटबॉल में ‘लगभग गोल’ जैसा कुछ नहीं होता।एक समय ऐसा आया जब लगा कि केरल बस बराबरी करने ही वाला है। 65वें मिनट में एक क्रॉस पर केरल के स्ट्राइकर का हेडर गोल पोस्ट से महज कुछ इंच की दूरी से बाहर निकल गया। दिल्ली के गोलकीपर ने भी इस दौरान कुछ शानदार बचाव किए, जो अंत में निर्णायक साबित हुए।

लाल कार्ड: अनुशासन की कमी पड़ी केरल को भारी
फुटबॉल में जब कोई टीम पिछड़ रही हो तो सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि वह अपने जज्बातों पर काबू रखे, केरल ब्लास्टर्स यहीं चूक गई। मैच के 85वें मिनट में, जब टीम को एक गोल की सख्त जरूरत थी, ऐबनभा दोहलिंग ने एक अनावश्यक और बेहद खतरनाक टैकल किया।
रेफरी ने बिना किसी देरी के उन्हें सीधा ‘रेड कार्ड’ दिखा दिया।इस एक कार्ड ने केरल की वापसी की बची-कुची उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया। 10 खिलाड़ियों के साथ, दिल्ली जैसी संतुलित टीम के खिलाफ एक गोल की भरपाई करना नामुमकिन जैसा था। मैदान पर संतुलन बिगड़ चुका था और दिल्ली ने अब खेल को धीमा करना शुरू कर दिया, जिससे केरल के खिलाड़ी और अधिक हताश होने लगे।
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मातिजा बाबोविच का अंतिम समय पर प्रहार
मैच के अंतिम क्षणों में केरल ने ‘करो या मरो’ की स्थिति अपनाते हुए अपने डिफेंडर्स को भी अटैक में भेज दिया। इसी का फायदा दिल्ली ने उठाया। 90+7 मिनट में, जब इंजरी टाइम का आखिरी दौर चल रहा था, दिल्ली ने एक तेज जवाबी हमला किया। मातिजा बाबोविच ने गेंद को अपने नियंत्रण में लिया, डिफेंस को छकाया और एक जोरदार शॉट के साथ स्कोर 2-0 कर दिया। यह गोल केवल एक अंक नहीं था, बल्कि केरल के लिए हार का आधिकारिक ऐलान था।
अंक तालिका और भविष्य की राह
इस जीत के साथ स्पोर्टिंग क्लब दिल्ली ने अंक तालिका में लंबी छलांग लगाई है। यह जीत उन्हें टॉप-4 की रेस में मजबूती से बनाए रखेगी। वहीं दूसरी ओर, केरल ब्लास्टर्स के लिए यह हार एक अलार्म की तरह है। यदि वे अपनी फिनिशिंग और अनुशासन में सुधार नहीं करते, तो प्लेऑफ का सपना उनसे दूर होता जाएगा।
दिल्ली की जीत ने यह साबित कर दिया कि घरेलू मैदान का फायदा कैसे उठाया जाता है। मोहम्मद ऐमेन की चपलता और बाबोविच के अनुभव ने दिल्ली को वह मजबूती दी जिसकी उसे दरकार थी। केरल के लिए यह रात लंबी और दुखदायी होगी, लेकिन दिल्ली के लिए यह जश्न की शुरुआत है। फुटबॉल प्रेमियों के लिए यह मैच एक सबक था—मैदान पर कब्जा मायने रखता है, लेकिन इतिहास केवल गोल करने वालों को याद रखता है।







