मडगांव(गोवा)। फुटबॉल के मैदान पर कभी-कभी आंकड़े झूठ बोलते हैं। अगर आप मैच के बाद ‘बॉल पजेशन’ और ‘पासिंग एक्यूरेसी’ देखेंगे, तो लगेगा कि एफसी गोवा ने बेंगलुरु एफसी को चारों खाने चित कर दिया था। लेकिन स्कोरबोर्ड कुछ और ही गवाही दे रहा है।
इंडियन सुपर लीग (ISL) 2025-26 के इस हाई-वोल्टेज मुकाबले में बेंगलुरु ने मडगांव के फातोर्दा स्टेडियम में वह कर दिखाया, जिसकी उम्मीद शायद खुद मेजबान प्रशंसकों को नहीं थी। रणनीतिक अनुशासन और धैर्य का परिचय देते हुए बेंगलुरु ने गोवा को उनके घर में 2-0 से मात देकर न केवल तीन अंक बटोरे, बल्कि यह भी साबित किया कि अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता।
खेल की शुरुआत: छेत्री का जादू
मैच की सीटी बजते ही स्टेडियम ‘फोरजा गोवा’ के नारों से गूंज रहा था। गोवा की टीम अपनी चिर-परिचित आक्रामक शैली के साथ उतरी थी, लेकिन बेंगलुरु के कोच ने अपनी फील्डिंग कुछ इस तरह सजाई थी कि गोवा के विंगर्स को जगह ही नहीं मिल रही थी। खेल के 12वें मिनट में जो हुआ, उसने पूरे स्टेडियम को सन्न कर दिया।बेंगलुरु के मिडफील्ड से एक लंबा थ्रू-बॉल सुनील छेत्री की ओर बढ़ाया गया।
गोवा के डिफेंडर ने ऑफसाइड ट्रैप बिछाने की कोशिश की, लेकिन छेत्री की टाइमिंग किसी मंझे हुए शिकारी जैसी थी। उन्होंने गेंद को अपने सीने पर कंट्रोल किया, एक डिफेंडर को छकाया और फिर ठंडे दिमाग से गोलकीपर के बाईं ओर से गेंद को नेट में डाल दिया। यह गोल सिर्फ एक अंक नहीं था; यह छेत्री का उन आलोचकों को जवाब था जो उनकी उम्र पर सवाल उठाते हैं। छेत्री ने दौड़कर अपने समर्थकों का अभिवादन किया और बेंगलुरु को 1-0 की शुरुआती बढ़त दिला दी।
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गोवा की नाकाम कोशिशें
एक गोल से पिछड़ने के बाद मेजबान एफसी गोवा के खिलाड़ी घायल शेर की तरह टूट पड़े। मैच के 20वें मिनट से लेकर 45वें मिनट तक, खेल पूरी तरह से बेंगलुरु के हाफ में सिमट गया था। गोवा के मिडफील्डर ने छोटे-छोटे पासों से बेंगलुरु के डिफेंस में सेंध लगाने की बार-बार कोशिश की।एक मौके पर तो ऐसा लगा कि बराबरी का गोल हो ही गया। गोवा के स्ट्राइकर ने पेनल्टी बॉक्स के ठीक बाहर से एक दमदार शॉट लिया, लेकिन वह क्रॉसबार से टकराकर वापस आ गया। स्टैंड्स में बैठे हजारों फैंस की आहें निकल गईं।
गोवा ने पहले हाफ में कुल 8 कॉर्नर हासिल किए, लेकिन बेंगलुरु की रक्षापंक्ति किसी अभेद्य दीवार की तरह डटी रही। यहाँ गोवा की सबसे बड़ी कमजोरी उनके ‘फिनिशिंग’ में दिखी। वे गोल पोस्ट के करीब तो पहुँच रहे थे, लेकिन आखिरी टच में वह पैनापन गायब था।
गोल पोस्ट में दीवार बने गुरप्रीत
अगर बेंगलुरु यह मैच जीतने में सफल रहा, तो उसका एक बड़ा श्रेय उनके दिग्गज गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू को जाता है। दूसरे हाफ की शुरुआत में ही गोवा ने दो बेहद खतरनाक हमले किए। एक ‘वन-ऑन-वन’ स्थिति में गुरप्रीत ने अपनी पूरी लंबाई का फायदा उठाते हुए अद्भुत डाइव लगाई और गेंद को बाहर धकेल दिया।
गुरप्रीत की बॉडी लैंग्वेज इस मैच में देखने लायक थी। वे न केवल गोल बचा रहे थे, बल्कि बार-बार चिल्लाकर अपने युवा डिफेंडरों को निर्देश भी दे रहे थे। जब मैच के 75वें मिनट में गोवा को एक फ्री-किक मिली, तो पूरा फातोर्दा स्टेडियम खड़ा हो गया। शॉट बिल्कुल टॉप कॉर्नर की ओर जा रहा था, लेकिन गुरप्रीत ने हवा में उछलकर उसे पकड़ लिया। उस पल बेंगलुरु के खिलाड़ियों का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर पहुंच गया।
नामग्याल भूटिया ने सुनिश्चित की जीत
जैसे-जैसे मैच इंजरी टाइम की ओर बढ़ा, गोवा ने अपने डिफेंडर्स को भी अटैक पर लगा दिया। यह एक बड़ा जोखिम था। बेंगलुरु इसी मौके की तलाश में था। मैच के 92वें मिनट में जब गोवा की पूरी टीम हमले में व्यस्त थी, बेंगलुरु ने एक ‘काउंटर अटैक’ किया।नामग्याल भूटिया, जो सब्स्टिट्यूट के तौर पर आए थे, अपनी ताजी ऊर्जा और फुर्ती के साथ गेंद लेकर गोवा के खाली पड़े हाफ में बिजली की गति से दौड़े।
उनके सामने सिर्फ एक डिफेंडर और गोलकीपर था। भूटिया ने अपनी रफ्तार से डिफेंडर को पीछे छोड़ा और बॉक्स के किनारे से एक ऐसा ‘कर्लिंग शॉट’ लिया जिसने गोलकीपर को हिलने तक का मौका नहीं दिया। स्कोर 2-0! इस गोल के साथ ही गोवा के खिलाड़ियों के कंधे झुक गए और मडगांव में सन्नाटा पसर गया।

सुनील छेत्री: एक युग, एक प्रेरणा
एक बार फिर चर्चा के केंद्र में सुनील छेत्री हैं। उनके खेल में अब वह पहले वाली भाग-दौड़ भले न दिखे, लेकिन उनकी ‘फुटबॉल इंटेलिजेंस’ आज भी बेजोड़ है। वे जानते हैं कि कब रुकना है और कब हमला करना है। छेत्री का यह प्रदर्शन उन युवाओं के लिए एक सबक है जो सोचते हैं कि फुटबॉल सिर्फ शारीरिक ताकत का खेल है। मैच के बाद उन्होंने कहा, “यह जीत मेरी नहीं, बल्कि पूरी टीम के अनुशासन की है। हमने योजना बनाई थी कि हम गोवा को स्पेस नहीं देंगे, और हमने वही किया।”
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FC गोवा के लिए सीख
इस हार ने गोवा के कोच और प्रबंधन के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। टीम की अजेय लय का टूटना एक बड़ा झटका है, खासकर अपने घरेलू मैदान पर। गोवा को समझना होगा कि केवल गेंद पर नियंत्रण रखना मैच जीतने की गारंटी नहीं है। उनके स्ट्राइकर्स को दबाव में ठंडे दिमाग से फिनिश करने की ट्रेनिंग की जरूरत है।
अंक तालिका और भविष्य
इस जीत के साथ बेंगलुरु एफसी अंक तालिका में लंबी छलांग लगाकर टॉप-4 की रेस में मजबूती से वापस आ गई है। प्लेऑफ की डगर अब उनके लिए आसान नजर आ रही है। वहीं, एफसी गोवा को अब अपनी गलतियों को सुधारकर अगले मैच में उतरना होगा। हार कड़वी जरूर है, लेकिन लीग के इस मोड़ पर यह उनके लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ की तरह काम कर सकती है।
फुटबॉल प्रेमी अक्सर ऐसे मैचों को ‘क्लासिक’ कहते हैं। जहाँ एक तरफ गोवा की कलात्मक पासिंग थी, तो दूसरी तरफ बेंगलुरु का चट्टानी डिफेंस। मडगांव की उस उमस भरी शाम ने हमें सिखाया कि फुटबॉल का असली रोमांच आखिरी सीटी बजने तक खत्म नहीं होता। बेंगलुरु की यह ‘सधी हुई जीत’ आने वाले मैचों के लिए अन्य टीमों के लिए एक चेतावनी है—कि वे अनुभवी बेंगलुरु को कम आंकने की गलती न करें।अगले कुछ हफ्तों में आईएसएल का रोमांच और बढ़ेगा, लेकिन फातोर्दा की यह रात बेंगलुरु के फैंस को लंबे समय तक याद रहेगी।







