इंडियन सुपर लीग 2025-26 के एक बेहद रोमांचक मुकाबले में जमशेदपुर एफसी ने आखिरी मिनट में गोल दागकर मुंबई सिटी एफसी को 1-1 की बराबरी पर रोक दिया। मैच के अंतिम क्षणों तक ऐसा लग रहा था कि मुंबई सिटी तीन अंक लेकर मैदान से बाहर जाएगी, लेकिन डिफेंडर सार्थक गोलुई ने इंजरी टाइम में हेडर लगाकर पूरी कहानी ही बदल दी।
जमशेदपुर के घरेलू मैदान जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में खेले गए इस मुकाबले में दर्शकों को अंत तक सांस रोक देने वाला खेल देखने को मिला। यह मुकाबला सिर्फ एक अंक का नहीं, बल्कि जुझारूपन और आखिरी क्षण तक लड़ने के जज्बे का उदाहरण बन गया।
शुरुआती 45 मिनट: रणनीति और रफ़्तार का संगम
मैच की शुरुआत किसी सस्पेंस फिल्म की तरह हुई। जमशेदपुर के घरेलू मैदान पर करीब 22 हजार दर्शकों का शोर इतना था कि खिलाड़ियों को एक-दूसरे की आवाज सुनने में भी दिक्कत हो रही थी। मेजबान टीम ने शुरू से ही ‘अटैकिंग’ माइंडसेट दिखाया।
जमशेदपुर के कोच ने अपनी टीम को स्पष्ट निर्देश दिए थे—मुंबई को सांस लेने का मौका मत दो। शुरुआती 20 मिनटों तक गेंद पर जमशेदपुर का कब्जा रहा, लेकिन मुंबई की रक्षापंक्ति किसी अभेद्य दीवार की तरह डटी रही।दूसरी तरफ, मुंबई सिटी एफसी ने बहुत ही सधे हुए अंदाज में काउंटर-अटैक की रणनीति अपनाई। उनके मिडफील्ड जनरलों ने खेल को अपनी उंगलियों पर नचाना शुरू किया।
खेल के 30वें मिनट के बाद मुंबई ने धीरे-धीरे मैच की लय अपने पक्ष में कर ली। हालांकि, जमशेदपुर की डिफेंस लाइन ने कई मौकों पर बेहतरीन तालमेल दिखाया, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
ब्रैंडन का ‘जादुई’ टच और मुंबई की बढ़त
जैसे-जैसे पहले हाफ का समय खत्म हो रहा था, लग रहा था कि दोनों टीमें बिना किसी गोल के ड्रेसिंग रूम की ओर बढ़ेंगी। लेकिन ठीक 45वें मिनट में ब्रैंडन फर्नांडिस ने खेल का सारा समीकरण बदल दिया। बॉक्स के बाहर से ब्रैंडन ने एक ऐसा करारा शॉट लगाया कि गेंद हवा में लहराते हुए सीधे नेट की तरफ गई। इस गोल में मुंबई को भाग्य का भी सहारा मिला, क्योंकि गेंद एक डिफेंडर के पैर से लगकर हल्का सा मुड़ गई थी। गोलकीपर ने डाइव तो लगाई, लेकिन उनके हाथ से गेंद का फासला कुछ इंच का रह गया। इस गोल के साथ ही मुंबई ने 1-0 की बढ़त बना ली और स्टेडियम में सन्नाटा पसर गया।
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दूसरे हाफ का ड्रामा: हार मानने को तैयार नहीं था जमशेदपुर
ब्रेक के बाद जब टीमें मैदान पर लौटीं, तो जमशेदपुर के खिलाड़ियों की आंखों में एक अलग ही जिद थी। कोच ने रणनीति बदलते हुए विंग्स का इस्तेमाल तेज कर दिया। मिडफील्ड में भी आक्रामक बदलाव किए गए। मैच के 60वें मिनट से लेकर 85वें मिनट तक मैदान पर सिर्फ एक ही टीम हावी दिख रही थी—जमशेदपुर एफसी।जमशेदपुर के प्रशंसकों का जोश सातवें आसमान पर था। टीम ने लगातार तीन-चार ऐसे मौके बनाए जहाँ गोल होना लगभग तय था, लेकिन कभी मुंबई के गोलकीपर का शानदार बचाव तो कभी फिनिशिंग में हुई मामूली सी चूक ने जमशेदपुर को बराबरी से दूर रखा। समय बीतता जा रहा था और मुंबई के खिलाड़ी अब समय काटने की रणनीति पर उतर आए थे। फाउल बढ़ रहे थे, पीले कार्ड दिखाए जा रहे थे और मैदान पर तनाव साफ महसूस किया जा सकता था।

90+4 मिनट: सार्थक गोलुई का वो ‘ऐतिहासिक’ हेडर
जब ऑफिशियल समय खत्म हुआ और चौथे अंपायर ने 5 मिनट का इंजरी टाइम बोर्ड पर दिखाया, तो मुंबई के खेमे में जीत का जश्न शुरू होने ही वाला था। लेकिन असली ड्रामा अभी बाकी था। मैच के 94वें मिनट में जमशेदपुर को एक आखिरी कॉर्नर मिला। यह ‘करो या मरो’ वाली स्थिति थी।पूरा स्टेडियम अपनी सीटों से खड़ा हो गया।
गेंद हवा में लहराती हुई बॉक्स के अंदर आई और वहीं मौजूद थे सार्थक गोलुई। सार्थक ने अपनी पूरी जान झोंकते हुए एक जबरदस्त जम्प ली और मुंबई के डिफेंडरों के सिर के ऊपर से गेंद को गोलपोस्ट के अंदर धकेल दिया। गेंद जैसे ही नेट से टकराई, पूरा जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स खुशी के मारे पागल हो उठा। यह सिर्फ एक गोल नहीं था, बल्कि मुंबई के अहंकार पर एक करारी चोट थी। 1-1 की बराबरी के साथ ही मैच का अंत हुआ।
आंकड़ों में आगे रही जमशेदपुर
अगर पूरे मैच के आंकड़ों पर नजर डालें तो जमशेदपुर कई मामलों में आगे रहा।
टीम ने गेंद पर अधिक नियंत्रण रखा और शॉट्स की संख्या भी ज्यादा रही। इससे यह साफ होता है कि उन्होंने मैच में वापसी के लिए लगातार प्रयास किया।मुंबई सिटी ने हालांकि अपने सीमित मौकों का बेहतर उपयोग किया, लेकिन अंत में वे बढ़त बनाए रखने में असफल रहे।
अंक तालिका का गणित
इस ड्रॉ का मतलब है कि दोनों टीमों को एक-एक अंक से संतोष करना पड़ा। मुंबई के लिए यह किसी हार से कम नहीं है क्योंकि उनके पास तीन अंक लगभग जेब में थे। वहीं जमशेदपुर के लिए यह एक अंक किसी ट्रॉफी से कम नहीं, क्योंकि इसने टीम के गिरते हुए मनोबल को फिर से जिंदा कर दिया है। आईएसएल 2025-26 की अंक तालिका अब और भी रोमांचक हो गई है, जहाँ हर अंक के लिए खिलाड़ियों को खून-पसीना एक करना पड़ रहा है।
अंत में, यह मैच इस बात का गवाह बना कि फुटबॉल में जब तक ‘दी एंड’ न हो जाए, तब तक फिल्म बाकी रहती है। सार्थक गोलुई रातों-रात जमशेदपुर के हीरो बन गए हैं। मुंबई सिटी को अपनी डिफेंसिव रणनीति पर दोबारा विचार करना होगा, वरना आने वाले मैचों में उन्हें ऐसी और भी कड़वी गोलियां निगलनी पड़ सकती हैं। खेल का स्तर, दर्शकों का जुनून और वो आखिरी मिनट का गोल—इस मुकाबले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय फुटबॉल अब किसी से पीछे नहीं है।







