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Indian Woman In Bangladesh – एमपी की राधिका कैसे पहुंची बांग्लादेश, 20 साल बाद होगी घर वापसी

राधिका
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 1, 2025 2:37 अपराह्न
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एमपी की राधिका पहुंची बांग्लादेश 

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आपनें फिल्मों में तो खूब देखा होगा कि कोई मेले से अपनें परिवार से  भटककर कहीं दूर चला जाता है और वर्षों बाद उसका जब पता चलता है, तो कई बदलाव हो चुके होते है।

कुछ ऐसी ही कहानी है राधिका की जो कोलकता पश्चिम बंगाल के गंगासागर मेले में लगभग दो दशक ( 20 वर्ष)  पहले लापता हुई थी, और अब उसका पता लगा है कि वह बांग्लादेश में है। बताया गया कि वर्षों से अपने परिवार से बिछड़ी यह महिला अब जल्द ही भारत लौट सकती है।

मेले में बिछड़ी राधिका Indian Woman In Bangladesh

पश्चिम बंगाल के गंगासागर मेले से  लगभग 20 साल पहले लापता हुई मध्य प्रदेश की राधिका की कहानी किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। 20 साल पहले लापता हुई राधिका बांग्लादेश में मिली है। वर्षों से अपने परिवार से बिछड़ी महिलाअब जल्द भारत लौट सकती हैं।

महिला की खोज का श्रेय वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब (WBRC) के उन शौकिया रेडियो ऑपरेटरों को जाता है, जो लगातार अपने नेटवर्क के जरिए लापता लोगों को उनके परिवारों से मिलाने का काम करते रहे हैं। 

वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब के सचिव अंबरीश नाग विस्वास बताते हैं कि उनके बांग्लादेश स्थित संपर्कों ने उन्हें एक बुजुर्ग महिला के बारे में सूचना दी। उन्होंने बताया कि इस महिला का नाम राधिका है और उम्र तकरीबन 70 साल है। और वह बांग्लादेश की सड़कों पर भीख मांगते हुए मिली थी।

जब लोगों ने उससे उसके पति का नाम पूछा, तो उसने कोई जवाब नहीं दिया। उसने सिर्फ एक शब्द कहा- “सागर” और यही एक शब्द उनकी खोज का आधार बना।

सागर शब्द बना पड़ताल की कुंजी

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नाग विस्वास ने बताया कि सागर सुनते ही WBRC टीम ने अनुमान लगाया कि महिला का संबंध पश्चिम बंगाल के सागर द्वीप से हो सकता है। सबसे पहले जांच वहीं शुरू की गई, लेकिन जब वहां कोई मेल नहीं मिला, तो खोज का दायरा बढ़ाया गया। टीम ने देशभर में उन स्थानों की छानबीन शुरू की जिनका नाम सागर है।

उसी दौरान उन्हें पता चला कि मध्य प्रदेश के सागर जिले के खजरा गांव की एक महिला करीब 20 वर्ष पहले गंगासागर मेले से लापता हुई थी। यह जानकारी मिलते ही WBRC ने मामले की गहराई से जांच शुरू की।

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जानिये कैसे बांग्लादेश पहुंची राधिका

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जांच में सामने आया कि महिला अपने गांव से श्रद्धालुओं के एक समूह के साथ गंगासागर मेले गई थीं। भीड़ में वह अपने समूह से बिछड़ गईं और अनजाने में बांग्लादेश से आए दूसरे समूह के साथ शामिल हो गईं। उस समय बांग्लादेश के कुछ श्रद्धालु ट्रॉलरों के माध्यम से अवैध रूप से गंगासागर आते-जाते थे।

अनुमान है कि राधिका भी ऐसे ही किसी ट्रॉलर में चढ़ गईं और बांग्लादेश पहुंच गईं। वहां सहारा न मिलने पर उन्होंने भीख मांगकर जीवन बिताना शुरू कर दिया।

राधिका का भरा पूरा परिवार

बताया गया कि महिला जब लापता हुई थीं, तब उनके पति बलीराम और तीन बेटे पूरण, राजेश और गणेश थे। उनके पति बलीराम और बेटे पूरण का निधन हो चुका है। बाकी दोनों बेटे राजेश और गणेश दिल्ली में रहते है और वहीं काम करते हैं। WBRC को जब राधिका की हालिया तस्वीरें मिलीं, तो उनका चेहरा पहचानना मुश्किल था। दशकों सड़क पर बिताने के कारण उनका रुप रंग सब काफी बदल गया था।

WBRC की मदद से महिला को साफ-सफाई और नए कपड़े दिलाए गए। इन नई तस्वीरों को जब उनके बेटे राजेश को भेजा गया तो वह तुरंत अपनी मां को पहचान गए। राजेश भावुक होकर बोले कि मेरी मां तीर्थयात्रा पर गई थीं, लेकिन खो गई थी अब उनका लौटना मेरे लिए किसी तीर्थ से कम नहीं। मैं उनमें भगवान का स्वरूप देखूंगा।

कब हो सकती है महिला वापसी

WBRC ने गंगासागर मेला अधिकारियों, बांग्लादेश हाई कमीशन और भारत के विदेश मंत्रालय को इस मामले की जानकारी दी है। सभी एजेंसियों ने राधिका की वापसी में पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है। उम्मीद है कि राधिका जल्द ही भारत लौटकर अपने परिवार से मिलेंगी।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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