आज, 23 जनवरी 2026 को संपूर्ण भारत वर्ष अपने महान नायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती को ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में बड़े ही हर्षोल्लास और गौरव के साथ मना रहा है। यह दिन न केवल एक महापुरुष का जन्मदिन है बल्कि यह भारत की अदम्य इच्छाशक्ति और साहस का उत्सव है।
पराक्रम दिवस 2026 – देशभर में आयोजनों की झलक
भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा इस वर्ष पराक्रम दिवस को भव्य स्तर पर मनाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को नेताजी के राष्ट्र प्रथम के संकल्प से जोड़ना है।
प्रमुख राष्ट्रीय आयोजन श्री विजयपुरम और दिल्ली
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह श्री विजयपुरम – इस वर्ष का मुख्य राष्ट्रीय कार्यक्रम अंडमान के नेताजी स्टेडियम में आयोजित किया गया है। यहाँ एक भव्य ड्रोन शो का आयोजन किया गया है जिसमें नेताजी के जीवन और आजाद हिंद फौज INA के संघर्ष को आसमान में रोशन किया गया।
लाल किला दिल्ली – दिल्ली के लाल किले पर भारत पर्व के साथ पराक्रम दिवस का संगम देखने को मिल रहा है। यहाँ नेताजी के जीवन पर आधारित एक विशेष प्रोजेक्शन मैपिंग शो और सैन्य प्रदर्शनी लगाई गई है।
राज्यों में उत्सव और रैलियाँ
- पश्चिम बंगाल कोलकाता – नेताजी की कर्मभूमि कोलकाता में सुबह से ही प्रभात फेरियां निकाली जा रही हैं। नेताजी भवन एलगिन रोड पर हज़ारों की संख्या में लोग श्रद्धांजलि देने पहुँच रहे हैं। जय हिंद के नारों के साथ युवाओं ने विशाल साइकिल और मोटर रैलियाँ निकाली हैं।
- ओडिशा कटक – नेताजी की जन्मस्थली कटक के जानकीनाथ भवन अब संग्रहालय में विशेष पूजा और फूलों से अभिषेक किया जा रहा है। यहाँ राज्य स्तरीय सांस्कृतिक कार्यक्रम और स्कूली बच्चों के बीच देशभक्ति गीतों की प्रतियोगिताएं आयोजित की गई हैं।
- हरियाणा और पंजाब – हरियाणा विधानसभा परिसर में राज्य स्तरीय सूर्य नमस्कार कार्यक्रम आयोजित किया गया जो शारीरिक शक्ति और मानसिक अनुशासन का प्रतीक है दोनों ही गुण नेताजी के व्यक्तित्व का हिस्सा थे।
- उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश – यहाँ प्रमुख चौराहों पर स्थित नेताजी की प्रतिमाओं का माल्यार्पण किया गया और कॉलेजों में नेताजी का विजन और विकसित भारत विषय पर संगोष्ठियां आयोजित की जा रही हैं।
सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रम
पराक्रम दिवस केवल रैलियों तक सीमित नहीं है बल्कि यह कला और संस्कृति के माध्यम से भी प्रकट हो रहा है
- राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय NSD – देशभर के 13 विभिन्न स्थानों पर नेताजी के जीवन पर आधारित नाटकों का मंचन किया जा रहा है।
- संगीत संध्या – उस्ताद अमजाद अली खान और पापन जैसे दिग्गज कलाकारों द्वारा देशभक्ति धुनों की प्रस्तुतियाँ दी जा रही हैं।
- प्रदर्शनी – भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार द्वारा नेताजी की गुप्त फाइलों और दुर्लभ चित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई है।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस – भारत के लिए अतुलनीय योगदान
नेताजी का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में योगदान केवल एक सेनापति का नहीं बल्कि एक भविष्यदृष्टा (Visionary) का था।
आजाद हिंद फौज INA का गठन
नेताजी ने महसूस किया कि केवल अहिंसक आंदोलनों से ब्रिटिश साम्राज्य को हिलाना कठिन है। उन्होंने विदेशों में रह रहे भारतीयों और युद्धबंदियों को इकट्ठा कर आजाद हिंद फौज को पुनर्जीवित किया। उनकी फौज में झांसी की रानी रेजिमेंट के नाम से महिलाओं की एक समर्पित टुकड़ी भी थी जो उस समय के लिए एक क्रांतिकारी कदम था।
दिल्ली चलो और वैश्विक कूटनीति
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नेताजी ने दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है की नीति अपनाते हुए जर्मनी और जापान से सहायता प्राप्त की। उन्होंने बर्लिन में फ्री इंडिया सेंटर की स्थापना की और आजाद हिंद रेडियो के माध्यम से भारतीयों में जोश भरा।
प्रमुख नारे जो आज भी गूँजते हैं
तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा – इस नारे ने भारतीय युवाओं के भीतर बलिदान की भावना भर दी।
जय हिंद – यह नारा आज भारतीय सेना और आम नागरिकों के बीच अभिवादन का सबसे सम्मानित शब्द बन चुका है।
पहली आजाद भारत सरकार की स्थापना
21 अक्टूबर 1943 को नेताजी ने सिंगापुर में आजाद हिंद की अस्थायी सरकार Arzi Hukumat-e-Azad Hind की घोषणा की थी। इसे दुनिया के कई देशों ने मान्यता दी थी। उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीपों को अंग्रेजों से मुक्त कराकर उनका नाम शहीद और स्वराज रखा था।
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नेताजी के आदर्शों की प्रासंगिकता
आज का भारत जब आत्मनिर्भर होने की ओर अग्रसर है तब नेताजी के अनुशासन आत्मनिर्भरता और एकता के विचार और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। पराक्रम दिवस हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता केवल अधिकारों का नाम नहीं है बल्कि यह अपने देश के प्रति सर्वोच्च कर्तव्य निभाने का साहस है।







