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Older Adults Being Targeted of Cybercrime- CBI, ATS और सुप्रीम कोर्ट के नाम पर बुजुर्गों से ठगी – साइकोलॉजिकल अटैक!

साइकोलॉजिकल अटैक
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 9, 2025 11:32 पूर्वाह्न
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नई ठगी, नया खतरा – और निशाने पर हमारे बुजुर्ग

साइकोलॉजिकल अटैक- भारत में ऑनलाइन और फोन कॉल ठगी लगातार बढ़ रही है, लेकिन अब ठगों ने एक नया और बेहद खतरनाक तरीका अपनाया है—CBI, ATS, सुप्रीम कोर्ट, NIA जैसी एजेंसियों के नाम पर बुजुर्गों को डराकर लूटना। यह सिर्फ वित्तीय धोखाधड़ी नहीं, बल्कि एक साइकोलॉजिकल अटैक है, जिसमें इंसान के मन में भय पैदा कर उसकी जिंदगी भर की जमा-पूंजी छीन ली जाती है। यह गिरोह अच्छी तरह जानता है कि अधिकतर बुजुर्ग अफसरों, कानून और सरकारी एजेंसियों का नाम सुनकर घबरा जाते हैं। इसी कमजोरी का फायदा उठाते हुए ठग खुद को “CBI ऑफिसर”, “ATS इंस्पेक्टर”, “सुप्रीम कोर्ट अधिकारी”, “NIA इन्वेस्टिगेटर” या “साइबर सेल” का अधिकारी बताकर फोन करते हैं और बुजुर्गों को अपराधी साबित करने की धमकी देकर लाखों रुपये वसूल लेते हैं।

साइकोलॉजिकल अटैक

ठगी का तरीका: ‘आपका आधार कार्ड अपराध में इस्तेमाल हुआ है…’

इस साइकोलॉजिकल अटैक की शुरुआत एक साधारण फोन कॉल से होती है, जो अक्सर विदेशी या इंटरनेट कॉलिंग नंबर से आती है। कॉल उठाते ही सामने वाला व्यक्ति बेहद सख्त आवाज़ में बोलता है— कि मै “आपका आधार कार्ड क्राइम सीन में मिला है…”या
“आपके नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज है…”इसके बाद बुजुर्गों को इतना समय भी नहीं मिलता कि वे सोच सकें कि यह सच है या झूठ।

कदम-दर-कदम यह ठगी ऐसे चलती है:

  1. पहला डर: कॉलर खुद को CBI/ATS/NIA/Supreme Court का अधिकारी बताता है।
  2. झूठा केस: कहता है कि उनके नाम पर ड्रग तस्करी, पैसा हेरफेर या आतंकवाद से जुड़ा मामला दर्ज है।
  3. ट्रांसफर कॉल: फिर कॉल एक “सीनियर ऑफिसर” या “जज” को ट्रांसफर कर देता है, जिससे बात और असली लगे।
  4. वीडियो कॉल धमकी: कभी-कभी वे वीडियो कॉल पर नकली यूनिफॉर्म या नकली कोर्टरूम दिखाते हैं।
  5. “सील्ड अकाउंट” की कहानी: कहते हैं कि जांच पूरी होने तक आपका पैसा एक “सुरक्षित सरकारी खाते” में डालना होगा।
  6. पूरे पैसे की निकासी: डर के मारे बुजुर्ग अपनी फिक्स्ड जाडिपॉजिट, पेंशन, सेविंग्स सब निकाल लेते हैं।कम
  7. फिर गायब… ठग पैसा उड़ाकर, कॉल काटकर गायब हो जाते हैं—सिर्फ पछतावा और तनाव छोड़कर।

इस पूरी प्रक्रिया का मकसद है डर, भ्रम और मानसिक दबाव।
यही साइकोलॉजिकल अटैक उन्हें कंगाल कर देता है।

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वास्तविक केस: देशभर में बुजुर्ग सबसे ज्यादा निशाने पर

ऐसे दर्जनों केस पिछले दो साल में सामने आए हैं, जिनमें रिटायर्ड शिक्षक, डॉक्टर, बैंक अधिकारी, आर्मी अफसर तक शामिल हैं।

दिल्ली का केस:

70 वर्षीय महिला से ठगों ने कहा कि उनके नाम पर 22 बैंक खाते मिले हैं, जिनका उपयोग ड्रग रैकेट में हुआ है। डर के मारे महिला ने 48 लाख रुपये “CBI वेरिफिकेशन अकाउंट” में ट्रांसफर कर दिए।

मुंबई का केस:

एक रिटायर्ड इंजीनियर को फोन आया कि उनके कुरियर में ड्रग्स और ATM कार्ड मिले हैं। उन्हें “ATS ऑफिसर” ने धमकाकर 32 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए।

बेंगलुरु मामला:

एक ठग ने बुजुर्ग को सुप्रीम कोर्ट का “नॉन-बेलेबल वारंट” भेजने की धमकी दी। बुजुर्ग ने डर से अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट तुड़वा दी।

हर मामले में एक कॉमन पैटर्न है—
डर, शर्म और भ्रम में बुजुर्ग खुद ठगों के जाल में फंस जाते हैं।

क्यों होता है ऐसा? ठगों की मनोवैज्ञानिक रणनीति

यह समझना जरूरी है कि यह सिर्फ फोन कॉल नहीं—एक माइंड-गेम है।

  1. सरकारी एजेंसियों का भय

बुजुर्ग पीढ़ी कानून से डरती है। वे सोचते हैं कि कहीं वे किसी मुसीबत में न फंस जाएं।

  1. अकेलापन और तुरंत विश्वास

कई बुजुर्ग अकेले रहते हैं। उन्हें कोई सलाह देने वाला नहीं होता।

  1. अपराध में नाम जुड़ने का डर

ठग “टेरर एक्ट”, “ड्रग केस”, “मनी लॉन्ड्रिंग” जैसे शब्द जान-बूझकर इस्तेमाल करते हैं।

  1. तकनीकी ज्ञान की कमी

वे डिजिटल फ्रॉड की चालें नहीं समझ पाते।

  1. लगातार दबाव

कॉलर बुजुर्ग को घंटों बात में उलझा देता है ताकि वे किसी से सलाह न ले सकें।

यह असल में मेंटल ब्रेनवॉशिंग है, जिसमें बुजुर्गों की मानसिक कमजोरी का फायदा उठाया जाता है। ये सरकार और एजेंसियों का आधिकारिक बयान: “ऐसी कोई कॉल असली नहीं होती”

देश की सभी प्रमुख एजेंसियों—CBI, ATS, NIA, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री, पुलिस—ने साफ कहा है:

  • हम किसी नागरिक को फोन कर केस नहीं बताते।
  • हम किसी से पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहते।
  • कोई भी सरकारी जांच अकाउंट नहीं होता।
  • CBI/ATS वीडियो कॉल पर पूछताछ नहीं करती।

अगर कोई कॉल ऐसी बात कर रहा है तो वह 100% ठग है।

किन नंबरों से आती है ऐसी कॉल?

ज्यादातर कॉल निम्न प्रकार की होती हैं—

इंटरनेशनल नंबर,इंटरनेट कॉल (जैसे +001, +888, +02 शुरू होने वाले),प्राइवेट/अननोन नंबर कई बार ठग “Caller ISpoofing” का उपयोग करस्थानीय नंबर भी दिखा देते हैं।

कैसे रोकें इस साइकोलॉजिकल अटैक को?

  1. किसी भी कॉल पर घबराएं नहीं
    अगर वह कह रहा है कि “CBI बोल रही है” तो तुरंत नोट कर लें—यह ठग है।
  2. कभी भी पैसे न भेजें, कोई सरकारी एजेंसी पैसे मांगती ही नहीं।
  3. फोन काट दें ठग आपके मन को डराकर कंट्रोल करना चाहता है। काट देना सबसे आसान उपाय है।
  4. परिवार को तुरंत बताएं,बुजुर्ग अपने बच्चों को जरूर बताएं।
  5. साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत करें।
    www.cybercrime.gov.in
    या 1930 पर कॉल करें।

समाज की जिम्मेदारी: बुजुर्गों को अकेला न छोड़ें

परिवारों और समाज की जिम्मेदारी भी बड़ी है।अगर बुजुर्ग अकेले रहते हैं, तो: उन्हें समझाएं कि कोई भी सरकारी अधिकारी फोन पर जांच नहीं करता।उन्हें फर्जी कॉल्स की पहचान सिखाएं।मोबाइल में “स्पैम कॉल” ब्लॉकर डालें। बैंक में बड़े लेनदेन के लिए OTP/permission सिस्टम सेट करें। ठग वहीं हमला करते हैं जहाँ सुरक्षा कमजोर हो।यह लड़ाई तकनीकी नहीं, मानसिक है।

ये ठगी सिर्फ बैंक बैलेस ही खत्म नहीं करता बल्कि यह बुजुर्गों की मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सम्मान को भी चोट पहुँचाती है।

कॉल करने वाला सिर्फ पैसे नहीं चुराता—वह मन में डर बो देता है। इसलिए इसे सिर्फ साइबर क्राइम नहीं, बल्कि साइकोलॉजिकल वारफेयर कहा जा रहा है। समाधान है—सतर्कता, जागरूकता और परिवार का साथ।

अगर हम अपने बुजुर्गों को इन मानसिक हमलों से बचा पाते हैं, तो यह सिर्फ उनके पैसों की सुरक्षा नहीं बल्कि उनकी इज़्ज़त, आत्मविश्वास और सुरक्षा की रक्षा होगी।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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