मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास और महाराणा प्रताप के वंशजों के बीच चल रहा संपत्ति विवाद| मेवाड़ राजघराने का संपत्ति विवाद, अब देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंच गया है। दशकों से चले आ रहे इस कानूनी संघर्ष ने न केवल मेवाड़ बल्कि पूरे राजस्थान और राजघराने के प्रशंसकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यह मामला केवल आलीशान महलों और होटलों की मिल्कियत का नहीं है बल्कि परंपरा उत्तराधिकार और सम्मान की लड़ाई बन गया है।

मेवाड़ राजघराने का संपत्ति विवाद – विरासत से अदालत तक का सफर
मेवाड़ का पूर्व शाही परिवार जो खुद को सूर्यवंशी मानता है और जिनका इतिहास त्याग और शौर्य का प्रतीक रहा है आज अपने ही भीतर के संपत्ति विवाद के कारण सुर्खियों में है। उदयपुर के सिटी पैलेस से लेकर आलीशान एचआरएच (HRH) होटल्स ग्रुप तक हजारों करोड़ की संपत्ति के बंटवारे का यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
मेवाड़ राजघराने का संपत्ति विवाद की जड़ एक वसीयत और दो भाई
इस विवाद की शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी। मेवाड़ के अंतिम शासक महाराणा भगवत सिंह जी के तीन बच्चे थे बड़े बेटे महेंद्र सिंह मेवाड़ छोटे बेटे अरविंद सिंह मेवाड़ और बेटी योगेश्वरी कुमारी है|
कहा जाता है कि 1984 में महाराणा भगवत सिंह के निधन से पहले पिता और बड़े पुत्र महेंद्र सिंह के बीच वैचारिक मतभेद पैदा हो गए थे। इसके परिणामस्वरूप महाराणा भगवत सिंह ने अपनी एक वसीयत तैयार की जिसमें उन्होंने महेंद्र सिंह को उत्तराधिकार से बेदखल कर दिया और अपनी अधिकांश संपत्तियों का निष्पादक और ट्रस्टी छोटे बेटे अरविंद सिंह मेवाड़ को बना दिया।
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कानूनी लड़ाई का घटनाक्रम
महेंद्र सिंह मेवाड़ ने इस वसीयत को चुनौती दी और हिंदू अविभाजित परिवार HUF के तहत संपत्तियों में अपना हिस्सा मांगा।
जिला अदालत का फैसला 2020 लगभग 37 वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद उदयपुर की जिला अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि मेवाड़ राजघराने की संपत्ति का बंटवारा चार बराबर हिस्सों में होगा स्व. भगवत सिंह महेंद्र सिंह अरविंद सिंह और योगेश्वरी कुमारी। कोर्ट ने यह भी व्यवस्था दी कि संपत्तियों का उपभोग बारी-बारी से रोटेशनल बेसिस पर किया जाए।
हाईकोर्ट का हस्तक्षेप 2022 जिला अदालत के फैसले के खिलाफ अरविंद सिंह मेवाड़ राजस्थान हाईकोर्ट पहुंचे। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के रोटेशनल कब्जे वाले आदेश पर स्टे लगा दिया जिससे फिलहाल संपत्तियों पर अरविंद सिंह का ही नियंत्रण बना रहा।
सुप्रीम कोर्ट में मामला 2024-25 हाल ही में महेंद्र सिंह मेवाड़ के परिवार उनके पुत्र विश्वराज सिंह मेवाड़ और अन्य ने हाईकोर्ट के स्थगन आदेश और वसीयत की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में महाराजा अरविंद सिंह मेवाड़ की वसीयत को चुनौती देते हुए संपत्तियों के समान बंटवारे की मांग की गई है।
हालिया तनाव और पगड़ी दस्तूर विवाद
नवंबर 2024 में महेंद्र सिंह मेवाड़ के निधन के बाद विवाद ने नया मोड़ ले लिया। परंपरा के अनुसार उनके पुत्र विश्वराज सिंह मेवाड़ जो नाथद्वारा से भाजपा विधायक भी हैं उनकी पगड़ी रसम राजतिलक किया गया। जब विश्वराज सिंह अपने समर्थकों के साथ सिटी पैलेस के लिए जा रहे थे तो अरविंद सिंह पक्ष द्वारा उन्हें प्रवेश से रोक दिया गया। इसके बाद उदयपुर में भारी तनाव देखा गया और प्रशासन को दखल देना पड़ा।
मेवाड़ राजघराने का संपत्ति विवाद के मुख्य बिंदु
वसीयत बनाम अधिकार क्या पूर्व महाराणा को अपनी पैतृक संपत्ति से बड़े बेटे को बेदखल करने का अधिकार था?
ट्रस्ट की भूमिका मेवाड़ की अधिकांश संपत्तियां महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल ट्रस्ट के अधीन हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि ये संपत्तियां पारिवारिक हैं न कि निजी। विरासत और सम्मान यह लड़ाई केवल पैसों की नहीं है बल्कि महाराणा की उपाधि और शाही परंपराओं के निर्वहन के अधिकार की भी है।






