व्यापारभारतविदेशी समाचारखेलजीवन शैलीराजनीतिधर्मभौगोलिकसेलिब्रेटीज़शिक्षास्वास्थ्य

सारा मुल्लाली चर्च ऑफ इंग्लैंड की 106वीं कैंटरबरी की आर्चबिशप बनीं 1400 वर्षों के इतिहास में इस शीर्ष पद पर पहुंचने वाली पहली महिला

सारा मुल्लाली चर्च ऑफ इंग्लैंड की 106वीं कैंटरबरी की आर्चबिशप बनीं 1400 वर्षों के इतिहास में इस शीर्ष पद पर पहुंचने वाली पहली महिला
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 26, 2026 6:59 अपराह्न
Follow Us:

यह एक ऐतिहासिक और युगांतकारी घटना है। चर्च ऑफ इंग्लैंड के 1400 वर्षों के इतिहास में सारा मुल्लाली का कैंटरबरी की आर्कबिशप बनना केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक और सामाजिक क्रांति का प्रतीक है।

​कैंटरबरी की 106वीं आर्कबिशप – सारा मुल्लाली का ऐतिहासिक उदय

​25 मार्च 2026 को लंदन और पूरी दुनिया के ईसाई समुदाय ने एक नए अध्याय की शुरुआत देखी। सारा मुल्लाली (Sarah Mullally), जो अब तक लंदन की बिशप के रूप में कार्यरत थीं उन्होंने कैंटरबरी की 106वीं आर्कबिशप के रूप में कार्यभार संभाला। वह सेंट ऑगस्टीन (597 ईस्वी) द्वारा शुरू की गई इस विरासत को संभालने वाली पहली महिला बनीं।

​ पृष्ठभूमि और प्रारंभिक जीवन

​63 वर्षीय सारा मुल्लाली का जीवन ‘सेवा’ के प्रति समर्पित रहा है। आर्कबिशप बनने से पहले उनके करियर को दो मुख्य स्तंभों में विभाजित किया जा सकता है: चिकित्सा और धर्मशास्त्र।

  • नर्सिंग करियर – उन्होंने एक नर्स के रूप में अपना करियर शुरू किया और अंततः ब्रिटेन की ‘चीफ नर्सिंग ऑफिसर’ बनीं। स्वास्थ्य सेवा में उनके योगदान के लिए उन्हें ‘डेम’ (Dame) की उपाधि से भी नवाजा गया।
  • आध्यात्मिक यात्रा –  नर्सिंग के दौरान ही उन्होंने धर्मशास्त्र की ओर रुख किया। 2001 में उन्हें पादरी के रूप में नियुक्त किया गया था।
  • बिशप की भूमिका –  2018 में वह लंदन की पहली महिला बिशप बनीं जो चर्च ऑफ इंग्लैंड का तीसरा सबसे महत्वपूर्ण पद है।

read also : Middle East में अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग

​नियुक्ति का महत्व और प्रक्रिया

​कैंटरबरी का आर्कबिशप ‘एंग्लिकन कम्युनियन’ (Anglican Communion) का आध्यात्मिक प्रमुख होता है। यह समुदाय दुनिया भर के 165 देशों में फैला हुआ है जिसमें लगभग 8.5 करोड़ विश्वासी शामिल हैं।

  • संवैधानिक प्रक्रिया –  इस पद की नियुक्ति ‘क्राउन नॉमिनेशन कमीशन’ द्वारा की जाती है और ब्रिटिश प्रधानमंत्री की सलाह पर सम्राट द्वारा अनुमोदित होती है।
  • ग्लोबल लीडरशिप –  सारा मुल्लाली अब केवल इंग्लैंड के चर्च की ही प्रमुख नहीं हैं बल्कि वे अफ्रीका, एशिया और अमेरिका के एंग्लिकन चर्चों के बीच एकता की धुरी का काम करेंगी।

​चर्च ऑफ इंग्लैंड में महिलाओं की भूमिका –  एक लंबा संघर्ष

​सारा मुल्लाली की इस उपलब्धि के पीछे दशकों का संघर्ष और वैचारिक बहस रही है।

मील का पत्थरवर्षविवरण
पादरी पद की अनुमति1994महिलाओं को पहली बार पादरी (Priest) बनने की अनुमति मिली।
बिशप पद की अनुमति2014चर्च ऑफ इंग्लैंड ने आधिकारिक तौर पर महिलाओं को बिशप बनाने का मार्ग प्रशस्त किया।
प्रथम महिला बिशप2015लिबी लेन पहली महिला बिशप बनीं।
आर्कबिशप पद2026सारा

सारा मुल्लाली के समक्ष चुनौतियां

​एक महिला आर्कबिशप के रूप में मुल्लाली के सामने कई जटिल मुद्दे हैं

  • वैश्विक विभाजन –  एंग्लिकन समुदाय में ‘समान लिंग विवाह’ (Same-sex marriage) और महिला नेतृत्व को लेकर अफ्रीका और पश्चिम के देशों के बीच वैचारिक मतभेद हैं। उन्हें इन विभिन्न मतों के बीच सामंजस्य बिठाना होगा।
  • घटती सदस्यता – यूरोप में चर्च जाने वाले लोगों की संख्या में गिरावट आई है। युवाओं को चर्च से दोबारा जोड़ना उनकी प्राथमिकता होगी।
  • आधुनिक मुद्दे – जलवायु परिवर्तन, शरणार्थी संकट और गरीबी जैसे वैश्विक मुद्दों पर चर्च के रुख को स्पष्ट करना।

​”मेरा नेतृत्व सत्ता के बारे में नहीं बल्कि सेवा और करुणा के बारे में होगा। मैं उन सभी की आवाज बनना चाहती हूँ जिन्हें हाशिए पर धकेल दिया गया है।”  सारा मुल्लाली (पदभार ग्रहण समारोह के दौरान)

read more : Iran में Internet down, history का सबसे बड़ा blackout

​भविष्य की रूपरेखा और प्रभाव

​सारा मुल्लाली की नियुक्ति का प्रभाव केवल धार्मिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा

  • लैंगिक समानता –  यह नियुक्ति दुनिया भर के अन्य संस्थानों के लिए एक उदाहरण है कि योग्यता और सेवा भाव किसी भी लिंग की सीमा से ऊपर हैं।
  • करुणा और विज्ञान का संगम –  उनकी चिकित्सा पृष्ठभूमि उन्हें स्वास्थ्य और नैतिकता के विषयों (जैसे AI, जेनेटिक इंजीनियरिंग) पर एक अद्वितीय दृष्टिकोण प्रदान करती है।
  • धार्मिक कूटनीति –  वह वेटिकन (रोमन कैथोलिक चर्च) और अन्य धर्मों के साथ संवाद को नई दिशा देंगी।

25 मार्च 2026 का दिन इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। सारा मुल्लाली का 106वीं आर्कबिशप बनना प्राचीन परंपरा और आधुनिक प्रगतिशीलता के मिलन का प्रतीक है। 8.5 करोड़ एंग्लिकन ईसाइयों के लिए यह एक नई सुबह है जहाँ नेतृत्व का आधार ‘परंपरा के साथ परिवर्तन’ है।
 

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment