सरफराज़ ख़ान तीनों फॉर्मेट का हकदार फिर भी उपेक्षित-भारतीय क्रिकेट में चयन को लेकर बहस कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब कोई खिलाड़ी लगातार रन बनाता रहे और फिर भी राष्ट्रीय टीम से दूर रखा जाए, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। इंडिया टुडे में प्रकाशित खबर के अनुसार पूर्व भारतीय कप्तान दिलीप वेंगसरकर ने युवा बल्लेबाज़ सरफराज़ ख़ान के समर्थन में खुलकर कहा है कि वह तीनों फॉर्मेट—टेस्ट, वनडे और टी20—खेलने की पूरी क्षमता रखते हैं, इसके बावजूद उनका नजरअंदाज किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। वेंगसरकर की यह टिप्पणी न सिर्फ सरफराज़ के प्रदर्शन की पुष्टि करती है, बल्कि भारतीय चयन प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
घरेलू क्रिकेट में लगातार चमक
सरफराज़ ख़ान का नाम पिछले कुछ वर्षों से घरेलू क्रिकेट में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन का पर्याय बन चुका है। रणजी ट्रॉफी में उनका औसत बेहद प्रभावशाली रहा है और उन्होंने कई मौकों पर शतक व दोहरे शतक जड़कर चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा है। मुंबई के लिए खेलते हुए उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी जिम्मेदारी भरी पारियां खेलीं। विकेट गिरने के बाद पारी को संभालना, लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहना और जरूरत पड़ने पर आक्रामक रुख अपनाना—ये सभी गुण उनके खेल में साफ नजर आते हैं।
रणजी ट्रॉफी ही नहीं, बल्कि ईरानी कप और दलीप ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट्स में भी सरफराज़ का बल्ला जमकर बोला है। घरेलू क्रिकेट में उनकी निरंतरता यह साबित करती है कि उनका प्रदर्शन किसी एक सीजन तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से स्थिर और भरोसेमंद रहा है।
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हालिया फॉर्म ने बढ़ाई बहस
हालिया घरेलू सीजन में भी सरफराज़ ख़ान ने शानदार प्रदर्शन किया चाहे वह हाल में समाप्त हुई सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी हो या वर्तमान में खेली जा रही विजय हजारे ट्रॉफी के कई मुकाबलों में उन्होंने टीम को संकट से उबारा और बड़े स्कोर तक पहुंचाया। उनकी पारियों में परिपक्वता साफ दिखी—बिना जल्दबाज़ी के रन बनाना, गेंदबाज़ों की रणनीति को समझना और समय के साथ आक्रमण तेज करना। सीमित ओवरों के घरेलू टूर्नामेंट्स में भी उनका स्ट्राइक रेट और शॉट चयन यह दर्शाता है कि वे आधुनिक क्रिकेट की मांगों के अनुरूप खुद को ढाल सकते हैं।
पूर्व कप्तान वेंगसरकर की बेबाक राय
इंडिया टुडे से बातचीत में दिलीप वेंगसरकर ने कहा कि यदि कोई खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बना रहा है, तो उसे नजरअंदाज करना क्रिकेट के साथ अन्याय है। उनके अनुसार, “सरफराज़ ख़ान तीनों फॉर्मेट खेलने में सक्षम हैं। टेस्ट में उनके पास तकनीक और धैर्य है, वनडे में वे पारी को संभाल सकते हैं और टी20 में उनके पास आक्रामक शॉट्स की पूरी रेंज है।”
वेंगसरकर ने यह भी इशारा किया कि भारतीय क्रिकेट आने वाले समय में बदलाव के दौर से गुज़र सकता है। ऐसे में घरेलू क्रिकेट में खुद को साबित कर चुके खिलाड़ियों को मौका देना भविष्य के लिहाज़ से ज़रूरी है। उनका मानना है कि केवल संभावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि ठोस प्रदर्शन के आधार पर चयन होना चाहिए।
चयन नीति पर सवाल
सरफराज़ ख़ान का मामला चयन नीति पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि टीम संयोजन या संतुलन के कारण किसी खिलाड़ी को बाहर रखा गया, लेकिन जब कोई बल्लेबाज़ हर स्तर पर रन बना रहा हो, तो उसके लिए जगह बनाना चयनकर्ताओं की जिम्मेदारी बनती है। घरेलू क्रिकेट को यदि प्रतिभा की नींव माना जाता है, तो वहां के प्रदर्शन को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
कई पूर्व खिलाड़ी भी इस बात से सहमत हैं कि घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने वालों को निरंतर मौके मिलने चाहिए। बार-बार टीम में शामिल करना और फिर बाहर कर देना न केवल खिलाड़ी के आत्मविश्वास को प्रभावित करता है, बल्कि घरेलू ढांचे की विश्वसनीयता पर भी असर डालता है।
तीनों फॉर्मेट में उपयोगिता
सरफराज़ ख़ान को अक्सर टेस्ट विशेषज्ञ के रूप में देखा गया, लेकिन उनके आंकड़े और खेल शैली यह बताते हैं कि वे सीमित ओवरों के क्रिकेट में भी उतने ही प्रभावी हो सकते हैं। टेस्ट क्रिकेट में उनकी सबसे बड़ी ताकत है धैर्य और तकनीक—लाल गेंद के सामने उनका बचाव मजबूत है और वे लंबी पारियां खेलने में सक्षम हैं। वनडे क्रिकेट में वे जरूरत के अनुसार रन गति बढ़ा सकते हैं, जबकि टी20 में उनके पास बड़े शॉट्स खेलने की क्षमता है।
आज के दौर में क्रिकेट ऐसे बल्लेबाज़ चाहता है जो परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल सके। सरफराज़ इस कसौटी पर खरे उतरते हैं।
मानसिक मजबूती और संघर्ष
लगातार चयन से बाहर रहने के बावजूद सरफराज़ ख़ान ने कभी खुलकर असंतोष नहीं जताया। उन्होंने हर बार मैदान पर अपने बल्ले से जवाब दिया। यह मानसिक मजबूती उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मदद कर सकती है। संघर्ष से निकले खिलाड़ी अक्सर बड़े मंच पर बेहतर प्रदर्शन करते हैं, और सरफराज़ की कहानी भी इसी ओर इशारा करती है।
इंडिया टुडे की इस खबर ने एक बार फिर सरफराज़ ख़ान के चयन को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। पूर्व कप्तान दिलीप वेंगसरकर की राय, घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रदर्शन और हालिया फॉर्म—ये सभी संकेत देते हैं कि सरफराज़ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अब सवाल यह नहीं कि वे काबिल हैं या नहीं, बल्कि यह है कि उन्हें मौका कब मिलेगा। भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को उम्मीद है कि चयनकर्ता जल्द ही प्रदर्शन को उसका सही सम्मान देंगे और सरफराज़ ख़ान को वह मंच मिलेगा, जिसके वे लंबे समय से हकदार हैं।







