डेलीबार्ता, झारखंड झारखंड में नगर निगम के रिजल्ट जारी होनें के बाद एक नाम ऐसा सामनें आया है जिसमें वर्तमान के राजनीतिक परिदृश्य को बदलनें का काम किया है। इस जीत नें न केवल एक संदेश दिया है बल्कि यह भी साबित किया है कि यदि समाज में आपनें अपनी जवाबदेही पूरी तन्मयता से निभाई है तो समाज भी आपको उसी नजरिये से अपना प्रतिनिधित्व करनें का अवसर देता है। दरअसल झारखंड के हजारीबाग नगर निगम का परिणाम घोषित हुआ जिसमें यहां मेयर के रूप में पत्रकार अरविंद कुमार राणा को जनता द्वारा चुना गया है। 4 हजार के ज्यादा वोटों के अंतर से चुनें गये अरविंद का यह परिणाम न केवल एक संदेश है बल्कि आमजन की इच्छाओं का वह निर्णय है जिसे वर्तमान परिवेश में समझनें की जरुरत है।
पेशे से पत्रकार अरविंद
दरअसल झारखंड के हजारीबाग नगर निगम चुनाव यह बेहद रोचक दिलचस्प और प्रेरणादायी परिणाम माना जा रहा है। क्योंकि यहां कोई सक्रिय राजनीतिक व्यक्ति नहीं बल्कि पेशे से पत्रकार और वकील रह चुके अरविंद कुमार राणा ने ऐसे तमाम चेहरों को पीछे करते हुये अपनी जगह बनाई जो आसान नहीं था। इस चुनाव में धनबल और बड़े राजनीतिक दिग्गजों को पछाड़ना कोई आसान कदम नहीं माना जा सकता था, लेकिन समाज में अपनी अलग पहचान बनानें वाले अरविंद को हजारीबाग की जनता नें अपना सरकार बना लिया और वह मेयर पद पर काबिज होनें में कामयाब रहे है, जो एक प्रेरणा भी देता है।
जनता नें दिया चंदा और बनाया “सरकार”
आपको बता दें कि अरविंद पेशे से पत्रकार हैं और वकील भी है। खुद के पास महज महज 15 से 20 हजार रुपये की होनें की बात कहनें वाले अरविंद नें स्पष्ट किया था कि उनके पास चुनाव लड़नें के लिये पैसे नहीं है, लेकिन इस मौके पर भी जनता नें उनका साथ दिया उन्होनें जनता से चुनाव के लिये चंदा मांगा और उन्हें जनता का साथ भी मिला, और साथ भी इतना जबरदस्त मिला कि उन्होंने इस क्षेत्र के तमाम राजनीतिक धुरंधरों की तमाम राजनीतिक रणनीतियों को पछाड़कर रख दिया, अरविंद राणा नें अपनें निकटतम प्रतिद्वंद्वी मो. सरफराज अहमद को 4657 मतों के अंतर से पराजित कर यह साबित कर दिया कि यदि जनता के बीच आपनें कार्य किया है तो जनता आप जैसे लोगों के साथ हर वक्त है।
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जानिये क्या करते हैं अरविंद?
अरविंद कुमार राणा का सफर कलम और कानून से शुरू होकर अब नगर सरकार के शीर्ष पद तक जा पहुंचा है। वे लंबे समय तक पत्रकारिता और वकालत से जुड़े रहे हैं। अहम यह है कि इसी चुनाव में अरविंद गुप्ता नामक एक और पत्रकार ने भी छतरपुर नगर पंचायत के अध्यक्ष पद पर विजयी हुये है। आपको बता दें कि अरविंद रांची प्रेस क्लब के एग्जीक्यूटिव मेंबर रह चुके हैं। इस जीत के साथ राणा अब लोकतंत्र चौथे स्तंभ के बाद इस नए स्तंभ के रूप में अपनी तीसरी बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।
जनता से सहयोग बना जीत का आधार, खुलकर मिला सपोर्ट
बताया गया कि बेहद गरमागहमी भरे इस चुनाव में अरविंद राणा अपनें चुनाव प्रचार के दौरान सादगी के कारण शुरु से चर्चाओं में रहे। वह अपनें चुनावी कैंपन में मतदाताओं के पास पहुंचकर न सिर्फ वोट की अपील करते थे बल्कि उनसे आर्थिक सहयोग भी मांगते थे। क्षमतानुरुप लोगों नें उनका सहयोग भी किया न केवल वोट मांगते थे, बल्कि चुनाव लड़ने के लिए सहयोग राशि की अपील भी करते थे।
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हिंदुत्व के एंजेंडे को बनाया मुद्दा
अरविंद राणा ने अपने इस चुनाव में हिंदुत्व के एजेंडे पर बीजेपी प्रत्याशी को मात दी। हजारीबाग नगर निकाय चुनाव में अरविंद राणा का अंदाज पूरी तरह पारंपरिक और आध्यात्मिक रहा। उन्होनें ललाट पर सिंदूर का तिलक और गले में भगवा अंगवस्त्र धारण कर ‘प्रखर हिंदुत्व’ को अपना मुख्य मुद्दा बनाया। उन्होंने जनता के बीच दावा किया कि वह असली हिंदुत्व की राह पर चलने वाले प्रत्याशी हैं। ‘घर वापसी’ जैसे मुद्दों पर उनके पुराने कार्यों ने उन्हें जमीन पर मजबूती दी, और परिणाम यह हुआ कि वह हिंदुत्व के मोर्चे पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी को भी पछाड़ने में कामयाब रहे, और 4 हजार के ज्यादा मतों के अंतर से बाजी मार ली।
भावुक हुए अरविंद राणा
इस जीत के बाद अरविंद राणा भावुक हो उठे उन्होनें हजारीबाग की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह जीत उनकी नहीं, बल्कि एक बेहतर शहर का सपना देखने वाले हर नागरिक की है। उन्होनें कहा कि यह उनका वादा है जिन लक्ष्यों और सपनों को लेकर हजारीबाग की जनता नें उन पर भरोसा जताया है और उन्हें इस पद तक पहुंचाया है उसे वह पूरा करनें के लिये संकल्पित है।







