बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ के एक निजी अस्पताल (प्रसाद हॉस्पिटल) की पांचवीं मंजिल पर स्थित इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में अचानक भीषण आग लग गई। इस अग्निकांड के कारण पूरे आईसीयू वार्ड में पल भर में जहरीला और काला धुआं फैल गया जिससे वहां भर्ती मरीजों का दम घुटने लगा। इस दर्दनाक हादसे में 3 मरीजों की मौत हो गई है जबकि 15 से अधिक लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं। घटना के बाद अस्पताल परिसर और आसपास के इलाके में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
घटना का विवरण और तड़के का मंजर
यह दर्दनाक हादसा तड़के सुबह करीब 3:00 से 4 :00 बजे के बीच हुआ जब अस्पताल में ज्यादातर मरीज और उनके तीमारदार सो रहे थे। अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर बने आईसीयू वार्ड से अचानक आग की लपटें और घना धुआं निकलने लगा। देखते ही देखते धुएं ने पूरे फ्लोर को अपनी चपेट में ले लिया। गंभीर स्थिति में वेंटिलेटर और लाइफ सपोर्ट पर मौजूद मरीजों के लिए वहां से खुद निकल पाना नामुमकिन था। धुएं के कारण दम घुटने से 3 मरीजों ने मौके पर ही तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया। वहीं, आग की लपटों की वजह से 15 से अधिक लोग बुरी तरह झुलस गए।
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फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई और रेस्क्यू
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग (फायर ब्रिगेड) की करीब 8 से 12 गाड़ियां और स्थानीय पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचे। जब राहत दल वहां पहुंचा, तो स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण थी क्योंकि पूरी मंजिल काले धुएं से ब्लॉक हो चुकी थी।
- खिड़कियां तोड़कर निकाला गया- दमकल कर्मियों ने बिना वक्त गंवाए मुस्तैदी दिखाई और आईसीयू व अन्य वार्डों की खिड़कियों और शीशों को तोड़कर अंदर प्रवेश किया।
- 20 मरीजों का सफल रेस्क्यू- भारी मशक्कत और सूझबूझ के साथ दमकल विभाग ने करीब 20 मरीजों को जलते हुए वार्ड और धुएं के बीच से सुरक्षित बाहर निकाला।
- मरीजों को किया गया शिफ्ट- रेस्क्यू किए गए और झुलसे हुए सभी मरीजों को तुरंत एम्बुलेंस के माध्यम से शहर के अन्य विभिन्न नजदीकी अस्पतालों में शिफ्ट किया गया जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका।
आग लगने का कारण और लापरवाही के आरोप
शुरुआती जांच और चश्मदीदों के अनुसार, आग लगने की मुख्य वजह बिजली का शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। हालांकि, हादसे की वास्तविक और तकनीकी वजहों का पता लगाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा विस्तृत जांच की जा रही है।
घटना को लेकर स्थानीय लोगों और परिजनों में भारी आक्रोश है। आरोप है कि आग लगते ही अस्पताल प्रबंधन के कुछ कर्मी और सुरक्षा स्टाफ मरीजों को असहाय छोड़कर मौके से भाग खड़े हुए जिससे स्थिति और अधिक बिगड़ गई। अगर समय रहते स्थानीय लोग और दमकल की टीम नहीं पहुंचती तो हताहतों की संख्या और भी ज्यादा हो सकती थी।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और जांच के आदेश
मुजफ्फरपुर के जिला मजिस्ट्रेट (DM) सुब्रत कुमार सेन और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।
प्रशासनिक बयान- “हादसे में हताहत हुए लोगों की शिनाख्त की जा रही है। यह जांच का विषय है कि क्या अस्पताल में पर्याप्त फायर सेफ्टी (अग्निशमन) उपकरण मौजूद थे और क्या वे काम कर रहे थे। लापरवाही बरतने वालों और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
इस अग्निकांड ने एक बार फिर देश और राज्य के अस्पतालों में सुरक्षा इंतजामों और ‘फायर ऑडिट’ पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आईसीयू जैसे संवेदनशील वार्ड जहां मरीज पूरी तरह दूसरों पर निर्भर होते हैं वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होना एक गंभीर अपराध है। मुजफ्फरपुर का यह हादसा स्वास्थ्य केंद्रों में सुरक्षा मानकों को कड़ाई से लागू करने के लिए एक कड़ा सबक है ताकि भविष्य में किसी मासूम को अपनी जान न गंवानी पड़े।







