डोनाल्ड ट्रंप ने मार्च 2026 में ईरान के साथ चल रही तनावपूर्ण स्थिति के बीच एक चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने वाशिंगटन डीसी में एक कैबिनेट बैठक के दौरान खुलासा किया कि ईरान ने सद्भावना के संकेत (Goodwill Gesture) के रूप में 10 तेल टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से सुरक्षित गुजरने दिया।
ट्रंप के अनुसार इन जहाजों पर पाकिस्तानी झंडा लगा था और यह कदम द्विपक्षीय बातचीत में विश्वास कायम करने के लिए उठाया गया था।
घटनाक्रम की पृष्ठभूमि
मार्च 2026 का महीना मध्य पूर्व में अत्यधिक तनाव का रहा है। अमेरिका और इजरायल की ईरान के साथ सैन्य झड़पों के बीच वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने का खतरा मंडरा रहा था। होर्मुज जलडमरूमध्य जहाँ से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है ईरान के नियंत्रण में होने के कारण बंद होने की कगार पर था।
24 मार्च 2026 को ट्रंप ने पहली बार ओवल ऑफिस में पत्रकारों को एक “रहस्यमयी उपहार” (Mysterious Gift) मिलने का संकेत दिया था। उन्होंने कहा था “ईरान ने हमें एक ऐसा तोहफा दिया है जिसकी कीमत करोड़ों डॉलर है।”
10 तेल टैंकरों का रहस्य (26 मार्च 2026 की घोषणा)
26 मार्च 2026 को व्हाइट हाउस में हुई कैबिनेट बैठक में ट्रंप ने विस्तार से बताया कि वह उपहार क्या था। उनके मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे
- शुरुआती 8 जहाज – ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के वार्ताकारों ने शुरू में 8 बड़े तेल टैंकरों को सुरक्षित रास्ता देने का वादा किया था।
- दो अतिरिक्त जहाज – बाद में ईरान ने अपनी पिछली किसी बात के लिए माफी मांगते हुए 2 और जहाज जोड़ने का फैसला किया जिससे कुल संख्या 10 हो गई।
- पाकिस्तानी झंडा – ट्रंप ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि ये जहाज पाकिस्तानी झंडे (Pakistani Flag) के साथ चल रहे थे। उन्होंने कहा “मैंने समाचारों में देखा कि होर्मुज के बीचों-बीच से 8 बड़े जहाज निकल रहे हैं। वे पाकिस्तानी झंडे वाले थे। तब मुझे लगा कि हम सही लोगों से बात कर रहे हैं।”
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पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में उभरा है।
- मध्यस्थ के रूप में – पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने पुष्टि की कि इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच संदेशवाहक की भूमिका निभा रहा है।
- रणनीतिक महत्व – जहाजों पर पाकिस्तानी झंडे का होना यह दर्शाता है कि ईरान सीधे तौर पर अमेरिकी झंडे वाले जहाजों को अनुमति देने के बजाय किसी तीसरे मित्र राष्ट्र के माध्यम से तनाव कम करने की कोशिश कर रहा था।
ट्रंप के दावे का विश्लेषण – क्या यह विश्वास बहाली है?
ट्रंप प्रशासन ने इस कदम को अपनी कूटनीतिक जीत के रूप में पेश किया है। उनके अनुसार
”उन्होंने (ईरान ने) साबित किया कि वे बातचीत को लेकर गंभीर हैं। वे सौदा करना चाहते हैं और वे बहुत बुरी तरह से शांति चाहते हैं।”
हालांकि रक्षा विशेषज्ञों और पेंटागन के कुछ अधिकारियों ने इस पर सावधानी बरतने की सलाह दी है। रक्षा सचिव पेट हेगसेथ और एनएसए ने संकेत दिया कि जब तक स्थायी युद्धविराम नहीं होता तब तक इसे केवल एक सामरिक पैंतरा माना जाना चाहिए।
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वैश्विक तेल बाजार पर प्रभाव
जैसे ही यह खबर फैली कि 10 टैंकर होर्मुज से सुरक्षित निकल गए हैं, वैश्विक तेल बाजार में हलचल मच गई
- कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव – ब्रेंट क्रूड जो $100 के पार जा रहा था, उसमें थोड़ी स्थिरता देखी गई।
- बीमा दरों में कमी – खाड़ी क्षेत्र में माल ढुलाई करने वाले जहाजों के बीमा प्रीमियम में मामूली गिरावट आई।
ईरान की आधिकारिक प्रतिक्रिया
तेहरान की ओर से मिश्रित संकेत मिले हैं। एक ओर जहां ईरानी अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर सीधे अमेरिका से बातचीत से इनकार किया है वहीं दूसरी ओर उन्होंने स्वीकार किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य केवल उनके “दुश्मनों” के लिए बंद है, “मित्रों” या “तटस्थ देशों” (जैसे पाकिस्तान) के लिए नहीं।
ईरानी विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि वे किसी भी ऐसे प्रस्ताव पर विचार करने को तैयार हैं जो ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाने और उसकी संप्रभुता का सम्मान करने की बात करता हो।
आगे का रास्ता
ट्रंप का यह दावा कि “ईरान ने तेल टैंकर उपहार में दिए” असल में व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग (Safe Passage) देने की एक कूटनीतिक रियायत है। पाकिस्तानी झंडे का उपयोग संघर्ष के बीच एक सुरक्षित गलियारा बनाने की कोशिश है।







