आम जनता के घरेलू बजट पर एक बार फिर महंगाई की मार पड़ी है। देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू रसोई गैस (LPG) सिलेंडर की कीमतों में ₹29 प्रति सिलेंडर का इजाफा कर दिया है। यह संशोधित दरें आज 7 जून 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो गई हैं।
मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के लिए यह खबर इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि पिछले तीन महीनों के भीतर घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। इससे पहले मार्च महीने में भी तेल कंपनियों ने कीमतों में बड़ा बदलाव किया था। इस मूल्यवृद्धि के मुख्य बिंदुओं, महानगरों के नए रेट और इस बढ़ोतरी के पीछे के असली कारणों को विस्तार से समझते हैं।
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- कीमतों में वृद्धि- घरेलू उपयोग वाले 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर पर ₹29 की सीधी बढ़ोतरी की गई है।
- लागू होने की तिथि- यह नई दरें 7 जून 2026 से देशभर में लागू हो चुकी हैं।
- 3 महीने में दूसरा झटका- इससे पहले 7 मार्च 2026 को तेल कंपनियों ने एलपीजी सिलेंडर के दामों में ₹60 की बढ़ोतरी की थी। यानी 90 दिनों के भीतर कुल ₹89 की वृद्धि हो चुकी है।
- उज्ज्वला लाभार्थियों को राहत- प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को सरकार की तरफ से मिलने वाली ₹300 की सब्सिडी जारी रहेगी, जिससे उन्हें यह वित्तीय बोझ थोड़ा कम महसूस होगा।
- महंगाई दर पर असर- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुमानों के मुताबिक, इस ईंधन वृद्धि का सीधा असर देश की खुदरा मुद्रास्फीति (CPI) पर पड़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में अन्य सामग्रियां भी महंगी हो सकती हैं।
प्रमुख शहरों में एलपीजी सिलेंडर की नई दरें (New City-wise Rates)
विभिन्न राज्यों में स्थानीय करों (Local Taxes) और परिवहन लागत (Transportation Cost) के कारण एलपीजी सिलेंडर की कीमतें अलग-अलग होती हैं। 7 जून से प्रभावी देश के प्रमुख महानगरों में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की नई दरें इस प्रकार हैं
| शहर का नाम | पुराना रेट (₹ में) | नया रेट (₹ में) | प्रति सिलेंडर वृद्धि (₹ में) |
| दिल्ली (New Delhi) | ₹913.00 | ₹942.00 | ₹29.00 |
| मुंबई (Mumbai) | ₹912.50 | ₹941.50 | ₹29.00 |
| कोलकाता (Kolkata) | ₹939.00 | ₹968.00 | ₹29.00 |
| बेंगलुरु (Bengaluru) | ₹915.50 | ₹944.50 | ₹29.00 |
| हैदराबाद (Hyderabad) | ₹965.00 | ₹994.00 | ₹29.00 |
नोट – उपर्युक्त कीमतों के अतिरिक्त अलग-अलग क्षेत्रों में डिस्ट्रीब्यूटर का डिलीवरी चार्ज मामूली रूप से भिन्न हो सकता है।
एलपीजी के दाम बढ़ने के मुख्य कारण (Reasons behind the Price Hike)
अंतरराष्ट्रीय बाजार की हलचल और तेल कंपनियों के वित्तीय घाटे इस अचानक हुई मूल्यवृद्धि के सबसे बड़े कारक हैं। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं
पश्चिम एशिया का तनाव और कच्चे तेल में उछाल
फरवरी के अंत से ही पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष की वजह से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मची हुई है। विशेषकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के मार्ग में पैदा हुई बाधाओं ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। इस रूट से दुनिया का लगभग एक-तिहाई एलपीजी व्यापार होता है। तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड लगातार $100 प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है जिससे ‘सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस’ (Saudi Contract Price – जो भारत में एलपीजी की कीमतों का आधार है) में फरवरी के बाद से लगभग 46% का उछाल आया है।
तेल कंपनियों का भारी वित्तीय घाटा (Under-Recovery)
इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी सरकारी तेल कंपनियां लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय कीमतों की तुलना में घरेलू उपभोक्ताओं को सस्ते दामों पर गैस उपलब्ध करा रही थीं। इस वजह से वे भारी घाटे (Under-recovery) में चल रही थीं। सूत्रों के मुताबिक, इस ₹29 की बढ़ोतरी से पहले तेल कंपनियों को प्रति घरेलू सिलेंडर पर करीब ₹703 का नुकसान उठाना पड़ रहा था। वर्तमान बढ़ोतरी से कंपनियों का घाटा केवल आंशिक रूप से ही कम हुआ है।
अन्य ईंधनों की कीमतों में क्रमिक वृद्धि
यह मूल्यवृद्धि केवल एलपीजी तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय संकट की वजह से मई के मध्य से लेकर अब तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी करीब ₹7.50 प्रति लीटर की संचयी बढ़त दर्ज की जा चुकी है, जबकि सीएनजी (CNG) भी ₹6 प्रति किलोग्राम तक महंगी हुई है। ऊर्जा क्षेत्र पर इसी चौतरफा दबाव के कारण एलपीजी की कीमतों में बदलाव अपरिहार्य हो गया था।
विशेषज्ञों की राय और आम जनता पर प्रभाव
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ता है, जिससे लोगों की खर्च करने की क्षमता (Disposable Income) प्रभावित होती है। हालांकि, पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, सरकार ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला है। यदि बाजार की वास्तविक लागत देखी जाए, तो बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत ₹1,600 से अधिक बैठती है, जबकि सरकार अब भी आम नागरिकों को ₹700 तक की अप्रत्यक्ष राहत दे रही है।
वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए ऊर्जा कीमतों में स्थिरता आने में थोड़ा समय लग सकता है। आगामी हफ्तों में यदि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है, तभी आम उपभोक्ताओं को रसोई गैस के मोर्चे पर राहत की उम्मीद की जा सकती है। तब तक के लिए परिवारों को अपने मासिक बजट को थोड़ा री-एडजस्ट करना होगा।







