भारत सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। छत्तीसगढ़ में भूमि अधिग्रहण से जुड़े कथित घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए राज्य के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं के संदेह में की गई है। ईडी की इस सक्रियता से न सिर्फ प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
भूमि अधिग्रहण में अनियमितताओं के आरोप और जांच की शुरुआत
भारतमाला परियोजना का उद्देश्य देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों और आर्थिक कॉरिडोर का विस्तार करना है। छत्तीसगढ़ में इस परियोजना के तहत बड़ी मात्रा में जमीन का अधिग्रहण किया गया था। इसी दौरान शिकायतें सामने आईं कि जमीन के मूल्यांकन और मुआवजा वितरण में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। आरोप है कि कुछ स्थानों पर कृषि भूमि को गैर-कृषि दर्शाकर उसका मूल्य कई गुना बढ़ाया गया, जबकि कहीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ऐसे लोगों को मुआवजा दिया गया, जिनका जमीन से कोई वास्तविक संबंध नहीं था।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि जमीन सौदों से जुड़े कुछ बिचौलियों ने स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया। इन आरोपों के आधार पर पहले संबंधित एजेंसियों ने प्रारंभिक जांच शुरू की, जिसके बाद मामला मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे में आने पर ईडी को सौंपा गया। ईडी ने धन शोधन निवारण कानून के तहत केस दर्ज कर विस्तृत जांच की तैयारी की और साक्ष्य जुटाने के लिए छापेमारी का फैसला लिया।
छत्तीसगढ़ में ताबड़तोड़ छापेमारी, दस्तावेज और डिजिटल सबूत खंगाले गए
ईडी की टीमों ने एक साथ कई जिलों में कार्रवाई की। रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और आसपास के इलाकों में जमीन सौदों से जुड़े लोगों, रियल एस्टेट से जुड़े कारोबारियों और कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों के परिसरों पर छापे मारे गए। छापेमारी के दौरान टीमों ने जमीन के रजिस्ट्रेशन से जुड़े कागजात, मुआवजा वितरण की फाइलें, बैंक खातों का विवरण और डिजिटल डाटा जब्त किया।
सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर प्राप्त अवैध धन को किन माध्यमों से इधर-उधर किया गया। बैंक लेनदेन, शेल कंपनियों और बेनामी संपत्तियों की भी पड़ताल की जा रही है। कुछ मामलों में संदिग्ध लेनदेन के संकेत मिले हैं, जिन्हें लेकर आगे पूछताछ की जा सकती है। ईडी की इस कार्रवाई को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह पूरे नेटवर्क की परतें खोलने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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राजनीतिक प्रतिक्रिया और आगे की संभावनाएं
ईडी की छापेमारी के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे बड़े स्तर के भ्रष्टाचार का प्रमाण बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष होती है, तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। वहीं सत्तापक्ष की ओर से कहा जा रहा है कि जांच एजेंसियां कानून के अनुसार काम कर रही हैं और किसी को भी बेवजह निशाना नहीं बनाया जा रहा।
कुछ नेताओं ने एजेंसियों की कार्रवाई को राजनीतिक दबाव से प्रेरित बताया है और आरोप लगाया है कि जांच का इस्तेमाल विपक्ष को डराने के लिए किया जा रहा है। हालांकि, ईडी का कहना है कि उसकी कार्रवाई पूरी तरह साक्ष्यों और कानून के दायरे में है। एजेंसी के अधिकारियों के अनुसार, छापेमारी अभी शुरुआती चरण है और आने वाले दिनों में पूछताछ, संपत्ति जब्ती और अन्य कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।
भारतमाला परियोजना देश की बुनियादी ढांचे की रीढ़ मानी जाती है। ऐसे में इससे जुड़े भूमि अधिग्रहण मामलों में सामने आ रही गड़बड़ियों ने शासन और प्रशासन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना अहम होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, किन लोगों की भूमिका उजागर होती है और क्या इस कार्रवाई से भविष्य में भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं में सुधार की राह खुलती है। फिलहाल, छत्तीसगढ़ में ईडी की इस कार्रवाई ने पूरे मामले को राष्ट्रीय स्तर की चर्चा का विषय बना दिया है।







