गाय के पित्ताशय में बनने वाली पथरी जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘कैलकुलस बोविस’ (Calculus Bovis) और सामान्यतः ‘गोरोचन’ या ‘बीजोआर’ (Bezoar) कहा जाता है वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक अनमोल वस्तु बन चुकी है। साल 2026 के आंकड़ों के अनुसार इसकी कीमत सोने की वैश्विक दरों को भी पीछे छोड़ चुकी है।
क्या है ‘मवेशी पित्त पथरी’ (Bovine Gallstones)
यह गाय, बैल या भैंस के पित्ताशय (Gallbladder) में जमा होने वाले खनिज और पित्त पिगमेंट का एक ठोस पुंज होता है। यह ठीक वैसी ही प्रक्रिया है जैसे मनुष्यों में पित्त की पथरी बनती है। आमतौर पर यह नारंगी-पीले से लेकर गहरे भूरे रंग की होती है और इसकी बनावट मिट्टी के ढेले जैसी लेकिन काफी सख्त होती है।
यह इतनी दुर्लभ क्यों है?
- उम्र का कारक – यह पथरी अक्सर उन्हीं मवेशियों में पाई जाती है जिनकी आयु 10-15 वर्ष से अधिक हो। आधुनिक डेयरी और मांस उद्योग में मवेशियों को बहुत कम उम्र में ही काट दिया जाता है जिससे इसके प्राकृतिक रूप से बनने की संभावना न्यूनतम हो गई है।
- उपलब्धता – आंकड़ों के अनुसार लगभग 2,000 से 3,000 मवेशियों की जांच करने पर मुश्किल से 1 किलोग्राम अच्छी गुणवत्ता वाली पथरी प्राप्त होती है।
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अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने से भी महंगी क्यों?
मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में उच्च गुणवत्ता वाली गाय की पथरी की कीमत $5,800 प्रति औंस (लगभग 5 लाख रुपये प्रति 28 ग्राम) तक पहुंच गई है। इसकी तुलना में सोने की कीमत अक्सर इससे कम रहती है।
| विशेषता | विवरण |
| वैश्विक मांग | चीन, जापान और दक्षिण पूर्व एशिया में अत्यधिक मांग। |
| मुख्य उपयोग | पारंपरिक चीनी चिकित्सा (TCM) और हृदय रोगों की दवाओं में। |
| ग्रेडिंग | सोने जैसी पीली और साबुत पथरी (Whole Stones) सबसे महंगी होती है। |
| कालाबाजारी | इसकी बढ़ती कीमतों के कारण ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में अब ‘पशु चोरी’ के बजाय ‘पित्त पथरी’ के लिए गिरोह सक्रिय हो गए हैं। |
औषधीय महत्व – उच्च रक्तचाप और हृदय रोग
पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों, विशेष रूप से ‘अंगोंग निउहुआंग वान’ (Angong Niuhuang Wan) जैसी प्रसिद्ध चीनी और जापानी दवाओं में इसे मुख्य घटक के रूप में उपयोग किया जाता है। इसके औषधीय लाभ निम्नलिखित हैं
- उच्च रक्तचाप (Hypertension) का नियंत्रण – इसमें मौजूद बिलीरुबिन और कोलिक एसिड रक्त वाहिकाओं को आराम देने और रक्त के प्रवाह को सुगम बनाने में सहायक माने जाते हैं, जिससे रक्तचाप संतुलित रहता है।
- हृदय रोग और स्ट्रोक (Stroke) – वैज्ञानिक शोधों के अनुसार इसके अर्क में शामक (Sedative) और सूजनरोधी (Anti-inflammatory) गुण होते हैं। यह मस्तिष्क की नसों को शांत करने और स्ट्रोक के बाद होने वाली जटिलताओं को कम करने में प्रभावी माना जाता है।
अन्य उपयोग
- लिवर डिटॉक्स – यह यकृत (Liver) से विषाक्त पदार्थों को निकालने में मदद करता है।
- बुखार और ऐंठन – बच्चों में तेज बुखार और दौरे (Convulsions) के इलाज में इसका ऐतिहासिक उपयोग रहा है।
गुणवत्ता और पहचान के मानक
बाजार में इसकी कीमत इसकी गुणवत्ता पर निर्भर करती है
- रंग – सुनहरा पीला (सर्वाधिक कीमती) > भूरा > काला।
- आकार – पूरी तरह साबुत गोल या अंडाकार पत्थर। टूटे हुए टुकड़ों की कीमत 30% से 50% तक कम हो जाती है।
- शुद्धता – इसमें बिलीरुबिन की मात्रा कम से कम 35% होनी चाहिए।
नैतिक और कानूनी चुनौतियां
चूंकि यह एक पशु उत्पाद है इसलिए इसके व्यापार के लिए कड़े अंतरराष्ट्रीय नियम (CITES और सीमा शुल्क कानून) लागू होते हैं। भारत में भी गोवंश से जुड़े उत्पादों के व्यापार के लिए विशेष अनुमतियों की आवश्यकता होती है।
भारत से निर्यात के कानूनी नियम
भारत में गोरोचन या पशु उत्पादों का निर्यात अत्यधिक विनियमित (Regulated) है। इसके लिए कड़े कानूनी प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य है
निर्यात की श्रेणी (ITC-HS Code)
भारतीय विदेश व्यापार नीति के तहत, पशु उत्पादों को ITC (HS) कोड 0511 के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है।
प्रमुख आवश्यकताएं
- APEDA पंजीकरण – निर्यातक को कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के साथ पंजीकृत होना चाहिए।
- स्वास्थ्य प्रमाण पत्र (Veterinary Health Certificate) – निर्यात से पहले केंद्र सरकार के पशु संगरोध और प्रमाणन सेवा (AQCS) से एक स्वास्थ्य प्रमाणपत्र प्राप्त करना आवश्यक है जो यह सुनिश्चित करता है कि उत्पाद किसी बीमारी से संक्रमित नहीं है।
- CAPEXIL क्लियरेंस – पशु उप-उत्पादों के लिए CAPEXIL (Chemical and Allied Export Promotion Council) से शिपमेंट क्लियरेंस सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होता है।
- वन्यजीव कानून का पालन – यदि यह किसी जंगली पशु से संबंधित पाया जाता है, तो यह वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित हो सकता है। पालतू गायों के मामले में भी स्रोत का प्रमाण देना आवश्यक है।
निर्यात की चुनौतियां
- तस्करी – अत्यधिक कीमत के कारण इसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तस्करी भी होती है, जिसे रोकने के लिए सीमा शुल्क (Customs) विभाग बेहद सख्त है।
- गुणवत्ता जांच – अंतरराष्ट्रीय खरीदार केवल उसी पथरी की ऊंची कीमत देते हैं जो पूरी तरह सूखी, सुनहरे-पीले रंग की और बिना किसी अशुद्धि के हो।
चेतावनी – इसकी अत्यधिक मांग के कारण बाजार में ‘सिंथेटिक’ या नकली पथरी भी बेची जा रही है। असली गोरोचन की पहचान के लिए प्रयोगशाला परीक्षण अनिवार्य है।
क्या आप जानते हैं?
बाजार में इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए अब लैब में ‘आर्टिफिशियल कैलकुस बोविस’ भी तैयार किया जा रहा है लेकिन प्राकृतिक पथरी (Natural Stone) की कीमत और प्रभावकारिता के सामने इसकी मांग अभी भी बहुत अधिक है







