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भारत में कैसे मिला था एड्स (HIV) का पहला मामला, राजीव गांधी को दी गई थी जानकारी

HIV
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 5, 2025 8:14 अपराह्न
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भारत में एड्स की दस्तक: 1986 का वो ऐतिहासिक क्षण

आज एड्स और HIV के बारे में दुनिया बहुत कुछ जानती है, लेकिन 1980 के दशक में यह शब्द भारत के लिए लगभग अनसुना था। डॉक्टरों को भी पूरी तरह समझ नहीं थी कि यह बीमारी कैसे फैलती है, इसका असर कितना घातक है और इससे बचाव कैसे किया जाए।

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भारत में एचआईवी/एड्स का पहला आधिकारिक मामला वर्ष 1986 में दर्ज हुआ था — और यह खोज न सिर्फ चिकित्सा इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय बनी, बल्कि देश की स्वास्थ्य नीति को भी हमेशा के लिए बदल गई।

पहली बार कहाँ मिला HIV संक्रमण?

1986 में तमिलनाडु के मद्रास (अब चेन्नई) के एक अस्पताल में कुछ महिला सेक्स-वर्कर्स की नियमित स्वास्थ्य जांच की जा रही थी।

उस समय मद्रास मेडिकल कॉलेज और जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, USA के सहयोग से एक अध्ययन चल रहा था। इन्हीं जांचों के दौरान डॉक्टरों ने कुछ नमूनों में HIV पॉज़िटिव परिणाम देखे।

पहले डॉक्टरों को शक हुआ कि यह जांच में कोई तकनीकी गलती तो नहीं, लेकिन लगातार दोबारा टेस्ट में भी HIV पॉज़िटिव पाया गया। यही वह क्षण था जब भारत में पहली बार AIDS वायरस की पुष्टि हुई। इन शुरुआती मामलों की आधिकारिक संख्या – 6 महिलाएँ।

किस डॉक्टर ने उठाया पहला कदम?

भारत में HIV का पहला मामला पहचानने का श्रेय जाता है: डॉ. सुनीति सोलोमन (मद्रास मेडिकल कॉलेज, माइक्रोबायोलॉजी विभाग) उन्होंने अपने छात्रों और सहयोगियों के साथ मिलकर इस गंभीर खोज को डॉक्युमेंट किया और तुरंत केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय व इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) को सूचित किया।

डॉ. सोलोमन ने बाद में कहा था कि “पहली रिपोर्ट ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को झकझोर दिया था। हमें पता था कि यह सिर्फ शुरुआत है।”

राजीव गांधी तक कैसे पहुँची जानकारी?

उस समय देश के प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे। HIV के पहले मामलों की जानकारी सीधे ICMR और स्वास्थ्य मंत्रालय के जरिए प्रधानमंत्री कार्यालय तक भेजी गई।

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उस समय राजीव गांधी तकनीक और विज्ञान को लेकर काफी सक्रिय थे, इसलिए जब उन्हें यह रिपोर्ट सौंपी गई, तो उन्होंने तुरंत उच्च स्तरीय बैठक बुलाई।

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रिपोर्ट में मुख्य बिंदु थे:

  • भारत में एड्स के पहले केस की पुष्टि हो चुकी है
  • यह बीमारी तेजी से फैल सकती है
  • सामाजिक कलंक और जागरूकता की बड़ी चुनौती सामने है
  • जल्द से जल्द राष्ट्रीय रणनीति बनाने की जरूरत है

राजीव गांधी ने स्वास्थ्य मंत्रालय को आदेश दिए कि:

  1. इस पर विशेष समिति बनाई जाए
  2. अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों (WHO आदि) की मदद ली जाए
  3. देश में HIV टेस्टिंग और रोकथाम के कार्यक्रम शुरू किए जाएँ

सरकार की तत्काल प्रतिक्रिया — NACO की नींव

इन्हीं शुरुआती केसों और राजीव गांधी को दी गई रिपोर्ट के बाद भारत सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए।

1992 में बना — NACO (National AIDS Control Organisation) यह संगठन देश में HIV रोकथाम, टेस्टिंग, जागरूकता और इलाज समन्वय का सबसे बड़ा केंद्र बना।

हालाँकि शुरुआत 1986–87 में ही हो गई थी —

अस्पतालों में HIV टेस्ट शुरू हुए, रक्तदान केंद्रों में स्क्रीनिंग अनिवार्य हुई, जागरूकता अभियान चलाए गए|यह सब इसलिए संभव हुआ क्योंकि प्रधानमंत्री को तुरंत जानकारी दी गई और उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट की तरह लिया।

भारत में शुरुआत के बाद तेज़ी से बढ़ा नेटवर्क पहले छह मामलों के बाद जल्द ही देश के अन्य हिस्सों से भी रिपोर्ट आने लगीं —

  • मुंबई
  • मणिपुर
  • नागालैंड
  • कर्नाटक

90 के दशक तक HIV संक्रमण भारत के कई राज्यों में फैल चुका था।

लेकिन शुरुआती पहचान, राजीव गांधी को दी गई जानकारी, और तुरंत उठाए गए कदमों ने भारत को उस गंभीर महामारी से काफी हद तक बचाए रखा, जो कई अफ्रीकी देशों में भारी जनहानि का कारण बनी थी।

भारत की HIV लड़ाई आज कहाँ पहुँची?

आज भारत में70 लाख से अधिक लोग HIV के साथ जी रहे हैंलाखों लोग फ्री ART दवाएँ ले रहे हैंजन्म से होने वाले HIV ट्रांसमिशन में भारी गिरावट आई हैसामाजिक जागरूकता पहले से बहुत बेहतर है| यह सब 1986 की उस पहली रिपोर्ट से शुरू हुआ, जिसने पूरे भारत का ध्यान खींचा।

एक खोज जिसने भारत की दिशा बदल दी

भारत में एड्स का पहला मामला किसी बड़े शहर के VIP अस्पताल में नहीं, बल्कि समाज के हाशिए पर रहने वाली महिलाओं में मिला। और उस एक खोज ने भारत सरकार को चेताया, जिसने समय रहते बड़े कदम उठाए।

राजीव गांधी को दी गई जानकारी ने भारत की स्वास्थ्य नीतियों को नया रूप दिया— और यह साबित किया कि सही समय पर मिली वैज्ञानिक सूचना पूरे देश का भविष्य बदल सकती है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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