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खाड़ी संकट का असर – 11 लाख से ज्यादा भारतीय लौटे घर

खाड़ी संकट का असर - 11 लाख से ज्यादा भारतीय लौटे घर
नवजोत कौर सिद्धू
On: अप्रैल 22, 2026 3:49 अपराह्न
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नई दिल्ली। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत ने हाल के समय में पश्चिम एशिया में रह रहे अपने एक करोड़ लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए वहां से 11,61,000 से अधिक यात्रियों की सफल वापसी सुनिश्चित की है। यह आंकड़ा क्षेत्र में युद्ध छिड़ने, अर्थात 28 फरवरी 2026 से अब तक का है।यह हालिया वर्षों में सबसे बड़े नागरिक वापसी अभियानों में से एक माना जा रहा है। 

नई दिल्ली में बैठे नीति निर्धारकों से लेकर खाड़ी के छोटे शहरों में रहने वाले आम कामगारों तक, हर कोई इस वक्त एक अनिश्चित भविष्य की ओर देख रहा है,पश्चिम एशिया में सुरक्षा हालात अचानक नहीं बिगड़े, लेकिन फरवरी के अंत में जिस तरह से सैन्य गतिविधियों ने जोर पकड़ा, उसने आम नागरिकों के मन में गहरा खौफ पैदा कर दिया। कई देशों के बीच बढ़ते टकराव और मिसाइल हमलों की धमकियों ने उन इलाकों को भी असुरक्षित बना दिया जिन्हें अब तक सुरक्षित माना जाता था। 

वहां काम कर रहे भारतीय पेशेवरों और मजदूरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि वे अपने काम को प्राथमिकता दें या अपनी जान को। धीरे-धीरे हवाई सेवाएं बाधित होने लगीं और कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने अपनी उड़ानें रद्द कर दीं। जैसे ही यह खबर फैली, भारतीय प्रवासियों के बीच घर लौटने की होड़ मच गई। परिवारों की चिंता और वहां के असुरक्षित माहौल ने लोगों को मजबूर कर दिया कि वे अपनी बरसों की मेहनत को पीछे छोड़कर वतन की ओर रुख करें।

आंकड़ों से उड़ी सरकार की नींद

शुरुआत में लगा था कि ये बस कुछ दिनों का तनाव है, पर मार्च बीतते-बीतते यह एक बड़े मानवीय संकट में बदल गया। सरकार ने भी शायद ही सोचा होगा कि निकासी का आंकड़ा 11 लाख को पार कर जाएगा। यह हाल के इतिहास का सबसे बड़ा ‘रेस्क्यू ऑपरेशन’ बन गया। दिल्ली में विदेश मंत्रालय के दफ्तरों में बत्तियां रात भर जलने लगीं। दूतावासों ने उन इलाकों से भी लोगों को निकाला जहां पहुंचना नामुमकिन लग रहा था। यह सरकार की बड़ी कामयाबी  है

अर्थव्यवस्था(Economy) पर असर 

पश्चिम एशिया में जारी यह उठा पटक पूरे विश्व के लिए एक संकट बन गई है, जिसमें भारत भी अछूता नहीं  रहा, अर्थशास्त्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था में पश्चिम एशिया से आने वाले विदेशी धन यानी रेमिटेंस की बहुत बड़ी भूमिका होती है। लाखों परिवारों का गुजारा इसी पैसे से होता है। अब जब इतनी बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार होकर लौटे हैं, तो इसका सीधा असर ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था की खपत पर पड़ेगा। विशेषज्ञ इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आने वाले महीनों में विदेशी मुद्रा भंडार में आने वाली गिरावट भारतीय बाजार को प्रभावित कर सकती है। 

इसके अलावा, भारत में पहले से ही मौजूद बेरोजगारी की समस्या अब और भी विकराल रूप ले सकती है क्योंकि लौटे हुए इन कुशल श्रमिकों को यहां नया काम तलाशना होगा,ताजा हालातों को देखते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय(MEA) ने साफ कर दिया है कि सरकार का पूरा ध्यान उन लोगों पर है जो अब भी पश्चिम एशिया के संवेदनशील इलाकों में फंसे हुए हैं।उनकी निगरानी और सुरक्षा सर्वोपरि है। हर भारतीय की सलामती सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी बातचीत जारी है। सरकार का कहना है कि अगर हालात और ज्यादा बिगड़ते हैं, तो निकासी अभियान को और भी तेज किया जाएगा। लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे स्थानीय दूतावासों के संपर्क में रहें l

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Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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