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Regulate या Ban: कर्नाटक की Online Racing push और Central Gaming Law का टकराव

कर्नाटक की Online Racing push और Central Gaming Law का टकराव
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 10, 2025 11:50 पूर्वाह्न
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भारत में ऑनलाइन गेमिंग (Online Gaming) के विनियमन (Regulation) को लेकर केंद्र सरकार और कर्नाटक राज्य सरकार के बीच एक बड़ा संवैधानिक संघर्ष (Constitutional Conflict) उभर आया है। यह विवाद ऑनलाइन रेसिंग (Online Racing) पर दांव लगाने की अनुमति देने के कर्नाटक के कदम से शुरू हुआ है, जो केंद्र सरकार के नए और सख्त ‘ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन और विनियमन अधिनियम, 2025’ (Promotion and Regulation of Online Gaming Act, 2025 – PROGA) के बिल्कुल विपरीत है।

कर्नाटक की Online Racing push और Central Gaming Law का टकराव

केंद्र का नया कानून: ‘सब पर प्रतिबंध’

केंद्र सरकार ने अगस्त 2025 में PROGA अधिनियमित किया। इस कानून का मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन रियल-मनी गेम्स (Real Money Games – RMGs) पर पूरी तरह से प्रतिबंध (Ban) लगाना है।

  • व्यापक प्रतिबंध: PROGA कौशल-आधारित (Skill-based) या संयोग-आधारित (Chance-based) किसी भी प्रकार के ऑनलाइन गेम, जिनमें पैसे का दांव (Monetary Stakes) शामिल है, पर पूरी तरह से रोक लगाता है।
  • उद्देश्य: इस कानून का उद्देश्य ऑनलाइन जुए से जुड़े वित्तीय नुकसान, लत (Addiction) और काले धन (Black Money) के खतरों से जनता, खासकर युवाओं, को बचाना है।
  • सजा का प्रावधान: इसका उल्लंघन करने पर ऑपरेटरों के लिए 3 साल तक की कैद और ₹1 करोड़ तक का जुर्माना हो सकता है।

यह अधिनियम, एक तरह से, गेमिंग के क्षेत्र में राज्य सरकारों के क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) पर केंद्र का एक व्यापक हस्तक्षेप है।

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कर्नाटक का ‘विनियमन’ मॉडल: हॉर्स रेसिंग

कर्नाटक सरकार ने इस केंद्रीय प्रतिबंध को दरकिनार करते हुए ‘कर्नाटक रेस कोर्स लाइसेंसिंग अधिनियम, 1952’ में संशोधन करने का प्रस्ताव तैयार किया है।

  • ऑनलाइन रेसिंग को कानूनी बनाना: इस प्रस्तावित बिल का उद्देश्य लाइसेंस प्राप्त प्लेटफॉर्म को हॉर्स रेसिंग (Horse Racing) पर ऑनलाइन दांव लगाने की अनुमति देना है।
  • कौशल का खेल (Game of Skill): कर्नाटक का तर्क है कि हॉर्स रेसिंग एक कौशल-आधारित गतिविधि है, जैसा कि सर्वोच्च न्यायालय ने अतीत में भी माना है। इसलिए, इस पर दांव लगाना जुआ (Gambling) नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि एक वैध व्यावसायिक गतिविधि (Legitimate Business Activity) के रूप में विनियमित होना चाहिए।
  • राजस्व का स्रोत: राज्य सरकार का यह कदम राजस्व (Revenue) बढ़ाने और अनियमित बाजार (Unregulated Market) को वैध और विनियमित दायरे में लाने के लिए भी है।

संघीय ढाँचे पर सवाल (Challenge to Federal Structure)

कर्नाटक का यह कदम भारत के संघीय ढाँचे (Federal Structure) में एक बड़ा सवाल खड़ा करता है: सट्टेबाजी और जुए (Betting and Gambling) को राज्य सूची (State List) का विषय माना जाता है, यानी इस पर कानून बनाने का प्राथमिक अधिकार राज्यों के पास है।

  • अधिकारों का उल्लंघन: कर्नाटक और कई कानूनी विशेषज्ञ तर्क दे रहे हैं कि केंद्र सरकार का PROGA राज्य के अधिकारों का उल्लंघन है और यह ‘कलरबल एक्सरसाइज ऑफ पावर’ (Colourable Exercise of Power) है। उनका मानना है कि किसी गतिविधि का डिजिटल माध्यम (Digital Medium) में होना उसे जादुई तरीके से राज्य सूची से हटाकर केंद्र सूची में नहीं डाल देता।
  • न्यायिक चुनौती: PROGA पहले से ही कर्नाटक उच्च न्यायालय और अब सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती का सामना कर रहा है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यापार करने की स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है, क्योंकि यह कौशल-आधारित खेलों को भी प्रतिबंधित करता है।
  • विनियमन या पूर्ण प्रतिबंध: यह बहस इस बात पर केंद्रित है कि क्या ऑनलाइन गेमिंग को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए, जिससे उपयोगकर्ता अवैध ऑफशोर प्लेटफॉर्म की ओर चले जाएं, या इसे लाइसेंसिंग, KYC और जिम्मेदार गेमिंग जैसे उपायों के साथ विनियमित किया जाना चाहिए, जिससे राजस्व भी प्राप्त हो और खिलाड़ी सुरक्षित रहें।

कर्नाटक का प्रस्तावित बिल देश के तेजी से बढ़ते ऑनलाइन गेमिंग क्षेत्र में राज्य बनाम केंद्र के बीच जारी इस मौलिक संघर्ष को और बढ़ाएगा।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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