आज (4–5 दिसंबर 2025) दिल्ली में हुई भारत–रूसी शिखर बैठक के दौरान Modi and Putin ने कई बड़े समझौते पर हस्ताक्षर किये। इन समझौतों में केवल रक्षा ही नहीं ऊर्जा, आर्थिक, स्वास्थ्य, श्रम, वाणिज्यिक और अंतरिक्ष सहित कई क्षेत्र शामिल रहे।
Modi and Putin Meeting – मुख्य घोषणाएँ और समझौते

वाणिज्यिक और आर्थिक सहयोग — 2030 तक का रोडमैप
दोनों देशों ने एक आर्थिक सहयोग कार्यक्रम (Economic Cooperation Agreement) तय किया है, जो 2030 तक चलेगा। इसका मकसद भारत–रूस के व्यापार और निवेश को मौजूदा स्तर से आगे बढ़ाना है। इस समझौते के तहत कई क्षेत्रों में निवेश और साझेदारी होगी — खाद्य सुरक्षा, फ़र्टिलाइज़र, पोर्ट एवं शिपिंग, मेडिकल साइंस, शिपिंग लॉजिस्टिक आदि।
उदाहरण के लिए — रूस की एक कंपनी (URALCHEM) के साथ मिलकर यूरिया (fertilizer) प्लांट लगाने का फैसला हुआ है।
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ऊर्जा, ईंधन और ऊर्जा सुरक्षा
पुतिन ने भारत को भरोसा दिलाया कि रूस भारत को बाधित न होने वाली ईंधन (तेल-गैस/ऊर्जा) आपूर्ति जारी रखेगा। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि ऊर्जा सुरक्षा और विविध स्रोत — चाहे वो परमाणु हो, कोयला हो या अन्य संसाधन — दोनों के लिए अहम हैं।
रक्षा व सैन्य-तकनीकी साझेदारी मजबूत
रूस ने पहले ही एक मुख्य सैन्य-लॉजिस्टिक समझौता Reciprocal Exchange of Logistic Support (RELOS) Agreement को संसद (ड्यूमा) में मंज़ूर कर लिया था — अब यह समझौता प्रभावी हो गया है।
इस समझौते से दोनों देशों को मिलकर सैन्य अभ्यास, पोर्ट्स/एयरबेस का साझा उपयोग, युद्धपोत और विमान आवाजाही, आपातकालीन सहायता, मानवीय राहत और लॉजिस्टिक सपोर्ट जैसी सहूलियतें मिलेंगी। इसके अलावा, बातचीत में संभव है कि अतिरिक्त S-400 missile system और Su-57 fighter jet जैसे रक्षा सौदों की भी समीक्षा हो।
टेक्नोलॉजी, अंतरिक्ष व विज्ञान-सहयोग
भारत और रूस ने अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने की योजना पर सहमति जताई है — जिसमें संभवतः रॉकेट इंजन तकनीक हस्तांतरण, संयुक्त विकास, वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रशिक्षण व तकनीकी साझेदारी शामिल हो सकते हैं।
इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य, कृषि, शिपिंग, पोर्ट लॉजिस्टिक, मीडिया/संस्कृति जैसे क्षेत्रों में भी समझौतों और MoU पर चर्चा हुई है।
व्यापक रणनीतिक और राजनीतिक मायने
यह मुलाकात — 25 साल पुरानी भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी की पुष्टि है। दोनों देशों का कहना है कि उनका रिश्ता अब भी “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त” है।
अमेरिका सहित पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद, Modi and Putin ने भारत और रूस ने अपने रिश्तों को आगे बढ़ाने की मंशा जताई है। यह भारत की विदेश नीति में संतुलन (strategic autonomy) की पुष्टि करता है — जहाँ वह पश्चिम और रूस दोनों से संबंध बनाए रखना चाहता है।







