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भारत में बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर उग्र प्रदर्शन, हिंदुओं पर हिंसा के विरोध में टूटीं बैरिकेडिंग

भारत में बांग्लादेश उच्चायोग
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 24, 2025 1:10 अपराह्न
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बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ कथित हिंसा और मंदिरों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं के विरोध में शुक्रवार को भारत में बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला। बड़ी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बैरिकेडिंग तोड़ दी, जिसके बाद इलाके में कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई। हालात को देखते हुए दिल्ली पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा और पूरे क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया।

भारत में बांग्लादेश उच्चायोग

भारत में बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर कैसे शुरू हुआ प्रदर्शन

सुबह से ही विभिन्न हिंदू संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रवासी बांग्लादेशी हिंदुओं के समूह चाणक्यपुरी इलाके में जुटने लगे थे। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर “बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करो”, “धार्मिक अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बंद करो” और “मानवाधिकारों का सम्मान करो” जैसे नारे लिखे थे।

शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन जैसे-जैसे भीड़ बढ़ती गई, नारेबाजी तेज होती चली गई। कुछ प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बैरिकेड्स को धक्का देना शुरू कर दिया, जिसके बाद स्थिति बिगड़ गई।

बैरिकेडिंग टूटी, पुलिस से धक्का-मुक्की

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका तो कुछ युवाओं ने बैरिकेड्स पर चढ़ने की कोशिश की। इसी दौरान धक्का-मुक्की हुई और एक बैरिकेड टूट गया। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को पीछे धकेला और अतिरिक्त बैरिकेड्स लगाकर क्षेत्र को सील कर दिया।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्थिति को जल्द ही नियंत्रण में ले लिया गया और किसी को गंभीर चोट नहीं आई। हालांकि, कुछ प्रदर्शनकारियों को हल्की चोटें आने की सूचना है।

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क्या हैं आरोप

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि हाल के दिनों में बांग्लादेश के कई इलाकों में हिंदू समुदाय को निशाना बनाया गया है। उनके मुताबिक मंदिरों में तोड़फोड़, घरों में आगजनी, जबरन पलायन और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आई हैं।

प्रदर्शन में शामिल संगठनों का कहना है कि बांग्लादेश सरकार इन घटनाओं को रोकने में नाकाम रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हो रही।

प्रदर्शनकारियों की मांगें

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने भारत सरकार से इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाने की मांग की। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार रहीं-

  • बांग्लादेश सरकार पर कूटनीतिक दबाव बनाया जाए।
  • अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हस्तक्षेप हो।
  • हिंसा की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
  • पीड़ितों को मुआवजा और सुरक्षा दी जाए।

एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “हम किसी देश के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन मानवाधिकारों का उल्लंघन कहीं भी हो, उसका विरोध जरूरी है। बांग्लादेश में हिंदू डर के माहौल में जी रहे हैं।”

पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उच्चायोग जैसे संवेदनशील इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “प्रदर्शन की अनुमति सीमित संख्या में दी गई थी। जैसे ही भीड़ ने बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की, हमने हस्तक्षेप किया और स्थिति को नियंत्रित किया।”

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी प्रदर्शनकारी को उच्चायोग परिसर के भीतर जाने की अनुमति नहीं दी गई।

बांग्लादेश उच्चायोग की प्रतिक्रिया

बांग्लादेश उच्चायोग की ओर से इस मामले में आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया, लेकिन सूत्रों के अनुसार, उच्चायोग ने भारत सरकार और दिल्ली पुलिस के साथ संपर्क बनाए रखा। उच्चायोग के अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था पर संतोष जताया और कहा कि कूटनीतिक मिशनों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय दायित्व है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। कुछ विपक्षी नेताओं ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और केंद्र सरकार से कूटनीतिक स्तर पर ठोस कदम उठाने की मांग की।

वहीं, सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने कहा कि भारत हमेशा पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की आवाज उठाता रहा है और यह मुद्दा भी सरकार के संज्ञान में है।

भारत-बांग्लादेश संबंधों पर असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रदर्शन भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर संवेदनशील माहौल बनाते हैं। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते मजबूत रहे हैं, लेकिन अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर समय-समय पर तनाव भी सामने आता रहा है।

विदेश नीति के जानकारों के अनुसार, भारत इस मामले में संतुलित रुख अपनाने की कोशिश करेगा, ताकि मानवाधिकारों की चिंता भी जाहिर हो और द्विपक्षीय संबंधों में अनावश्यक खटास भी न आए।

 इलाके में सुरक्षा बढ़ी

प्रदर्शन के बाद चाणक्यपुरी और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अतिरिक्त पुलिस बल, अर्धसैनिक जवान और त्वरित प्रतिक्रिया टीमें तैनात की गई हैं। यातायात पर भी कुछ समय के लिए असर पड़ा, हालांकि बाद में स्थिति सामान्य हो गई।

भारत में बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर हुआ यह प्रदर्शन न सिर्फ पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर घरेलू स्तर पर भावनाएं कितनी तीव्र हो सकती हैं। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन यह मामला एक बार फिर भारत-बांग्लादेश संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता पर बहस को तेज कर सकता है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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