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युगपुरुष का महाप्रयाण शिल्प कला के विश्वकर्मा राम वी. सुतार का 100 साल की उम्र में निधन

राम वी. सुतार
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 20, 2025 12:15 पूर्वाह्न
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​भारतीय मूर्तिकला के आकाश में सात दशकों तक देदीप्यमान रहे नक्षत्र पद्म भूषण राम वनजी सुतार का 100 वर्ष की आयु में नोएडा स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वे केवल एक मूर्तिकार नहीं थे बल्कि वे पत्थर और धातु में प्राण फूंकने वाले आधुनिक भारत के विश्वकर्मा थे। दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के रचयिता के रूप में उनका नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो चुका है। उनके जाने से कला जगत ने अपना सबसे अनुभवी और विजनरी कलाकार खो दिया है।

राम वी. सुतार

​प्रारंभिक जीवन धूल से शिखर तक का सफर

​राम वी. सुतार का जन्म 19 फरवरी 1925 को महाराष्ट्र के धूलिया जिले के गोंडुर गाँव में हुआ था। एक साधारण परिवार में जन्मे राम सुतार को कला विरासत में मिली थी। उनके पिता एक बढ़ई कारपेंटर थे जिनसे उन्होंने औजारों को चलाना और लकड़ी को आकार देना सीखा।

​शिक्षा और प्रेरणा उन्होंने मुंबई के प्रसिद्ध जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट्स से शिक्षा प्राप्त की। वहाँ उन्होंने अपनी प्रतिभा का ऐसा परिचय दिया कि उन्हें प्रतिष्ठित मेयो मेडल से सम्मानित किया गया। उनके गुरुओं ने तभी पहचान लिया था कि यह युवा कलाकार भविष्य में भारत की पहचान बदलेगा।

​स्टैच्यू ऑफ यूनिटी ने दुनिया को दी एक नई पहचान

​राम वी. सुतार के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी रही। गुजरात के नर्मदा जिले में स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर ऊंची यह प्रतिमा उनके धैर्य तकनीक और कला का सर्वोच्च प्रमाण है।

​चुनौतियां और उपलब्धि 90 साल से अधिक की उम्र में भी उन्होंने इस परियोजना पर बारीकी से काम किया। उन्होंने सरदार पटेल के हजारों फोटोग्राफ्स का अध्ययन किया ताकि उनके चेहरे के भावों को बिल्कुल सटीक रूप दिया जा सके। यह प्रतिमा न केवल भारत की एकता का प्रतीक है बल्कि सुतार जी के अदम्य साहस की भी परिचायक है।

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​गांधीवादी विचारधारा के प्रतीक

​सुतार जी को महात्मा गांधी के मूर्तिकार के रूप में भी जाना जाता है। पूरी दुनिया में गांधी जी की जितनी भी बड़ी प्रतिमाएं लगी हैं उनमें से अधिकांश का सृजन सुतार जी ने ही किया है।

  • ​संसद भवन में स्थापित गांधी जी की ध्यानमग्न मुद्रा वाली प्रसिद्ध प्रतिमा उन्हीं की कृति है।
  • ​दुनिया के लगभग 350 से अधिक देशों में उनकी बनाई हुई गांधी प्रतिमाएं भारत के शांति संदेश को फैला रही हैं।

​प्रमुख कृतियाँ और योगदान

​राम वी. सुतार ने अपने जीवनकाल में 500 से अधिक विशाल प्रतिमाओं का निर्माण किया। उनकी कुछ प्रमुख कृतियों में शामिल हैं

  • ​अमृतसर में महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा।
  • ​गांधीनगर में महात्मा गांधी की प्रतिमा।
  • ​संसद भवन में लगी शिवाजी महाराज और भगत सिंह की प्रतिमाएं।
  • ​चंबल नदी के किनारे मध्य प्रदेश में 45 फीट ऊंची चंबल देवी की प्रतिमा।

 सम्मान और पुरस्कार

​भारत सरकार और विभिन्न संस्थाओं ने उनके योगदान को सराहा उन्हें-

  • ​1999 पद्म श्री सम्मान
  • ​2016पद्म भूषण भारत का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक पुरस्कार
  • ​2016 टैगोर सांस्कृतिक सद्भाव पुरस्कार राष्ट्रपति द्वारा प्रदत्त

​तकनीकी कौशल और कार्यशैली

​सुतार जी की विशेषता यह थी कि वे मिट्टी से मॉडल बनाने में माहिर थे। वे कहते थे जब तक आप मिट्टी के साथ एकाकार नहीं होते तब तक धातु में जान नहीं आ सकती वे नोएडा में अपना एक विशाल स्टूडियो चलाते थे जहाँ उनके बेटे अनिल सुतार जो स्वयं एक वास्तुकार हैं उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते थे।

​अंतिम समय और विरासत

​100 वर्ष की लंबी और सार्थक आयु जीने के बाद वृद्धावस्था संबंधी समस्याओं के कारण उन्होंने नोएडा में अंतिम सांस ली। उनके निधन पर प्रधानमंत्री राष्ट्रपति और कला जगत की तमाम हस्तियों ने शोक व्यक्त किया है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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